Lok Sabha Election: ममता का 'बिहारियों-बाहरियों' के सामने सरेंडर! TMC की लिस्ट पर किसका दबदबा?

West Bengal Lok Sabha Election News: अगर इस बार तृणमूल कांग्रेस के 42 उम्मीदवारों की लिस्ट देखें तो उसमें बिहारी नेताओं को भी जगह मिली है और बंगाल के बाहर के लोगों पर भी दांव खेला गया है। यही नहीं, भाजपा से दल-बदल करके आए 7 नेताओं को भी ममता ने अपनी पार्टी का टिकट थमा दिया है।

2021 में बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर यूपी-बिहार से गुंडे लाने का आरोप भी लगा दिया था।

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ममता ने कहा था 'यूपी-बिहार से गुंडे लाए'
उन्होंने कहा था, 'मुझ पर जो 'हमला' हुआ वह नंदीग्राम के किसी आदमी ने नहीं किया, बल्कि आप तो यूपी, बिहार से आए गुंडे लेकर आए। यदि वो (भाजपा कार्यकर्ता) आते हैं, तो महिलाओं को बर्तनों से उन्हें पीट देना चाहिए।'

'बंगाल गुजरात नहीं है'
2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को निशाने पर ले रखा था। तब शाह बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत की रणनीति बनाने में जुटे थे। तब टीएमसी चीफ ने भाजपा नेताओं पर हमला करते हुए कहा था कि वो जान लें कि 'बंगाल गुजरात नहीं है'।

एंटी-इंकंबेंसी से बचने के लिए आधे से ज्यादा उम्मीदवार बदले
अगर रविवार को जारी टीएमसी उम्मीदवारों की लिस्ट देखें तो 42 में से आधे से ज्यादा प्रत्याशी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। मतलब, साफ है कि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने मौजूदा सांसदों के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी से निपटने के लिए उनको नए चेहरे से बदल देने में ही भलाई समझी है।

टीएमसी के अंदर के लोगों के इशारों को समझें तो सभी नाम पर अंतिम मुहर तो पार्टी सुप्रीमो ने ही लगाई है, लेकिन बहुत सारे लोगों को टिकट इसलिए दिया गया है, क्योंकि वे उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के करीबी हैं।

पूर्व 'भाजपाइयों' पर भी ममता मेहरबान
अगर टीएमसी की 42 प्रत्याशियों की लिस्ट को देखें तो इनमें 7 या 17% पूर्व भाजपाई हैं। मसलन, शत्रुघ्न सिन्हा दो-दो बार भाजपा के टिकट पर पटना साहिब का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्हें पार्टी ने फिर से आसनसोल सीट दी है।

इसी तरह से कीर्ति आजाद दरभंगा के पूर्व भाजपा सांसद हैं। उन्हें बर्दवान-दुर्गापुर से टीएमसी ने उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह पार्टी ने रायगंज की भाजपा एमएलए कृष्णा कल्याणी को रायगंज से लोकसभा में उतारा है।

राणाघाट दक्षिण से बीजेपी विधायक मुकुट मणि अधिकारी को भी राणाघाट से ही उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने बिष्णुपुर में भाजपा सांसद सौमित्र खान की सीट पर उनकी पूर्व पत्नी सुजाता मंडल को उतारा है तो बनगांव उत्तर के पूर्व एमएलए बिस्वजीत दास बनगांव लोकसभा सीट पर टीएमसी से लड़ेंगे।

इसी तरह से मंत्री और हरिरामपुर के मौजूदा विधायक और पूर्व भाजपा नेता बिप्लव मित्रा बालुरघाट से बीजेपी के प्रदेश सुकांत मजूमदार की सीट पर ताल ठोकेंगे।

टीएमसी ने बिहारियों को भी दिया टिकट
शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद दोनों ही बिहार के रहने वाले हैं। सिन्हा बिहार में सांसद बनने से पहले लंबे समय तक भाजपा की राजनीति कर चुके हैं।

वहीं पूर्व क्रिकेटर आजाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे हैं। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली से मतभेदों की वजह से बीजेपी से बाहर हुए थे और 2019 में कांग्रेस के टिकट पर झारखंड की धनबाद सीट पर चुनाव हारते हुए बंगाल में तृणमूल तक पहुंचे हैं।

इस बार गुजराती पर भी लगाना पड़ा दांव
इसी तरह से ममता बनर्जी की पार्टी ने पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान को मुस्लिम बहुल बहरामपुर सीट से उम्मीदवार बनाया है, जो गुजराती हैं। वे वडोदरा के रहने वाले हैं, जहां से 2014 पीएम मोदी भी लोकसभा का चुनाव रिकॉर्ड मतों से जीत चुके हैं।

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