Om Birla की बेटी अंजलि बिरला हैं IRPS अफसर, क्या बिना परीक्षा दिए क्रैक की थी UPSC?
Om Birla Daughter IRPS Anjali Birla: लगातार दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल हुए ओम बिरला की बेटी अंजलि बिरला भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा (IRPS) की अधिकारी हैं। खूबसूरती के मामले में अंजलि बिरला बॉलीवुड एक्ट्रेस को भी मात देती है।
राजस्थान के कोटा से भाजपा सांसद ओम बिरला की छोटी बेटी अंजलि बिरला साल 2021 में उस वक्त चर्चा में आई थी जब ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष थे और अंजलि बिरला को लेकर सोशल मीडिया पर दावे किए गए कि अंजलि बिना यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा दिए ही पास IAS बन गईं। उनको बैकडोर एंट्री मिली है।

दरअसल, संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा 2019 का उसी साल 4 अगस्त को अंतिम परिणाम घोषित हुआ था, जिसमें कुल 927 वैकेंसी के लिए 829 अभ्यर्थियों का रिजल्ट जारी किया गया था। उनमें अंजलि बिरला का नाम नहीं था, मगर शेष बची हुई 98 सीटों पर यूपीएससी ने 4 जनवरी 2021 को रिजर्व लिस्ट में से 89 अभ्यर्थियों के नाम जारी किए थे।

यूपीएससी की वेबसाइट पर 4 जरवरी 2021 को जारी आरक्षित सूची के 89 सफल अभ्यर्थियों में अंजलि बिरला का नाम 67वें नंबर पर था। तब सोशल मीडिया में यह दावा किया जाने लगा कि अंजलि बिरला के पिता ओम बिरला लोकसभा अध्यक्ष होने के कारण उन्हें यूपीएससी की परीक्षा पास किए बिना ही अफसर बना दिया गया।

बाद में कई फैक्ट चेक रिपोर्ट में पता चला कि अंजलि बिरला को लेकर किए जा रहे दावे गलत हैं। उन्होंने यूपीएससी की प्री व मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू समेत चयन की सभी प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। बाद में अंजलि बिरला को भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा कैडर (आईआरपीएस) मिला। अंजलि बिरला को लेकर किए फर्जी दावों की पूरी फैक्ट चेक खबर यहां देखें
लोकसभा अध्यक्ष चुनाव 2024: ओम बिरला Vs के. सुरेश
18वीं लोकसभा के पहले सत्र के दूसरे दिन लोकसभा अध्यक्ष पद एनडीए व इंडिया ब्लॉक के बीच आम सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में एनडीए उम्मीदवार ओम बिरला व इंडिया ब्लॉक उम्मीदवार के रूप में के. सुरेश ने नामांकन पत्र दाखिल किया है। 72 साल के इतिहास में लोकसभा अध्यक्ष पद के तीसरी बार चुनाव हो रहे हैं।
साल 1952 में लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए पहली बार चुनाव हुए थे। तब जीवी मालवणकर और शंकर शांताराम के बीच चुनावी मुकाबला हुआ था। लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए तीसरी बार चुनाव साल 1976 में (आपातकाल के दौरान) हुए थे। तब बालीग्राम भगत बनाम जगन्नाथ राव के बीच मुकाबला हुआ था।












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