कांग्रेस का घोषणापत्र: राहुल ने पंजा दिखाया, मुट्ठी छिपाई क्यों?
नई दिल्ली। कांग्रेस के घोषणापत्र में वो क्या है जो कांग्रेस छिपा रही है? प्रश्न चौंकाता है क्योंकि जब घोषणापत्र में है तो छिपाने जैसा क्या हो सकता है! मगर, यह प्रश्न इसलिए है क्योंकि इस घोषणापत्र में जो वास्तव में दिखाने लायक बातें थीं उसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पांच उन प्रमुख घोषणाओं में शामिल नहीं किया, जिसे उन्होंने कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पंजा से जोड़ा। उन्होंने पांच घोषणाओं का 'पंजा’ तो दिखाया, लेकिन पांच अन्य घोषणाओं की मुट्ठी छिपा ली! सबसे पहले बात पंजे की उन पांच घोषणाओं की, जिन्हें राहुल गांधी ने बताया। गरीबी पर वार 72 हज़ार यानी न्याय योजना, बेरोज़गारी पर हमला यानी 31 मार्च 2020 तक 22 लाख नौकरियों के पद भरना, किसानों की दुर्दशा दूर करने का वादा यानी अलग से किसान बजट, अशिक्षा का मुकाबला यानी शिक्षा पर जीडीपी का 6 फीसदी खर्च और हेल्थ सेक्टर पर ध्यान यानी वर्तमान सरकार की उस नीति को बदलना, जिसमें बड़ी बीमा कम्पनियों का फायदा पहुंचाया जा रहा है और उसकी जगह सार्वजनिक कंपनियों को हेल्थ केयर से जोड़ना।

प्रोन्नति में आरक्षण के लिए संविधान संशोधन का वादा
प्रोन्नति में आरक्षण के लिए संविधान संशोधन का वादा कांग्रेस के घोषणापत्र में है। एससी-एसटी और ओबीसी के बैकलॉग पदों को भरने की भी घोषणा इसके साथ ही की गयी है। क्या यह घोषणा टॉप 5 में जगह बनाने लायक नहीं थी? नहीं थी, तो क्यों? क्या हैं इसके निहितार्थ? क्या कांग्रेस को इस घोषणा का चुनावी लाभ नहीं चाहिए? आम तौर पर आरक्षण जैसे मुद्दों पर पार्टियां बढ़-चढ़कर दावे करती रही हैं। मगर, 2019 के आम चुनाव में इस मुद्दे को छेड़ना मधुमक्खी के छत्ते को छेड़ना भी हो सकता है। पहले से ही बन और बिगड़ चुके समीकरण के बीच आरक्षण के इस मुद्दे से कांग्रेस को फायदा कितना होता, इसका अंदाजा तो पार्टी को नहीं है मगर इस मुद्दे से कहीं आरक्षण विरोधी न भड़क जाएं, ये चिन्ता कांग्रेस के लिए बड़ी चिन्ता हो सकती है। शायद इसलिए पार्टी प्रोन्नति में आरक्षण के लिए संविधान संशोधन की बात का ढोल पीटना नहीं चाह रही हो। पार्टी को एससी-एसटी एक्ट में संशोधन और फिर उसे वापस लेने के बावजूद मध्यप्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में हुए बीजेपी को नुकसान की भी याद जरूर होगी।

धारा 370 को बनाए रखने का वादा
जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को बनाए रखने की घोषणा भी पूरे दम के साथ नहीं की गयी। यह उन मुद्दों में से एक है जिस पर बीजेपी मुसलमानों से बैर मोल लेकर भी चुनाव में जाने का दम-खम दिखा रही है। कश्मीर की सियासत में जम्मू में भावना उछाल रही है बीजेपी, ध्रुवीकरण की राजनीति में जुटी दिख रही है बीजेपी। अगर कांग्रेस धारा 370 को बनाए रखने का वादा बढ-चढ़कर करती है तो उसे ध्रुवीकरण के कारण होने वाले नुकसान के लिए भी तैयार रहना होगा। यही वजह है कि कांग्रेस इस मुद्दे को भी टॉप 5 के मुद्दों में शामिल नहीं करने से बची और इसे बंद की हुई मुट्ठी के पांच मुद्दों का एक मुद्दा बना दिया।

