Oneindia Exclusive: चुनाव नतीजों के बाद शाह-मोदी की राजनीति में बदलाव आएगा? योगेंद्र यादव ने क्या कहा?
Yogendra Yadav Exclusive: लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे इस बार बेहद चौंकाने वाले रहे। एक तरफ, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने 2019 के आंकड़े को भी नहीं छुआ। सिर्फ 240 सीटों पर ही सिमट गई। वहीं, बीजेपी नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 52 सीटें हासिल की। नतीजे एग्जिट पोल के भारी जीत की भविष्यवाणी से बिल्कुल अलग रहे।
वहीं, कांग्रेस ने 99 सीटें जीतीं, जिससे उनकी पिछले चुनाव की तुलना की सीटों में 47 की वृद्धि हुई। वहीं, विपक्षी गठबंधन INDIA (इंडिया नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव अलायंस) ने कुल 234 सीटें जीतीं। हालांकि, चुनाव विश्लेषक और राजनीतिज्ञ योगेंद्र यादव ने पिछले सप्ताह ऐसे नतीजे की भविष्यवाणी की थी कि बीजेपी को जीत तो मिल जाएगी, लेकिन उसके लिए '400 पार' का दावा पूरा करना असंभव होगा।

योगेंद्र का प्रिडिक्शन था कि बीजेपी के लिए 260 सीटों से आगे निकलना मुश्किल होगा और 300 सीटों तक पहुंचना लगभग असंभव होगा। चुनावी नतीजे सामने आते ही योगेंद्र का प्रिडिक्शन सटीक साबित हुआ। योगेंद्र यादव ने वनइंडिया से एक्सक्लूसिव बातचीत में अपने प्रिडिक्शन से लेकर मोदी-शाह की राजनीति तक, कई अहम सवालों के जवाब दिए। आइए आपको रूबरू कराते हैं...
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सवाल- क्या बोले अपने प्रिडिक्शन पर?
जवाब- मेरी भविष्यवाणियां महज संयोग की बात हैं। लेकिन यह बहुत स्पष्ट था। लेकिन, कोई इस बारे में बात नहीं कर रहा था। मैंने भविष्यवाणी की थी कि यूपी में बड़ा राजनीतिक तूफान आएगा, लेकिन किसी ने इसकी जांच नहीं की।
सवाल- एग्जिट पोल के आंकड़ों पर क्या बोले?
जवाब- योगेंद्र कहते हैं कि एग्जिट पोल पर बोले कि मेरे लिए इसका कोई मोल नहीं है। एग्जिट पोल गलत सूचना दें इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि तब तक वोट डल चुके होते हैं। एग्जिट पोल पर सिर्फ सट्टा मार्केट पर ही फर्क पड़ता है। इन दोनों से मुझे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन, इससे ज्यादा चिंता इस बात की थी कि चुनाव शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने 400 पार का नारा दे दिया। सारा मीडिया डुगडुगी बजाने में लग गए। ओपिनियन पोल्स और सर्वे अपने अलग-अलग आकलन बताते रहे। लेकिन कुल मिलाकर चुनाव शुरू होने से पहले बीजेपी का माहौल बना दिया गया था। वोट डालने से पहले वोटर के मन में बीजेपी की जीत की छवि बना दी गई।
सवाल- बीजेपी कहां गलत रही?
जावब- कहा कि एक बार पब्लिक को बेवकूफ बना लीजिए, तो ऐसा लगता है कि आगे भी आप बना लेंगे। आप जनता को बोल दो कि 50 दिन मुझे दे दे। उसके बाद मुझे खंभे से लटका देना। पब्लिक भूल जाएगी। जैसा कि किसान की आय डबल कर दो, बाद में जनता भूल ही जाएगी। बाद में जवाब भी मत देना। उनको लगता है कि सब कुछ मैनेज किया जा सकता है। अडानी को लेकर, सीएम को गिरफ्तार करने का मैसेज, चुनावी बॉन्ड यह सभी मसले थे, लेकिन उनको लगता है कि सब कुछ मैनेज हो सकता है।
सवाल- चुनाव नतीजे आने के बाद शाह-मोदी की जोड़ी से राजनीति में बदलाव आएगा?
जवाब- नतीजे आने के बाद ऐसा नहीं लगा। मोदी की नतीजे आने के बाद स्पीच सुनकर ऐसा लग रहा था कि 320 वाली ही स्पीच उन्होंने तैयार की हुई थी। लेकिन, 230 आने के बाद भी 320 वाली ही स्पीच चला रहे थे। एक कॉमन सी बात है कि किसी एग्जाम में साधारण से नंबर लाने के बाद भी टीवी के आगे सीना तान कर सफला के लिए धन्यवाद अदा किया जाए। कि शानदार सफलता .... देश का और आपका धन्यवाद! यह अहंकार अहंकार है कि हम सब मैनेज कर लेंगे।
मजे की बात यह है कि बीजेपी को मेजॉरिटी नहीं है। न ही मेजॉरिटी ने अभी लेटर राष्ट्रपति को सूचित किया है। एनडीए की मीटिंग भी तब तक नहीं हुई है। मोदी जी को अभी पीएम चुना नहीं गया है और न ही जेडीयू और टीडीपी के बिना चुन सकते हैं। लेकिन, ऐलान कर दिया गया कि मोदी जी की सरकार आ गई। यह सब उनके नेरेटिव का हिस्सा है कि सब मैनेज कर लेंगे। अगर, हैदराबाद या आंध्रा से फोन आया हो तो, तेवर बदले हों।
सवाल- इंडिया गठबंधन की परफॉर्मेंस पर क्या कहते हैं?
