बंगाल में उम्मीद से बेहतर खिल सकता है कमल, जानिए बंपर वोटिंग के मायने
नई दिल्ली। 2019 का आमचुनाव ऐसा है जिसमें सत्ता पक्ष को अपनी राजनीतिक पूंजी बचानी है तो विपक्ष को ऐसी राजनीतिक पूंजी अपने लिए विकसित करनी है। इस लिहाज से 18 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 91 लोकसभा सीटों पर हुए मतदान के क्या मायने हैं इस पर सबकी नज़र है। हालांकि चुनाव आयोग ने वोटिंग के ट्रेंड को 2014 जैसा बताया है, लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं।

वोटिंग के रुझान को समझने के लिए यह देखा जाना चाहिए कि अगर किसी प्रदेश में और केंद्र में एक ही पार्टी यानी बीजेपी की सरकार है तो यहां मतदान प्रतिशत का लगभग बना रहना बीजेपी के पक्ष में है। घटने का मतलब है कि मोदी लहर जो पिछली बार देखी गयी थी या दावा किया गया था, वह गायब हुआ है। लिहाजा मतदान घटने का मतलब बीजेपी को नुकसान है। वोट प्रतिशत बढ़ने की स्थिति को बदलाव के रूप में देखते हैं लेकिन यह बदलाव वर्तमान सांसद को बदलने के रूप में भी हो सकता है जैसे त्रिपुरा।

उत्तराखण्ड में बीजेपी को आंशिक नुकसान
उत्तराखण्ड की सभी 5 लोकसभा सीटों के लिए 61.5 फीसदी मतदान हुआ है जो पिछली बार हुए 61.67 फीसदी मतदान के बराबर है। यह ऐसा राज्य है जहां पीएम मोदी के हिसाब से डबल इंजनवाली सरकार है यानी राज्य और केंद्र दोनों जगहों पर बीजेपी की सरकार। उत्तराखण्ड में वोटों के प्रतिशत का स्थिर रहना बताता है कि बीजेपी का प्रदर्शन लगभग वैसा ही रहने वाला है। बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर तो नहीं होगा, कुछ कमतर जरूर सकता है। पार्टी कम से कम एक सीट जरूर खो देगी।
आन्ध्र में टीडीपी से असंतोष दिखा रहे हैं वोटिंग प्रतिशत
आन्ध्र प्रदेश की सभी 25 लोकसभा सीटों की बात करें तो यहां 74 फीसदी मतदान दर्ज किया गया जो 2014 के मुकाबले कम है। तब संयुक्त आंध्र प्रदेश में 76.64 फीसदी मतदान हुआ था। मतदान के लिए उत्साह बढ़ा हो, ऐसा नहीं है। इसकी वजह ये है कि पिछले चुनाव में टीडीपी एनडीए का हिस्सा था, इस बार नहीं है। टीडीपी से नाराज़गी इस उदासीनता की वजह हो सकती है। पूर्वानुमान की मानें तो टीडीपी को नुकसान होता दिख रहा है जबकि वाईएसआर कांग्रेस के आगे बढ़ने की सम्भावना है। यह चुनाव नतीजे नकारात्मक रुझान बताएंगे।

बंगाल में बीजेपी वोटिंग में उछाल बीजेपी के लिए उम्मीद
पश्चिम बंगाल में दो लोकसभा सीटों पर हुए मतदान में वहां का राजनीतिक तापमान दिख रहा है। यहां 83 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले हैं। जबरदस्त ध्रुवीकरण और एक-एक वोट की लड़ाई दिख रही है। त्रिकोणीय संघर्ष भी इसकी वजह है मगर यह बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को बढ़ाता है। बीजेपी का बढ़ता प्रभाव सीट में बदल पाता है या नहीं, यह महत्वपूर्ण बात है।
बिहार में एनडीए के लिए ख़तरे की घंटी हैं उदासीन मतदाता
बिहार में महज 50 फीसदी मतदान चौंकाने वाला है। मगर, मतदान के दिन चैती छठ का त्योहार था और आशंका थी कि मतदान पर इसका असर पड़ेगा। इस बात का ख्याल चुनाव आयोग ने नहीं रखा। फिर भी कम मतदान का मतलब राज्य में जेडीयू और केंद्र में बीजेपी के लिए खुशी की बात नहीं है। इन 4 लोकसभा सीटों में से 3 बीजेपी के पास थी, मगर बीजेपी इस बार सिर्फ एक सीट पर चुनाव लड़ रही है बाकी सीटों पर उसके सहयोगी दल हैं। बिहार में कम वोटिंग का मतलब एनडीए को नुकसान माना जा सता है क्योंकि विगत चुनाव में अधिक वोटिंग के कारण एनडीए का प्रदर्शन बेहतर हुआ था। मान सकते हैं कि 4 सीटों में से 2 सीटें एनडीए हार सकता है।

उत्तर प्रदेश में भी वोटरों की उदासीनता से बीजेपी को होगा घाटा
उत्तर प्रदेश में 8 सीटों पर मतदान हुए। हर सीट पर वोटिंग का प्रतिशत कुछ अलग कहानी बताता है। सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बागपत जैसी सीटों पर 3 से लेकर 9 फीसदी तक कम मतदान हुए हैं। ये सीटें निश्चित रूप से बीजेपी की हार को बताती हैं क्योंकि विगत चुनाव में जीत की वजह ही अत्यधिक मतदान था। वहीं गाज़ियाबाद और गौतमबुद्धनगर जैसी सीटों पर मतदान का कमोबेस पहले जैसा बने रहना बताता है कि पार्टी अपनी सीट बचा सकती है। वहीं बिजनौर में अधिक मतदान हुआ है जिसका मतलब यहां हुआ त्रिकोणात्मक संघर्ष है। यहां कांग्रेस ने मजबूती से चुनाव लड़ा है लेकिन उसके पक्ष में मतलब नहीं निकाला जा सकता।

त्रिपुरा में जबरदस्त वोटिंग बीजेपी के हक में
त्रिपुरा में 81 फीसदी मतदान का मतलब 2014 के मुकाबले बदलाव के लिए मतदान है। यहां से सीपीएम के सांसद हैं। माना जाना चाहिए कि सीपीएम को इस बढ़े हुए मतदान प्रतिशत के कारण झटका लगने वाला है। यानी फायदा बीजेपी को है।
असम में अधिक मतदान यानी कांटे का संघर्ष
असम में जिन 5 सीटों पर मतदान हुए हैं उनमें 4 पर बीजेपी का कब्जा है। यहां वोट प्रतिशत 68 होने का मतलब है कि संघर्ष कांटे का है। बीजेपी को अपनी 4 सीटें बचाने में संघर्ष का सामना करना पड़ेगा। यही बात कांग्रेस की एक सीट के बारे में भी कही जा सकती है। सिक्किम, मिजोरम, नगालैंड में 69, 60 और 79 फीसदी मतदान के मायने भी बदलाव के लिए नज़र आते हैं। हो सकता है कि एनडीए इनमें से एक सीट हासिल करने में कामयाब रहे।












Click it and Unblock the Notifications