Lok Sabha Election: बंगाल में कश्मीर से भी ज्यादा फोर्स की तैनाती! मणिपुर से डायवर्ट करने की क्यों पड़ी जरूरत?
Lok Sabha Election 2024 West Bengal: बंगाल में लोकसभा चुनाव करवाने के लिए इस बार चुनाव आयोग को बहुत ज्यादा तादाद में सुरक्षा बलों की जरूरत पड़ रही है। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस बार कम से कम 10,000 जवानों की तैनाती की जाएगी।
न्यूज18 डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को जारी एक आदेश के मुताबिक 15 अप्रैल तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस फोर्स (CAPF) की 100 कंपनियां पश्चिम बंगाल पहुंच रही हैं। गौरतलब है कि बंगाल में एनआईए तक के अधिकारियों पर ड्यूटी के दौरान छेड़छाड़ के आरोप लगाए गए हैं।

बंगाल में कश्मीर से भी ज्यादा फोर्स की तैनाती!
रिपोर्ट के अनुसार मणिपुर जैसे तनावग्रस्त राज्यों में तैनात कंपनियों को भी बंगाल की ओर डायवर्ट करने को कहा गया है। इसके अलावा झारखंड से भी जवानों को बंगाल भेजने के लिए कहा गया है। इस बार चुनाव आयोग ने बंगाल में लोकसभा चुनाव करवाने के लिए 900 से ज्यादा कंपनियां (90,000 जवान) तैनात किए जाने की मांग की है।
मणिपुर से भी फोर्स को बंगाल किया जा रहा डायवर्ट
900 से ज्यादा कंपनियों की तैनाती का मतलब है कि जम्मू और कश्मीर की आवश्यकताओं से भी ज्यादा सुरक्षा बलों की तैनाती। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस फोर्स की अतिरिक्त 100 कंपनियों की तैनाती की जा रही है, जिसमें सीआरपीएफ की 55 कंपनियां भी शामिल हैं। इनमें से सीआरपीएफ की 25 कंपनियों को मणिपुर से डायवर्ट होना है, जो चुनाव शुरू होने से पहले पहुंच जाएंगे।
मणिपुर से दो दर्जन से ज्यादा सुरक्षा बलों की कंपनियां पहले ही पश्चिम बंगाल भेजी जा चुकी हैं। इनके अलावा बंगाल में रैपिड ऐक्शन फोर्स (RAF) की भी तैनाती की जाएगी। कंपनी कमांडरों को चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के मुताबिक राज्य के अधिकारियों के साथ बातचीत के आधार पर इनकी तैनाती का निर्देश दिया गया है।
सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि बंगाल में ज्यादा जवानों के पहुंचने से उनके ठहरने के प्रबंध की भी समस्या पैदा हो रही है और इसके लिए स्थानीय प्रशासन जरूरी सहायता उपलब्ध करवाने में जुटा है।
सीआरपीएफ के जवानों की छुट्टियों पर भी सख्ती
रिपोर्ट में बताया गया है कि लोकसभा चुनावों में तैनाती के लिए मांग के मुताबिक जवानों की तैनाती करने में सीआरपीएफ को दिक्कत आ रही है। यह दुनिया की सबसे बड़ी अर्धसैनिक बल है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि डिमांड पूरी करने के लिए सीआरपीएफ ने ट्रेनिंग सेशन भी निलंबित कर दिए हैं और छुट्टियों को लेकर भी कहा है कि बहुत ही ज्यादा आवश्यकता पड़ने पर इसकी मंजूरी दी जाए।
केंद्रीय एजेंसियों से भिड़ रही है टीएमसी
बंगाल में ऐसे समय में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की आवश्यकता बढ़ी है, जब सत्ताधारी टीएमसी ने एनआईए समेत तमाम केंद्रीय जांच एजेंसियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और दिल्ली में चुनाव आयोग तक के सामने धरना-प्रदर्शन कर चुकी है।
इसी दौरान बंगाल पुलिस ने एनआईए अधिकारियों पर एक आरोपी (टीएमसी कार्यकर्ता मनब्रत जना) के परिवार वालों की शिकायत के आधार पर छेड़छाड़ के आरोपों में एफआईआर भी दर्ज किए हैं। दूसरी तरफ बंगाल पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ एनआईए ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।












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