झारखंड: मतदाताओं की चुप्पी और मुद्दों की कमी ने बढ़ा दी हैं प्रत्याशियों की धड़कनें
झारखंड: मतदाताओं की चुप्पी और मुद्दों की कमी ने बढ़ा दी हैं प्रत्याशियों की धड़कनें
रांची। झारखंड की 14 में से तीन सीटों पर सोमवार को मतदान होगा। पलामू, लोहरदगा और चतरा सीट पर कुल 59 उम्मीदवार मैदान में हैं। पलामू अनुसूचित जाति के लिए, तो लोहरदगा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, जबकि चतरा सामान्य सीट है। पिछले चुनाव में इन तीनों सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। तीनों सीट से निवर्तमान सांसद एक बार फिर किस्मत आजमा रहे हैं। पलामू में झारखंड के पूर्व डीजीपी और भाजपा प्रत्याशी विष्णु दयाल राम को महागठबंधन की ओर से राजद के घुरन राम चुनौती दे रहे हैं, जबकि लोहरदगा में केंद्रीय राज्यमंत्री सुदर्शन भगत के रास्ते में कांग्रेस के सुखदेव भगत रोड़ा बन कर खड़े हैं।

इन तीन में से चतरा एकमात्र ऐसी सीट है, जहां मुकाबला त्रिकोणीय है। यहां भाजपा के सुनील सिंह राजद के सुभाष यादव और कांग्रेस के मनोज यादव के बीच फंसे नजर आ रहे हैं। चतरा में विपक्ष के वोट जहां सुभाष यादव और मनोज यादव के बीच बंटने की पूरी संभावना है, वहीं भाजपा को उसके बागी निर्दलीय प्रत्याशी राजेंद्र साहू नुकसान पहुंचा रहे हैं। भाजपा के सामने इन तीनों सीटों को बचाने की चुनौती है। जहां तक प्रचार का सवाल है, तो सभी दलों के नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। लोहरदगा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभा कर चुके हैं, जबकि पलामू में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को चुनावी सभा की। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी वहां सभा कर चुके हैं। चतरा में भाजपा का कोई केंद्रीय नेता नहीं पहुंचा, लेकिन प्रदेश स्तरीय नेता वहां लगातार चुनाव प्रचार करते रहे। उधर राजद की ओर से तेजस्वी यादव और हम के जीतनराम मांझी ने तीनों क्षेत्रों में सभाएं कीं।
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प्रदेश स्तरीय नेता जनता के सामने
कांग्रेस ने लोहरदगा और चतरा में प्रदेश स्तरीय नेताओं को ही जनता के सामने भेजा। इन तीनों सीटों पर एक समानता शुरुआत से ही देखी गयी और वह यह है कि यहां न तो कोई चुनावी मुद्दा गरम है और न ही जनता के मूड का किसी को भी आभास हुआ है। जनता की खामोशी ने प्रत्याशियों के दिल की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इन तीनों सीटों पर प्रचार के मामले में भाजपा बहुत आगे रही। झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन, झाविमो के बाबूलाल मरांडी सहित गठबंधन में शामिल अन्य नेता भी इन तीनों सीटों पर प्रचार करते रहे, लेकिन कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं का एक बार भी नहीं आना चर्चा का विषय बना हुआ है। झारखंड में यह चुनाव का पहला चरण है, इसलिए स्वाभाविक तौर पर एनडीए और यूपीए दबदबा कायम करने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटे हैं।

लोहरदगा में कांटे की लड़ाई
चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री के लोहरदगा दौरे से सुदर्शन भगत ने थोड़ी राहत जरूर महसूस की, लेकिन सुखदेव भगत ने अंतिम दो दिन में अपनी पूरी ताकत झोंक दी और कहा जा सकता है कि उन्होंने माहौल को झुकने से रोक दिया है। उन्हें झाविमो के महासचिव बंधु तिर्की के अलावा हेमंत सोरेन की पूरी मदद मिल रही है। सुखदेव के सामने एक बड़ा खतरा झामुमो के चमरा लिंडा का था, लेकिन चमरा के मैदान में नहीं उतरने से कांग्रेस के वोट में सेंधमारी की संभावना कम दिख रही है।

