बदला रिटर्न्स : क्या तेजस्वी-पप्पू की लड़ाई में बलि चढ़ेंगी सांसद रंजीत रंजन

पटना। राजद के बागी सांसद पप्पू यादव को सबक सिखाने के लिए तेजस्वी यादव ने अब उनकी पत्नी रंजीत रंजन को निशाने पर ले रखा है। राजद ने कांग्रेस को धमकी दी है कि वह सुपौल से रंजीत रंजन को हटाये वर्ना राजद की भी चुनौती झेलने के लिए तैयार रहे। पप्पू यादव अगर मधेपुरा में राजद के शरद यादव को हराने के लिए खड़ा होंगे तो राजद भी इनकी पत्नी रंजीत रंजन का रास्ता रोकने के लिए सुपौल में प्रत्याशी देगा। सुपौल में राजद विधायक यदुवंश कुमार ने रंजीत रंजन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। राजद की लठैती से सहमे हुए कांग्रेस के नेता दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं। मोदी विरोध का घोसला तिनका-तिनका बिखर रहा है।

रंजीत रंजन का राजनीतिक उदय

रंजीत रंजन का राजनीतिक उदय

रंजीत रंजन सिख समुदाय से आती हैं। उनका जन्म मध्य प्रदेश के रीवा में हुआ था। बाद में उनका परिवार पटना आ गया। बोलचाल में उन्हें रंजीता रंजन कहा जाता है। वे बिहार की मशहूर टेनिस प्लेयर रही हैं। पप्पू यादव ने पहली बार उन्हें टेनिस कोर्ट में ही देखा था। जान पहचान के बाद पप्पू यादव ने उन्हें प्रेम विवाह का प्रस्ताव दिया था। कई मुश्किलों के बाद पप्पू यादव की 1994 में उनसे शादी हुई। पप्पू यादव उस समय राजनीति के उभरते नौजवान थे। दबंग थे। जीत का माद्दा रखते थे। शादी के बाद रंजीत रंजन भी राजनीति में आयीं। शादी के एक साल बाद ही उन्होंने 1995 का बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा। लेकिन हार गयीं। फिर वे पति के चुनाव प्रबंधन का काम देखने लगीं। पप्पू यादव तो राजद में रहे लेकिन रंजीत रंजन को यह दल रास न आया।

2004 में पहली बार बनीं सांसद

2004 में पहली बार बनीं सांसद

रंजीत रंजन 2004 के लोकसभा चुनाव में रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर वह सहरसा से सांसद चुनी गयीं। 2009 में परिसीमन के बाद सहरसा की जगह सुपौल लोकसभा क्षेत्र बन गया। रंजीत रंजन इस बार कांग्रेस के टिकट पर सुपौल से खड़ी हुईं, लेकिन हार गयीं। उस समय पप्पू यादव कानूनी समस्याओं से जूझ रहे थे।

2014 के चुनाव में पति-पत्नी का जलवा
2014 के लोकसभा चुनाव के पहले पप्पू यादव सजा से बरी हो गये थे। चुनाव लड़ने के काबिल हुए तो उन्होंने अपनी हैसियत फिर दिखायी। इस चुनाव में रंजीत रंजन कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थीं। रंजीत रंजन के प्रचार के लिए न तो सोनिया गांधी सुपौल आयीं थीं और नही राहुल गांधी। देश में मोदी लहर बह रही थी। लेकिन विकट परिस्थियों में पप्पू यादव ने चुनाव की कमान अपने हाथ में ली। उन्होंने अपनी पत्नी रंजीत रंजन को सुपौल से तो जिताया ही खुद मधेपुरा में भी जीत का परचम फहराया।

राजद के रवैये से कांग्रेस परेशान

राजद के रवैये से कांग्रेस परेशान

मधेपुरा का झगड़ा सुपौल पहुंचने से कांग्रेस के हाथपांव फूल रहे हैं। यह उसकी विनिंग सीट है और रंजीत रंजन सबसे मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार। लेकिन राजद के झंझट से सब गुड़गोबर होने का डर है। पप्पू यादव को धाराशायी करने के लिए राजद किसी हद तक जा सकता है। तेजस्वी को पप्पू फूटी आंख भी नहीं सुहाते। कांग्रेस ने इस समस्या का हल नहीं निकाला तो उसकी पक्की सीट हाथ से फिसल जाएगी। पिछले चुनाव में कांग्रेस को बिहार में दो सीटें मिलीं थीं, सुपौल और किशनगंज। किशनगंज में उसके विजयी उम्मीदवार मौलाना असरारुल हक अब इस दुनिया में नहीं हैं। वहां नये लड़ाके ने मोर्चा संभाला है। सुपौल में झंझट पसर गया है। तो क्या राजद बिहार में कांग्रेस की जड़ें काटने की सोच रहा है ?

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