Lok Sabha Election 2024: वायनाड में मुसलमानों के बीच काफी लोकप्रिय हैं राहुल गांधी, फिर भी जीत इतनी आसान नहीं
Kerala Lok Sabha Election 2024 Wayanad: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पिछली बार केरल ने ही लोकसभा में पहुंचने का मौका दिया था। यूपी में अमेठी के मतदाताओं ने उन्हें भले ही रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन वायनाड ने उन्हें भारी मतों से जिताकर दिल्ली भेज दिया। लेकिन, इस बार राहुल का वायनाड वाला रास्ता उतना भी आसान नहीं रहने वाला।
53 वर्षीय राहुल गांधी अबकी बार भी केरल की वायनाड सीट से चुनाव मैदान में हैं। पिछले हफ्ते जब वह चुनाव प्रचार के लिए पहुंचे थे तो छोटे-छोटे भाषणों के बीच स्थानीय लोगों से संपर्क की भी कोशिश कर रहे थे। जो भी सामने मिल जाता था, उसे कांग्रेस मेनिफेस्टो के वादों के बारे में बताते थे।

वायनाड में मुस्लिम वोटरों में लोकप्रिय राहुल
वायनाड में राहुल की उम्मीदवारी का बड़ा पक्ष ये है कि वह स्थानीय मुसलमानों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। सुल्तान बाथरी के कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष उमर औंदात्तिल ने ईटी को बताया,'वह कई सारे गरीबों के घर गए और उनको सपोर्ट किया। वे अपने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति बहुत ही प्रतिबद्ध हैं।' लेकिन, इस बार उनके सामने चार चुनौतियां हैं-
पीएम चेहरा नहीं
वायनाड में कांग्रेस 2009 से लगातार जीत रही है। लेकिन, 2019 में राहुल गांधी करीब 4.4 लाख वोटों से जीते थे और उन्हें 65% वोट मिले थे, जो कभी नहीं हुआ। लेकिन, इस बार राहुल गांधी उतनी ही आसान जीत दर्ज कर सकेंगे, इसको लेकर वायनाड के वोटरों को भी आशंका है।
दरअसल, 2019 में राहुल गांधी कांग्रेस की अगुवाई कर रहे थे और तब केरल में पार्टी ने उन्हें पीएम के चेहरे के तौर पर पेश किया था। इस बार वह स्थिति बिल्कुल ही नहीं है। कलपेट्टा के एक निवासी ने भी कहा है कि इस बार राहुल उतनी बड़ी जीत दर्ज कर सकेंगे, इसको लेकर काफी संदेह है।
लेफ्ट से कड़वाहट
केरल में कांग्रेस और लेफ्ट के बीच जो एक 'गुप्त' भरोसे का गठबंधन था, वह इस बार टूटता नजर आ रहा है। जबकि,इस बार दोनों ही इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं। 2019 में राहुल लेफ्ट की आलोचना से परहेज कर रहे थे। लेकिन, इस बार सीएम पिनराई विजयन के घर ईडी के नहीं पहुंचने को लेकर संदेह पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल के इस रवैए से सत्ताधारी दल बेहद नाराज है। राज्य के उद्योग मंत्री पी राजीव का कहना है, 'जब भी राहुल केरल में होते हैं, वह लोकल लीडर की तरह हमारे सीएम पर हमला करना शुरू कर देते हैं।' 'उनका यह पूछना बहुत ही गलत है कि ईडी हमारे सीएम के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है।'
इसी कड़वाहट का असर है कि लेफ्ट के नेता उनकी 'भारत जोड़ो यात्रा' में शामिल होने के लिए श्रीनगर भी गए थे, लेकिन मुंबई में उससे मुंह फेर लिया।
लेफ्ट की बड़ी नेता से मुकाबला
सीपीआई ने इस बार अपनी राष्ट्रीय स्तर की नेता 60 वर्षीय एनी राजा को वायनाड से एलडीएफ का उम्मीदवार बनाया है। एनी पार्टी महासचिव डी राजा की पत्नी हैं और वामपंथी विचारधारा की दशकों की राजनीति करके यहां तक पहुंची हैं। वह राहुल से उम्र और अनुभव दोनों में बड़ी हैं।
राहुल रोडशो के दौरान वामपंथी कार्यकर्ताओं से यह कहते हुए पाए गए हैं, 'आपकी विचारधारा अच्छी है, लेकिन हमारी बेहतर है।' लेफ्ट से सहानुभूति रखने वाले लोगों को लगता है कि राहुल को इस बार केरल से चुनाव नहीं लड़ना चाहिए था।
मलयालम की ट्रेनिंग नहीं ली
राहुल के बारे में यह भी बातें हो रही हैं कि वह पांच साल से केरल से सांसद हैं और अभी भी मलयालम नहीं बोल पाते। मसलन, सुल्तान बाथरी के ही एक कृषक एनपी जयन ने कहा, 'स्थानीय लोगों का राहुल तक पहुंच कठिन है। केरल में वायनाड ही ऐसा लोकसभा क्षेत्र है, जहां महिलाएं अभी भी पिछड़ी हैं और अब तो वो अपने सांसद से मलयालम में भी बात नहीं कर सकतीं।'
मुस्लिम लीग के समर्थन से अभी भी सब पर भारी
लेकिन, चुनौतियों के बीच राहुल के लिए वायनाड में अच्छा संकेत ये है कि यहां की सात विधानसभा सीटों में से तीन मुस्लिम-बहुल मलप्पुरम जिले में पड़ती हैं। कांग्रेस और मुस्लिम लीग (IUML) हमेशा से भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं, जो मलप्पुरम में बहुत ही प्रभावशाली है।
राहुल गांधी को पिछली बार भी वंडूर, नीलांबुर और एर्नाड विधानसभा क्षेत्रों में जबर्दस्त समर्थन मिला था और इस बार भी उनको लगता है कि यहां से उन्हें बढ़त मिलना तय है।
वायनाड में भाजपा की स्थिति
जहां तक भाजपा उम्मीदवार और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन की बात है तो उनके जीतने की संभावना बहुत ही कम है, लेकिन जिस तरह से उनका सधा हुआ प्रचार चल रहा है, भाजपा का वोट शेयर बढ़ने की उम्मीद जरूर है।












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