चतरा में भितरघात का खतरा
चतरा में भाजपा प्रत्याशी के सामने पार्टी के एक बागी उम्मीदवार राजेंद्र साहू खड़े हैं। राजेंद्र चतरा जिला परिषद के उपाध्यक्ष थे। वह भाजपा से टिकट के लिए प्रयासरत थे। टिकट नहीं मिलने के बाद वह निर्दलीय मैदान में हैं। उन्हें पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। टिकट देने में देरी और पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी से भाजपा की धार यहां थोड़ी कुंद दिख रही है। हार-जीत अलग बात है, लेकिन भाजपा प्रत्याशी को कार्यकर्ताओं की काफी जलालत झेलनी पड़ रही है। हालांकि लंबे समय से संगठन का काम देख रहे भाजपा प्रत्याशी सुनील सिंह कार्यकर्ताओं की नब्ज को अच्छी तरह से पहचानते हैं और एक हद तक उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को अपने पक्ष में करने में सफलता भी पायी है। सुनील सिंह को दूसरा लाभ यूपीए के बिखराव का मिल सकता है। महागठबंधन में कांग्रेस के खाते में यह सीट गयी थी, लेकिन राजद ने भी यहां प्रत्याशी दे दिया। राजद के सुभाष यादव ने चतरा में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करायी है। पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के प्रचार में आने से सुभाष यादव के समर्थक उत्साहित हैं। भाजपा को उम्मीद है कि महागठबंधन के वोट में बंटवारे के कारण उसकी स्थिति आसान होगी।

पलामू में दो राम के बीच टक्कर
पलामू में भाजपा प्रत्याशी वीडी राम और राजद प्रत्याशी घुरन राम के बीच सीधी टक्कर है। एक तरफ भाजपा प्रत्याशी के साथ बूथ स्तर तक संगठन लगा हुआ है और इस क्षेत्र के एक विधानसभा को छोड़ कर सभी पर उसके विधायक भी हैं। भाजपा प्रत्याशी राज्य के पुलिस महानिदेशक रह चुके हैं, इस कारण एक वर्ग का झुकाव उन्हें सहज प्राप्त है। इससे पहले घुरन को संसद तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले पलामू के नेता गिरिनाथ सिंह भी भाजपा के साथ चले गये हैं। इसके साथ ही घुरन को सहयोगी दलों का अपेक्षित सहयोग भी नहीं मिल रहा है। उनके पास राजनीति का लंबा अनुभव तो है, लेकिन राजनीतिक चुनौतियों से पार पाने में उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। हालांकि पलामू में राजद का अपना आधार है। देखना होगा कि यह आधार घुरन के पक्ष में कितना तब्दील होता है। उन्हें कुछ हद तक बसपा प्रत्याशी भी परेशान कर रहा है।

चुनाव के लिए तैयारियां पूरी
इन तीनों सीटों पर चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक तैयारियां पूरी हो गयी हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एल ख्यांगते, अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनय कुमार चौबे और मनीष रंजन इन संसदीय क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। तीनों सीट पर चुनाव के लिए 5624 बैलेट यूनिट और इतनी ही कंट्रोल यूनिट लगायी जायेगी। इनमें 6074 वीवीपैट का इस्तेमाल होगा। चूंकि ये तीनों क्षेत्र नक्सल प्रभावित हैं, इसलिए यहां सुरक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था की गयी है। चुनाव कराने के लिए अर्द्धसैनिक बलों की 252 कंपनियां तैनात की गयी हैं। झारखंड की इन तीन सीटों का चुनाव बाकी 11 सीटों का रुख भी तय करेगा, इसलिए कोई भी पक्ष किसी किस्म का खतरा उठाने के लिए तैयार नहीं है। राज्य में चुनाव का अगला चरण छह मई को होगा, जब रांची, हजारीबाग, खूंटी और कोडरमा में वोट डाले जायेंगे।












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