जम्मू की दोनों सीटों पर लड़ने से क्यों भाग रहा है INDIA bloc, कांग्रेस भी एक से ज्यादा के लिए तैयार नहीं?
विपक्षी दलों का गठबंधन इंडिया ब्लॉक अजीब उलझन में है। बंगाल में टीएमसी कांग्रेस को दो से ज्यादा सीटें देने के लिए तैयार नहीं है तो जम्मू में उसे दोनों ही सीटें मिल भी रही हैं, लेकिन कांग्रेस किसी तरह एक ही सीट पर लड़ने के लिए ही तैयार है।
वहीं इंडिया ब्लॉक में उसकी दोनों ही सहयोगी पार्टियां पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस जम्मू में चुनाव लड़ने से कन्नी काटते नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस कांग्रेस से कह रही हैं कि वह जम्मू की दोनों सीटों पर चुनाव लड़े और कश्मीर घाटी की सीटें उन दोनों के लिए छोड़ दे।

जम्मू की सिर्फ एक ही सीट पर चुनाव लड़ना चाहती है कांग्रेस
लेकिन, जानकारी के मुताबिक कांग्रेस भी जम्मू में सिर्फ एक ही सीट पर उम्मीदवार उतारने के लिए तैयार है। बदले में वह कश्मीर में भी 3 में से एक सीट की मांग कर रही है। वहीं लद्दाख में भी अपना दावा जता रही है।
बीजेपी की अभेद्य किला बनकर उभरी हैं जम्मू की दोनों सीटें
अगर पिछले दो लोकसभा चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो जम्मू की दोनों ही सीटें बीजेपी के लिए अभेद्य किला बनकर उभरी हैं। यही वजह है कि फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस और महबूबा मुफ्ती की पीडीपी दोनों ही यहां से चुनाव लड़ने से हिचकिचा रही हैं।
वहीं कांग्रेस भी जम्मू और उधमपुर में से किसी एक ही सीट पर अपना भाग्य आजमाना चाहती है। इसकी जगह उसे कश्मीर की एक सीट में ज्यादा भरोसा नजर आ रहा है।
जानकारी के मुताबिक कश्मीर की तीनों सीटों पर पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस में सीटों के बंटवारे के लिए कोई बीच का हल निकलने में ज्यादा दिक्कत नहीं है। लेकिन, कांग्रेस के दावे की वजह से ये मामला उलझा हुआ है।
लड़ाई से पहले सरेंडर की वजह?
अब अगर 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के नतीजे देखें तो लड़ाई से पहले सरेंडर वाली स्थिति के पीछे की असली कहानी समझ में आ सकती है।
जम्मू और उधमपुर में भाजपा का बढ़ता गया है दबदबा
2014 में जम्मू क्षेत्र की उधमपुर सीट पर बीजेपी उम्मीदवार डॉक्टर जीतेंद्र सीट 46.76% वोट लेकर जीते थे। वहीं 2019 में जीतेंद्र सिंह का वोट शेयर बढ़कर 61.24% पहुंच गया।
दोनों ही सीटों पर इंडिया ब्लॉक की स्थिति अच्छी नहीं रही
दोनों बार कांग्रेस का नेशनल कांफ्रेंस के साथ तालमेल था और उसका उम्मीदवार 2014 में सिर्फ 40.91% और 2019 में 31.04% वोट जुटा पाया था। वहीं पीडीपी को 2014 में सिर्फ 2.92% वोट मिले थे और 2019 में उसने कोई उम्मीदवार भी नहीं उतारा, फिर भी कांग्रेस का वोट शेयर काफी घट गया।
इसी तरह 2014 में जम्मू सीट पर बीजेपी प्रत्याशी को 49.34% वोट मिले थे, जो कि 2019 में बढ़कर 57.81% हो गया। जबकि, उसी चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी को सिर्फ 28.87% वोट मिल पाए थे।
जबकि,2014 में पीडीपी उम्मीदवार को जम्मू में 13.41% वोट प्राप्त हुए थे। लेकिन, 2019 में कांग्रेस के खिलाफ पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस किसी ने उम्मीदवार नहीं उतारा फिर भी उसका प्रत्याशी सिर्फ 37.4% वोट ही जुटा सका।












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