Lok Sabha Elections: कैसे एक- एक वोट का डेटा रखा जाता है सुरक्षित? ECI ने दिया पूरा ब्यौरा
भारत निर्वाचन आयोग ने पांचवें चरण के मतदान के बाद वोटिंग का डेटा जारी करने के सवाल को लेकर जवाब दिया है। आयोग ने मतदाताओं को विश्वास दिलाया कि लोकसभा चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ कराया जा रहा है। व्यवस्था ऐसी है कि वोटिंग के डेटा में किसी भी तरीके के बदलाव की कोई गुंजाइश ही नहीं है।
ईसीआई ने छठवें चरण के मतदान के बीच दावा किया कि मतदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। एक बयान में चुनाव आयोग ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से पूरी तरह मजबूत महसूस कर रहा है, जिसमें चुनाव आयोग को अपनी वेबसाइट पर सभी मतदान केंद्रों पर मतदान के अंतिम आंकड़ों को प्रकाशित करने का निर्देश देने की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया गया था।

जिसके जवाब में चुनाव आयोग ने कहा कि वोटों को सुरक्षित करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। चुनाव के डेटा में बदलाव के आरोप सिर्फ झूठी बातें हैं। इस नए प्रारूप में प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की पूर्ण संख्या शामिल होगी। चुनाव पैनल ने जनता को आश्वासन दिया कि डाले गए वोटों की संख्या में कोई भी बदलाव असंभव है।
डेटा को रिकॉर्ड करने और जारी करने से जुड़ी प्रक्रिया का ईसीआई ने दिया ब्यौरा
चुनाव आयोग निम्न चरणों में वोटिंग का डेटा रखता है-
- अंतिम मतदाता सूची: अंतिम रूप देने के बाद उम्मीदवारों को प्रदान की जाती है।
- फॉर्म 17सी: पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए, अधिकृत एजेंटों को प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए यह फॉर्म प्राप्त होता है।
- अनुल्लंघनीय रिकॉर्ड: फॉर्म 17सी में दर्ज वोटों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
- सुरक्षित परिवहन: भंडारण सुरक्षित करने के लिए एजेंट फॉर्म 17सी सहित ईवीएम और वैधानिक कागजात के साथ जाते हैं।
- सत्यापन: उम्मीदवार या उनके एजेंट मतगणना केंद्रों पर फॉर्म 17सी डेटा का सत्यापन करते हैं।
- ईसीआई ने अपने वोटर टर्नआउट ऐप के माध्यम से मतदाता मतदान डेटा की निरंतर उपलब्धता पर प्रकाश डाला।
- पोल पैनल के मुताबिक, प्रत्येक चरण के मतदान के दिन सुबह 9:30 बजे से वोटर टर्नआउट डेटा वोटर टर्नआउट ऐप पर 24X7 उपलब्ध रहता है।
- ऐप मतदान के दिन हर दो घंटे में अनुमानित मतदान डेटा प्रकाशित करता है और मतदान समाप्त होने के बाद लगातार अपडेट करता है। आधी रात तक, यह सर्वोत्तम अनुमानित "मतदान समापन" डेटा प्रदान करता है।
- ईसीआई ने बाताया कि अलग-अलग मीडिया संगठन अलग-अलग समय पर मतदान के आंकड़ों की रिपोर्ट करते हैं, जिससे देरी की धारणा हो सकती है।












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