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Lok Sabha Election Result: काउंटिंग शुरू होने से पहले ही जीत गई भाजपा! बिना मतगणना कैसे हुआ ये कमाल?

Lok Sabha Election Surat Seat: लोकसभा चुनाव के फैसले की घड़ी अब आ गई है। सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती शुरू होने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पहले ही 1 सीट मिल चुकी है। सूरत निर्वाचन क्षेत्र में निर्विरोध जीत के कारण यह असामान्य स्थिति उत्पन्न हुई है।

सूरत निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव मैदान में केवल भाजपा के एक उम्मीदवार मुकेशकुमार चंद्रकांत दलाल थे। दरअसल, शुरुआत में कांग्रेस पार्टी के कैंडिडेट सहित कई उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। लेकिन कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी नीलेश कुंभानी का नामांकन खारिज कर दिया गया।
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BJP won 1 seat before counting

इसके बाद अन्य उम्मीदवाररों ने चुनाव की रेस से पीछे हटने का फैसला कर लिया और अपना नामांकन वापस ले लिए। इसके बाद मुकेश दलाल एकमात्र प्रतियोगी रह गए और उन्हें निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया।

हालांकि, भाजपा प्रत्यासी के निर्विरोध जीत के बाद विवाद शुरू हो गया। कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी ने अन्य उम्मीदवारों पर अपना नामांकन वापस लेने के लिए दबाव डाला है। कांग्रेस ने कहा कि भजपा ने "गलत और अनुचित प्रभाव" का इस्तेमाल कर के कैंडिडेट्स को नामांकन वापस लेने पर मजबूर किया।

उन्होंने यह भी कहा कि मतदान नहीं कराने से मतदाताओं को चुनने के अधिकार से वंचित कर दिया गया, जिसमें "उपरोक्त में से कोई नहीं" (NOTA) के लिए मतदान करने का विकल्प भी शामिल है।
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क्या है चुनाव आयोग का रुख?

विपक्ष के आरोपों के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने चुनाव आयोग की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि आयोग केवल तभी हस्तक्षेप कर सकता है जब उम्मीदवारों पर नाम वापस लेने के लिए दबाव डालने का सबूत हो। हालांकि, यदि निकासी स्वैच्छिक थी, तो आयोग के पास कार्रवाई करने का कोई आधार नहीं था।

राजीव कुमार ने कहा, "यदि उम्मीदवार नामांकन वापस लेने का निर्णय लेते हैं, तो हम क्या कर सकते हैं?" उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि किसी को जबरदस्ती उम्मीदवारी से हटाया न जाए, लेकिन वह स्वैच्छिक नाम वापसी को नहीं रोक सकता।

NOTA पर बहस

सोमवार को चुनाव आयोग की प्रेस वार्ता में सवाल उठाए गए कि क्या किसी उम्मीदवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित करना 2013 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है, जिसमें नोटा विकल्प पेश किया गया था।

राजीव कुमार ने इस चिंता को स्वीकार किया लेकिन व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, "हालांकि हर सीट पर मुकाबला होना आदर्श है, लेकिन निर्विरोध चुनाव को रोकने के लिए नियम लागू करना अव्यावहारिक होगा। इसके बजाय, ध्यान यह सुनिश्चित करने पर होना चाहिए कि किसी भी उम्मीदवार को नाम वापस लेने के लिए मजबूर न किया जाए।"

2024 के लोकसभा चुनाव सात चरणों में आयोजित किए गए, 1 जून, 2024 को संपन्न हुए, जब एग्जिट पोल जारी किए गए। आज, 4 जून को वोटों की गिनती से अंतिम नतीजे तय होंगे।
यह भी देखें: चुनाव आयोग ने स्वीकार की पोस्टल बैलेट की गिनती पहले करने की मांग, नियमों में बदलाव, जानें कैसे होगी काउंटिंग?

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