Lok Sabha Election 2024: क्या है लाभार्थियों को जीत की गारंटी बनाने की तैयारी? एक्शन में मोदी सरकार
2024 के लोकसभा चुनावों से कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने अपनी महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी सेवाओं तक आम जनता की पहुंच को और सुलभ बनाने की कोशिशों के तहत सरकारी मशीनरी को नए सिरे से कसना शुरू कर दिया है।
27 से 28 दिसंबर तक राजधानी दिल्ली में राज्यों के मुख्य सचिवों का तीसरा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया है, जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले हैं।

योजनाओं के लाभार्थियों के प्रति समर्पित है सरकार
केंद्र सरकार की यह पहल कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को जागरूक बनाने के लिए चल रहे एक और कार्यक्रम 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के बीच में ही की गई है। 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर केंद्र में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है। केंद्रीय योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक पहुंचना सुनिश्चित करना।
सरकार की कोशिश उन्हें केंद्रीय योजनाओं के प्रति जागरूक बनाना और उन तक ये सुविधाएं सुलभता के साथ पहुंच सके, इसके लिए राह में आने वाली सारी बाधाओं को तत्काल दूर करते जाना है।
यह पहल केंद्र सरकार अपने स्तर पर भी कर रही है और भाजपा के नेता और कार्यकर्ताओं को भी लाभार्थियों तक संपर्क और पहुंच बढ़ाने के अभियान में लगाया गया है।
'ईज ऑफ लिविंग' है सम्मेलन का थीम
बुधवार और गुरुवार को दिल्ली में होने वाले मुख्य सचिवों के सम्मेलन का मुख्य थीम भी 'जीवन जीने में आसानी' (Ease of the Living) को प्रमोट करना है। इसका खास फोकस स्कूल, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य और कल्याण के साथ-साथ जमीन और संपत्ति जैसे विषय हैं।
तकनीक की मदद लेने पर जोर
इसके लिए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में सुशासन के लिए तकनीक की मदद लेने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि सुविधाएं लोगों तक आसानी से, जल्द से जल्द और बिना रुकावट पहुंचे।
विशेष वोट-वर्ग में तब्दील हुए हैं लाभार्थी
गौरतलब है कि पिछले कुछ चुनावों से सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी एक विशेष वोट-वर्ग में तब्दील हुए हैं, जो जाति-धर्म-लिंग जैसे विषयों से अलग नजर आते हैं। कई चुनावों में देखा गया है कि लाभार्थियों की वजह से परंपरागत तौर पर स्थापित सामाजिक ताना-बाना बदल रहा है और योजनाओं के लाभार्थियों से खासकर बीजेपी को बड़ी मदद भी मिली है। हालिया विधानसभा चुनाव भी इसका बेहतरीन उदाहरण है।
'विकसित भारत संकल्प यात्रा' भी है जारी
खास बात ये है कि राज्यों के मुख्य सचिवों का सम्मेलन जिस वक्त हो रहा है, उसी समय 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के तहत विभिन्न राज्यों में 5 हजार से ज्यादा सरकारी अधिकारी आम लोगों के जीवन को और आसान बनाने के लिए विभिन्न तरह के वर्कशॉप आयोजित कर रहे हैं। सरकार को उनसे महत्वपूर्ण फीडबैक भी मिल रहा है।
इससे पहले 16 सितंबर को केंद्रीय कैबिनेट सचिव की अगुवाई में भी एक बैठक हुई थी, जिसमें राज्य सरकारों से 'ईज ऑफ लिंविग' को फोकस में रखकर लाभार्थी योजनाओं के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण सर्विस डिलिवरी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया था। तीन महीने के अंदर ही इससे भी बड़े सम्मेलन का आयोजन करना इसके प्रति मोदी सरकारी की गंभीरता जाहिर करती है।
लाभार्थियों को चल रही योजनाओं के प्रति जागरूक बनाने पर भी ध्यान
केंद्र सरकार का लक्ष्य साफ है कि जो भी योजनाएं चल रही हैं, उसका लाभ लक्षित लाभार्थियों तक बिना किसी अड़चन के पहुंचे और उन्हें यह जानकारी रहे कि वह किन योजनाओं के हकदार हैं। इसके लिए डिजिटल टेक्नोलॉजी को आधार बनाया जा रहा है।
मान लें कि स्कूलों से संबंधित कोई सेवा है तो यह सुनिश्चित किया जाना है कि बच्चे मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, ऑन-लाइन री-इवैल्युएशन, एडमिशन, सर्टिफिकेट रखने के लिए डिजिलॉकर का इस्तेमाल आदि आसानी से कर सकें।
इसी तरह लोगों को जमीन और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन, म्यूटेशन, प्रॉपर्टी टैक्स के भुगतान में सुविधा हो और उससे जुड़ी जानकारियां भी आसानी से उपलब्ध हो और सभी नागरिक स्वामित्व (SWAMITVA) योजना का इस्तेमाल भी कर सकें।
मिशन बड़ा है, लक्ष्य विशाल है, इरादा एक है!
प्रधानमंत्री मोदी ट्रांसफॉर्मेशन (बदलाव) की बात को काफी गंभीरता से रखते हैं। वह अपनी सरकार की योजना का लाभ सिर्फ लाभार्थियों तक पहुंचाने के इरादे से काम नहीं कर रहे हैं।
उनकी कोशिश है कि लाभार्थियों को पता रहे कि उन्हें किन-किन योजनाओं का लाभ मिल सकता है, ताकि जागरूकता की कमी के चलते वह कहीं सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित न रह जाएं। मिशन बड़ा है और लक्ष्य विशाल है। आखिरी इरादा एक है। प्रत्येक वोटर तक पहुंचना और उनके लिए किए गए कार्यों से उन्हें पूरी तरह से वाकिफ रखना!












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