केरल में BJP से इतना क्यों डर गया I.N.D.I.A.? लोकसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस-लेफ्ट आपस में भिड़ने लगे
Kerala Lok Sabha Election 2024: केरल में बीजेपी को लेकर इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के बीच आपस में ही ठनी हुई है। अबतक तो केरल की राजनीति में बीजेपी कोई खास छाप नहीं छोड़ पा रही थी। लेकिन, बीजेपी-आरएसएस को लेकर जिस तरह से कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों में ठनी हुई है, उससे लगता है कि अब ये दल भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित हो गए हैं।
मसलन, सीपीआई ने पार्टी उम्मीदवार एनी राजा के खिलाफ वायनाड से राहुल गांधी को उतारने पर कांग्रेस पार्टी की बुद्धि पर ही सवाल उठा दिया है। पार्टी नेता बिनॉय विस्वम ने तंज किया है कि जिन्होंने राहुल को वायनाड भेजा है, ऐसा लगता है कि वे अपनी नाक से आगे देख ही नहीं पाते।

केरल में भिड़ गए कांग्रेस-लेफ्ट
ठीक इससे अलग तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और पार्टी के प्रत्याशी शशि थरूर का दावा है कि वामपंथी पार्टी उनके चुनाव क्षेत्र में बीजेपी के लिए काम कर रही है।
थरूर ने खोला सीपीआई के खिलाफ मोर्चा
थरूर ने एक्स पोस्ट पर लिखा है, 'ये विडंबना है कि वही सीपीआई जो वायनाड में राहुल गांधी की उम्मीदवारी को लेकर शिकायत करती है, तिरुवनंतपुरम में बीजेपी का खेल खेल रही है। तिरुवनंतपुरम में मेरे खिलाफ सीपीआई के प्रचार का एकमात्र कार्य बीजेपी-विरोधी वोटों को विभाजित करना है; और वे वायनाड में गठबंधन धर्म की दुहाई देते हैं!'
दरअसल, तिरुवनंतपुरम में बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है। वहीं एलडीएफ की ओर से सीपीआई के पन्नियन रवींद्रण उम्मीदवार बनाए गए हैं। इस वजह से माना जा रहा है कि 2009 से लगातार इस सीट से जीत रहे थरूर का चुनाव इस बार कठिन हो गया है।
कांग्रेस का मुख्य दुश्मन कौन है- सीपीआई
पहले सीपीआई नेता बिनॉय विस्वम ने वायनाड से राहुल की उम्मीदवारी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि 'हम कांग्रेस से पूछना चाहते हैं कि उनका मुख्य दुश्मन कौन है, आरएसएस/बीजेपी है या वामपंथी पार्टियां?'
कांग्रेस से निकलकर नेता बीजेपी में क्यों जा रहे हैं- डी राजा
लेकिन, थरूर के बयान के बाद एनी राजा के पति और सीपीआई महासचिव डी राजा ने खुद इंडिया ब्लॉक में अपनी सहयोगी कांग्रेस पर पलटवार किया है।
उन्होंने कहा, 'ये एक बेतुका बयान है। शशि थरूर जैसे शिक्षित व्यक्ति को केरल के इतिहास को सही से समझना चाहिए। लेफ्ट ही सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों के साथ लड़ रहा है....कितने सारे नेता कांग्रेस छोड़ रहे हैं और बीजेपी में शामिल हो रहे हैं....'
वायनाड में लेफ्ट से लड़कर क्या संदेश देना चाहती है कांग्रेस-सीपीआई
यही नहीं उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी दावा करते हैं कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई को वे आगे बढ़ा रहे हैं। फिर वे वायनाड से लड़कर एलडीएफ के खिलाफ क्यों लड़ रहे हैं? कांग्रेस को निश्चित रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि वे क्या संदेश चाहती है। उनका मुख्य राजनीतिक दुश्मन कौन है...'
केरल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का दिख रहा है असर
दरअसल, केरल में वर्षों से कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ और सीपीएम की अगुवाई वाले एलडीएफ के बीच राजनीतिक लड़ाई रही है। पहली बार बीजेपी केरल की राजनीति में स्थापित हो चुके इन दोनों गठबंधनों को चुनौती दे रही है। कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति पैदा हुई है, जो कि यहां की सियासत के लिए बहुत बड़ा बदलाव है।
बीजेपी ने दो-दो केंद्रीय मंत्रियों को दिया है टिकट
बीजेपी ने चंद्रशेखर के अलावा एक और केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन को अट्टिंगल से मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस के कई प्रभावशाली नेता बीजेपी ज्वाइन कर चुके हैं। इनमें पूर्व सीएम के करुनाकरण की बेटी पद्मजा वेणुगोपाल से लेकर पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी तक शामिल हैं।
भाजपा ने केरल में भी किया है एनडीए का विस्तार
लोकसभा चुनाव से पहले कई सारे क्षेत्रीय दलों के नेता या तो भाजपा में आ गए हैं या उन्होंने अपनी पार्टियों को इसमें विलय कर लिया है, जिसमें केरल जनपक्षम के पीसी जॉर्ज जैसे नेता भी शामिल हैं। लेकिन, दूसरी तरफ इंडिया ब्लॉक में होते हुए भी यहां एलडीएफ और यूडीएफ में जबरदस्त टकराव की स्थिति है।
बीजेपी के लिए तैयार हो रही है नई जगह
भाजपा का प्रभाव युवाओं में भी बढ़ रहा है और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) जैसे संगठनों पर पाबंदी ने मतदाताओं के एक वर्ग में इसके लिए नई जगह तैयार कर दी है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में विकास की अनेकों परियोजनाएं भी दी हैं तो भाजपा ने ईसाइयों को अपने साथ जोड़ने के लिए भी लंबा अभियान चलाया है। शायद ये सारे कारण हैं, जो कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों में एक-दूसरे के खिलाफ इतनी कड़वाहट पैदा कर दी है।












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