दिग्विजय-प्रज्ञा ठाकुर के बीच सियासी जंग ने भोपाल को बनाया हॉट सीट

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट पर सभी की निगाहें है, जहां 12 मई को मतदान होना है। कांग्रेस ने यहां से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार बनाने की घोषणा पहले ही कर दी थी और भाजपा ने काफी सोच विचार के बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से उम्मीदवार बनाया है। दिग्विजय सिंह को अल्पसंख्यक वोटों का काफी भरोसा है। भोपाल में करीब 30 प्रतिशत मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय के हैं और कांग्रेस को आशा है कि उनके वोट कांग्रेस को ही मिलेंगे। भाजपा ने वोटों के ध्रुवीकरण को देखते हुए यहां से साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मैदान में उतारा है। प्रज्ञा सिंह का कहना है कि दिग्विजय सिंह के इशारे पर ही उन्हें हिन्दू आंतंकवादी करार दिया गया था और जेल में यातनाएं दी गईं। इसलिए वे दिग्विजय सिंह को चुनाव में हराने का लक्ष्य बना चुकी हैं। प्रज्ञा सिंह की उम्मीदवारी की घोषणा होते ही लोगों की निगाहें भोपाल संसदीय क्षेत्र पर आ टिकी है।

प्रज्ञा को मिल रहा उमा भारती का साथ

प्रज्ञा को मिल रहा उमा भारती का साथ

भोपाल में एक तरफ जहां कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ फायर ब्रांड साध्वी प्रज्ञा सिंह। 2003 के विधानसभा चुनाव में साध्वी उमा भारती ने भाजपा की कमान संभाली थी और दो तिहाई सीटों पर भाजपा को विजयी दिलवाई थी। अब उमा भारती भी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के समर्थन में खुलकर सामने आ गई हैं और दावा कर रही है कि पहले भी एक साध्वी ने दिग्विजय सिंह को हराया था और अब फिर एक दूसरी साध्वी दिग्विजय सिंह को हराएंगी।

बयानबाजी में जिस तरह दिग्विजय सिंह माहिर हैं, उसी तरह प्रज्ञा सिंह भी बयानबाजी में कम नहीं हैं, लेकिन प्रज्ञा यह भूल गई है कि यह चुनाव की बेला है और चुनाव आयोग हर बयान पर गौर कर रहा है। टिकट मिलते ही प्रज्ञा सिंह ने कह दिया कि एटीएस के चीफ हेमंत करकरे को मुंबई में आतंकवादियों ने गोली मार दी थी, यह उनका ही श्राप था। इसके बाद दूसरा बयान उन्होंने दे दिया कि मैं बावरी मस्जिद ढांचा ढाने पर गौरवान्वित हूं। दूसरे बयान पर साध्वी के खिलाफ एफआईआरदर्ज हो गई और चुनाव आयोग ने उन्हें 72 घंटे के लिए राजनैतिक बयान देने से रोक दिया।

पढ़िए भोपाल सीट का चुनावी इतिहास, दिग्विजय या प्रज्ञा, किसके पक्ष में जाते हैं आंकड़े

जावेद अख्तर, स्वरा भास्कर का दिग्विजय को समर्थन

जावेद अख्तर, स्वरा भास्कर का दिग्विजय को समर्थन

राजनीति का मुख्य अखाड़ा बने भोपाल में पिछले दिनों लेखक जावेद अख्तर आ गए और उन्होंने कहा कि भोपाल उनके बाप-दादा का शहर है, इसलिए वे यहां आते रहते है। उन्होंने एक विवादास्पद बयान दे दिया कि जहां अपराधी और जाहिल लोग रहते हैं, साध्वी को वहां से टिकट देना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी के जाने से देश नहीं रुकेगा और राहुल गांधी ने अभी तक ऐसा कोई काम नहीं किया कि मैं उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मानूं। बुर्के पर प्रतिबंध की बात आई, तो जावेद अख्तर ने कह दिया कि राजस्थान में सरकार घोषणा कर दें कि कोई भी महिला घूंघट नहीं डालेगी। जावेद अख्तर के बाद स्वामी अग्निवेश भी आए और वे भी राजनैतिक माहौल गर्म करके चले गए। अभिनेत्री स्वरा भास्कर भी भोपाल आई औरजेएनयू स्टाइल में राजनैतिक कार्यकर्ताओं से बातचीत करके चली गईं।

मध्यप्रदेश में अभी दो चरणों में चुनाव बाकी है। 12 मई को भोपाल, विदिशा, राजगढ़, सागर, गुना, ग्वालियर और भिंड-मुरैना में मतदान होना है और आखिरी चरण में 19 मई को इंदौर, उज्जैन, देवास, मंदसौर, रतलाम, धार, खरगोन और खंडवा लोकसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। दिग्विजय सिंह अपने क्षेत्र में तो प्रचार करेंगे ही साथ ही उन सीटों पर भी प्रचार के लिए समय निकालेंगे, जहां उनका प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। भाजपा ने हर हाल में दिग्विजय सिंह को हराने केलिए कमर कस ली है और भाजपाध्यक्ष अमित शाह खुद भोपाल में दिग्विजय सिंह को हराने की रणनीति पर अमल करेंगे। प्रज्ञा सिंह को टिकट देने के लिए भी अमित शाह जोर लगा रहे थे, क्योंकि उन्हें लगता है कि प्रज्ञा ही है, जो दिग्विजय सिंह को हरा सकती हैं।

ध्रवीकरण पर दोनों नेताओं की नजर

ध्रवीकरण पर दोनों नेताओं की नजर

दिग्विजय सिंह को मुस्लिमों के वोटों की अपेक्षा तो है ही। वे खुद भी कर्मकांडी व्यक्ति है। नियमित रूप से धार्मिक यात्राएं करते हैं और हाल ही में उन्होंने छह महीने लंबी नर्मदा यात्रा की थी। अब वे इस तरह की कोशिश कर रहे हैं कि भाजपा हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण का लाभ न उठा पाएं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा राज्य मंत्री का दर्जा दिए जाने वाले कम्प्यूटर बाबा इस चुनाव में पाला बदलकर कांग्रेस के साथ चले गए हैं और दिग्विजय सिंह कम्प्यूटर बाबा के साथ अपनी जीत तय कराने के लिए पूजा-पाठ करा रहे हैं। कम्प्यूटर बाबा 500 से अधिक साधुओं के साथ दिग्विजय सिंह की जीत के लिए हठ योग का सहारा ले रहे है। भोपाल संसदीय सीट पर पिछले 16 चुनावों में कांग्रेस 6 बार ही जीत सकी है। यहां 1984 के बाद से भाजपा का कब्जा है। दिग्विजय सिंह को अल्पसंख्यक वोटों के अलावा ठाकुर और कर्मचारी संगठनों के सहयोग से चुनाव जीतने की आशा है। वे अपना चुनाव प्रचार सुनियोजित तरीके से कर रहे है और भोपाल के विकास की बातें भी लेकर सामने आए हैं। अपनी हिन्दू विरोधी छवि को सुधारने के लिए आजकल वे हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकी, मालेगांव बम विस्फोट आदि की चर्चा नहीं कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह के समर्थन में मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार के दो मंत्री पूर्णकालिक रूप से कार्य कर रहे हैं और इस तरह की रणनीति बना रहे है कि भाजपा के गढ़ में कैसे सेंध लगाई जाएं।

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