उन्नाव: साक्षी महाराज और अन्ना महाराज के बीच मुकाबले से दिलचस्प हुआ चुनाव

लखनऊ। उन्नाव, यानी लखनऊ और कानपुर जैसे दो महानगरों के बीच कसमसाता एक शहर। राजनीतिक दृष्टि से भी लखनऊ और कानपुर के दो महत्वपूर्ण लोकसभा क्षेत्रों के बीच पिसता लोकसभा क्षेत्र है उन्नाव। कभी समृद्ध भारतीय संस्कृति और हिन्दी साहित्य के लिए चर्चित रहा उन्नाव अब साक्षी महाराज, अन्ना महाराज और सनसनीखेज अपराध की ख़बरों को लेकर सुर्ख़ियो में रहता है। इसबार चुनावी जंग में यहाँ से दो दबंग चर्चा में हैं। कभी भगवा, कभी हरा कभी नीला, ये बार बार बदलते रहे हैं रंग। इन्हें देख जनता भी है दंग।

साक्षी महाराज बनाम अन्ना महाराज

साक्षी महाराज बनाम अन्ना महाराज

उत्तर प्रदेश की अन्य लोकसभा सीटों की तरह उन्नाव में कभी कांग्रेस का वर्चस्व था। लेकिन 1971 के बाद इस सीट पर कभी जनता पार्टी, कभी कांग्रेस, कभी जनतादल, बहुजन समाज पार्टी और कभी बीजेपी ने जीत हासिल की। 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने एकबार फिर उन्नाव फतह किया लेकिन अगले चुनाव में बीजेपी ने यह सीट कांग्रेस से छीन ली। पिछली बार उन्नाव सीट स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी यानी साक्षी महाराज ने बीजेपी के टिकट पर जीती थी। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी साक्षी महाराज बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। अरुण शंकर शुक्ल उर्फ़ अन्ना महाराज को सपा-बसपा गठबंधन ने यहाँ से प्रत्याशी बनाया है। मजेदार बात है कि चुनाव मैदान के दो बांके अन्ना और साक्षी महाराज कभी बसपा और सपा में थे। अन्ना महाराज सपा और बसपा दोनों में रह चुके हैं जबकि साक्षी महाराज बीजेपी में आने से पहले सपा में थे। अब एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में है। इससे उन्नाव सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है।

साक्षी के तरकश में हैं तीखे शब्दबाण

साक्षी के तरकश में हैं तीखे शब्दबाण

साक्षी महाराज अपनी दबंगई और तीखे शब्दबाण के लिए जाने जाते हैं, विवादों और विवादित बयानों से उनका गहरा रिश्ता है। अटकलें लगाईं जा रहीं थी कि इस चुनाव में उन्नाव लोकसभा सीट से साक्षी महाराज का टिकट कट सकता है। लेकिन बीजेपी प्रत्याशी घोषित होने के पहले ही साक्षी महाराज की एक चिट्ठी वायरल हो गई जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर उनको प्रत्याशी न बनाया गया तो पार्टी उसका खामियाजा भुगतेगी। हालांकि साक्षी महाराज ने इसका खंडन किया और उन्हें उन्नाव से टिकट मिल गया। इसकी बाद साक्षी महाराज ने उन्नाव में बयान दिया कि अगर जनता उन्हें वोट नहीं देगी तो वो अपने हिस्से के पाप यहीं छोड़ जायेंगे। इस पर भी बवाल मचा था। साक्षी महाराज ने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान अपने हलफनामे में बताया था कि उनके ऊपर कम से कम आठ आपराधिक मामले चल रहे हैं। इन आठ मामलों में डकैती, कत्ल, धोखाधड़ी और डरा-धमकाकर वसूली करने जैसे मुकदमे थे। साक्षी महाराज कभी समाजवादी पार्टी मुखिया के चहेते थे। लेकिन 2004 में समाजवादी पार्टी के सांसद के तौर पर राज्यसभा से निकाल दिया गया था क्योंकि उनके खिलाफ सांसद विकास निधि के दुरुपयोग का मामला सामने आया था। साक्षी महाराज पर कुछ और लोगों के साथ मिलकर गैंगरेप जैसे गंभीर आरोप भी लग चुके हैं। इस आरोप के चलते वो कुछ वक्त दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी गुजार चुके हैं। बाद मे सबूतों के अभाव में साक्षी महाराज को इस आरोप से बरी कर दिया गया। फिलहाल साक्षी महाराज पर 4 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