जवाब- 2024 के नतीजे आपको 2004 की याद दिलाते हैं। टेक्नीकली 2004 के और 2024 के चुनावी नंबरों में काफी अंतर रहा है। 2004 में बीजेपी और गठबंधन मेजॉरिटी काफी घाटे में रही है। इस बार बीजेपी मेजॉरिटी घाटे में जरूर है, लेकिन प्री-इलेक्टोरल अलाइंस 'मेजॉरिटी' दर्शाती है। हालांकि, मीडिया, पुलिस, पूरा प्रशासन, ईडी, इलेक्शन कमीशन सभी बीजेपी कार्यकर्ताओं की तरह काम कर रहे थे। इस बार समाजवादी पार्टी और विपक्षी गुट के लिए यह एक महान उपलब्धि है।
सवाल- कहां गलती हुई कि नीतीश कुमार इंडिया गठबंधन से अलग हो गए?
जवाब- देखिए, ताली दो हाथ से बजती है। दोनों तरफ से कुछ गलतियां रहीं। नीतीश कुमार का रातों-रात ऐसे पलटना, उनकी छवि को बहुत बड़ा धक्का लगाता है। उनकी छवि पलटूराम की बन गई। अब इससे रिकवर करना उनके लिए काफी मुश्किल होगा। साथ ही में, कहीं न कहीं बाकी गठबंधन के दलों की भावना में कमी जरूर रही होगी। यह इंडिया गठबंधन के लिए एक सबक है कि आपको, सभी को एक साथ लेकर चलना है, नहीं तो काफी दिक्कतें आएंगी।
सवाल- 2014 और 2019 की तुलना में कांग्रेस की राजनीति में क्या बदलाव देखते हैं?
जवाब- दो बड़े बदलाव थे, जिसके लिए राहुल गांधी को बधाई देता हूं। पहला- भारत जोड़ो यात्रा की शुरूआत। दूसरा- भारत जोड़ो न्याय यात्रा की। जिसमें 5 बड़ी घोषणाएं हुई। जिसमें कांग्रेस ने अपने जनाधार (महिला, युवा, दलित, गरीब, मजदूर) पर काम किया। इससे उनका जनाधार मजबूत हुआ। तीसरा- खड़गे जी के आने के बाद से कांग्रेस में चुस्ती देखने को मिली। इन सभी फैक्टर्स ने कांग्रेस को 52 से 99 सीटों पर लाने में मदद की है। यह कांग्रेस के लिए सबक भी है, शाबाशी भी है और चुनौती भी है।
सवाल- 8 जून को नरेंद्र मोदी के PM पद की शपथ का हल्ला है, आप क्या कहते हैं? नीतीश और नायडू का क्या फैसला होगा?
जवाब- राजनीतिक गलियारों का अच्छा एक्सपर्ट नहीं हूं। लेकिन, मेरी समझ यह कहती है कि कुछ न कुछ लेन-देन तो होगा ही। क्योंकि, सभी जाने हैं कि सियासत में कुर्सी का भी लेनदेन होता ही है और मुंबई से प्राइवेट जेट भी आते हैं और सूटकेस भी लाते हैं। तमाम चीजें होती हैं, सरकार तो बन जाएगी। लेकिन, चिंता का विषय यह है कि सरकार का चरित्र क्या होगा? क्योंकि यह सरकार 'इकबाल' पर चलती आ रही है कि जनता हमारे साथ है। लेकिन, इस बार सरकार का इकबाल टूटा है। अब सरकार बिना इकबाल के चलेगी, जो लोकतंत्र के लिए अच्छा है।
सवाल- नतीजों से क्या भारत के ताने-बाने में बदलाव नजर आते हैं?
जवाब- चार मुख्य बदलाव नजर आते हैं। पहला- विपक्ष थोड़ा मजबूत होगा। पालियामेनट में कुछ बहस होगी और वास्तव में सुनना पड़ेगा। तीसरा- मीडिया तंत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। चौथा- जुडिशरी भी सावधानीपूर्वक काम करेगा। पांचवा- जन आंदोलन , संगठन, सिविल सोसाइटी, प्रदर्शन... यह सभी ज्यादा मजबूत होंगे। इनका मजबूत होना, लोकतंत्र के लिए सबसे पक्की गारंटी है। चुनाव के नतीजों से लोकतंत्र ज्यादा मजबूत होगा। यह तंत्र पर लोक की विजय है।
सवाल- नरेंद्र मोदी के राजनीतिक भविष्य पर क्या कहते हैं?
जवाब- मोदी जी की मन की बात कोई नहीं जानता। लेकिन, अगर कोई नेहरू जैसा नेता होता, जिनसे मोदी बार-बार अपनी तुलना करवाना चाहते हैं, वो आज इस्तीफा देकर हट जाता। किसी और को मौका मिलता। लेकिन, ऐसा लगता नहीं है कि मोदी नैतिक कदम उठाएंगे। इस देश में मोदी और मर्यादा का एक ही वाक्य में प्रयोग करना बड़ा ही मुश्किल लगता है। लेकिन, परिणाम यह हो सकता है कि अगर आप सरकार चला रहे हैं, वो भी बिना 'इकबाल' के... धीरे-धीरे बनाया गया तिलिस्म टूट जाएगा। साल या दो साल में यह स्थिति आ सकती है कि मोदी जी को टीवी पर देखते ही लोग बंद कर देंगे। यह बड़े-बड़े तानाशाह के साथ हुआ है कि जब रुखसत होकर गए तो, बेइज्जत होकर गए।
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