मनरेगा में अब डेढ़ सौ दिन मिलेंगे रोज़गार
आश्चर्य इस बात का भी है कि मनरेगा 2.0 जिसमें सौ दिन के रोज़गार का लक्ष्य पूरा होने पर डेढ़ सौ दिन रोज़गार का वादा किया गया है। इसे भी जोर-शोर से उछाला नहीं गया, जबकि कांग्रेस चाहती तो एक पंजे के टॉप 5 मुद्दों के बजाए 2 पंजे के दो टॉप 5 यानी 10 मुद्दों को उभार सकती थी। उससे मनरेगा का महत्वपूर्ण मुद्दा भी राहुल गांधी के शीर्ष घोषणाओं में शुमार हो सकता था जिसकी जननी कांग्रेस है और जिसकी मुखालिफत बीजेपी करती रही है और आखिरकार मनरेगा की अहमियत को उसने भी माना।

जीएसटी 2.0 से दूर होंगी मुश्किलें
जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताते रहे हैं राहुल गांधी। घोषणापत्र में जीएसटी 2.0 वर्जन लाने की भी बात कही गयी है। इसमें जीएसटी की दर एकसमान बनाने से लेकर निर्यात की वस्तुओं और दिव्यांगों के लिए शून्य जीएसटी का वादा किया गया है। यह भरोसा भी देश के कारोबारी वर्ग को लुभाने के लिए बड़ा है। टॉप फाइव में अगर इसकी जगह नहीं बन रही थी तो डबल डॉप 5 में तो इसके लिए ज़रूर जगह बन जाती।

महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण का वादा
महिलाओँ को 33 फीसदी आरक्षण भी इतना बड़ा मुद्दा है जिसका एलान प्रमुखता के साथ होना चाहिए था। मगर, यह भी घोषणापत्र के दौरान राहुल गांधी के भाषण का हिस्सा नहीं बन पाया। महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण के साथ कांग्रेस चुनावी फिजां बदल सकती है। यह ऐसा मुद्दा है जिस पर सभी पार्टियों का दिखावे का रुख देश ने देखा है। मनमोहन सरकार इस बाबत विधेयक लेकर भी आयी थी, लेकिन पारित नहीं करा पायी। कहीं ऐसा तो नहीं कि कांग्रेस अब भी महिलाओं के लिए आरक्षण पर दिल से तैयार नहीं? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कांग्रेस घोषणा पत्र के दस प्रमुख मुद्दों में कोई मुद्दा ऐसा नहीं है जिनमें से पांच को उठाकर पंजा नहीं कहा सकता या फिर डबल पंजा नहीं बनाया जा सकता। वास्तव में दो पंजे ही हर इंसान के पास होते हैं और कांग्रेस ने अपने चुनाव अभियान के लिए चुनावी मुद्दों के रूप में इन दो पंजों दो मुट्ठी में बदलने की तैयारी भी कर ली थी। फिर भी कांग्रेस ने केवल एक हाथ का पंजा ही क्यों दिखा और दूसरे हाथ की मुट्ठी क्यों छिपा गयी- यह बड़ा सवाल है। दोनों हाथों की बॉक्सिंग स्टाइल मुट्ठी अगर कांग्रेस दिखाती, तो क्या उससे विरोधियों में ख़ौफ नहीं होता? क्या कांग्रेस के लिए बेहतर चुनावी सम्भवनाएं तैयार नहीं होतीं? आखिर में एक साथ उन दस मुद्दों को रखते हैं आप पाठकों के लिए- न्याय, नौकरी, किसान बजट, शिक्षा, स्वास्थ्य, जम्मू-कश्मीर में धारा 370, प्रमोशन में आरक्षण, मनरेगा, जीएसटी, महिला आरक्षण। आप खुद तय करें कि इनमें से पांच मुद्दे ही राहुल ने क्यों चुने?












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