अवध में कभी अन्ना की तूती बोलती थी

अवध में कभी अन्ना की तूती बोलती थी

दूसरी तरफ गठबंधन प्रत्याशी अरुण शंकर शुक्ल उर्फ़ अन्ना की कभी अवध क्षेत्र में तूती बोलती थी। उनकी गिनती बाहुबली और माफिया डॉन के रूप में होती थी। इसबार उन्नाव की रणभूमि पर अन्ना की इंट्री अचानक हुई। राजनीति में कब दोस्त दुश्मन बन जाएँ और दुश्मन दोस्त बन जाएँ, कुछ कहा नहीं जा सकता। यह राजनीति में ही सम्भव है कि 1995 में लखनऊ में हुए गेस्टहाउस कांड में जिस शख्स को बसपा ने अभियुक्त बनाया वही इसबार सपा-बसपा के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहा है। आपराधिक पृष्ठभूमि के अन्ना निरंतर विवादों मे रहे हैं और उन्हें लेकर समाजवादी पार्टी अनेक मौकों पर विपक्षियों की आलोचना का शिकार होती रही है। वैसे मायावती ने भी अन्ना के सभी गुनाह माफ़ करते हए उन्हें दिसंबर 2008 में बसपा में शामिल कर लिया था। अन्ना ने बसपा के चुनाव चिन्ह पर 2009 का चुनाव लड़ा लेकिन कांग्रेस की अनु टंडन से हार गए थे। अन्ना अपने ऊपर लगे आरोपों को ख़ारिज करते आये हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि पुलिस रिकॉर्ड में उनका नाम खासा पुराना है। अन्ना की हिस्ट्रीशीट लखनऊ के हसनगंज थाने में 1982 में खुली। उस वक्त अन्ना के खिलाफ 50 मामले थे। अन्ना के खिलाफ मामलों में हत्या, जान से मारने की कोशिश, अपहरण और फिरौती जैसे संगीन मामले शामिल हैं। अन्ना भी गैंगस्टर एक्ट और रासुका में जेल की हवा खा चुके हैं।

पहले पूजा बाद में अन्ना

पहले पूजा बाद में अन्ना

उन्नाव क्षेत्र में ख़ास वर्ग के मतदाताओं को रिझाने के लिए सपा ने पहले पिछड़ा वर्ग कार्ड खेला और पूजा पाल को टिकट दिया। प्रयागराज से बाहुबली विधायक रहे राजू पाल की हत्या के बाद उनकी पत्नीपूजा पाल ने अपने पति के हत्यारोपी माफिया अतीक अहमद और उनके भाई को दो बार बसपा के टिकट पर धूल चटाई थी। लेकिन पूजा पाल को पिछले साल बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बावजूद, सपा ने अपने कोटे की उन्नाव सीट से उनको प्रत्याशी बनाया था। पूजा पाल को प्रत्याशी बनाए जाने से पार्टी में खेमेबाजी शुरू हो गई। कहा जा रहा कि पूजा पाल को मायावती बसपा से निकाल चुकी थीं और उन्हें गठबंधन का प्रत्याशी बनाये जाने से मायावती खुश नहीं थीं। सपा के कुछ नेताओं को पूजा का पर्चा रद्द होने की भी आशंका थी। इसी लिए ऐन वक्त उनका टिकट काटकर अन्ना महाराज को दिया गया।

चौथे से पहले नंबर पर आ सकेंगी अन्नू!

चौथे से पहले नंबर पर आ सकेंगी अन्नू!

उत्तर प्रदेश की उन्नाव लोकसभा सीट से कांग्रेस ने इस बार फिर अनु टंडन को टिकट दिया है। वही अन्नू टंडन जिन्होंने 2009 के लोकसभा चुनाव में यहाँ से तीन लाख से भी अधिक वोटों के अन्तर से जीत हासिल की थी लेकिन 2014 में चौथे नम्बर पर खिसक गईं थीं। कांग्रेस ने अन्नू टंडन के रूप में तीसरी बार महिला प्रत्याशी पर यकीन दिखाया। कांग्रेस ने 1960 के उप चुनाव के बाद 2009, 2014 और फिर अब अन्नू टंडन पर भरोसा दिखाया है। वैसे 1996 में शीला दीक्षित कांग्रेस (तिवारी) के टिकट पर यहाँ से मैदान में रहीं थीं। कुल मिला कर उन्नाव में मुकबला त्रिकोणीय है।

पढ़ें, उन्नाव लोकसभा सीट का पूरा प्रोफाइल

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