Lok Sabha Chunav: सोनिया गांधी सर्वसम्मति से कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष नियुक्त
Lok Sabha Chunav: 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजे 2019 से कांग्रेस पार्टी के लिए राहत भरे साबित हुए। भले ही, सत्ता में आने का ख्वाब पूरा न हुआ हो, लेकिन इस बार कांग्रेस ने 47 सीटें अधिक यानी कि 99 सीटें झटकीं। कांग्रेस की नीत वाली इंडिया गठबंधन ने 234 सीटें हासिल कर अपनी ताकत का सबूत दे दिया। सरकार बनाने के बहुमत के आंकड़े 272 से काफी पीछे रही है।
ऐसे में शनिवार यानी आज नई दिल्ली के अशोका होटल में पार्टी की कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक हुई। इसमें एक तरफ, राहुल गांधी के नाम पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मुहर लगी। लेकिन, राहुल ने सोचने का कुछ वक्त मांग लिया। उधर, राहुल गांधी की मां यानी सोनिया गांधी को सीडब्ल्यूसी के सदस्यों ने सर्वसम्मति से कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष नियुक्त किया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीपीपी अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी के नाम का प्रस्ताव रखा और गौरव गोगोई और तारिक अनवर ने इसका समर्थन किया। संसद के सेंट्रल हॉल में हुई बैठक में सांसदों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।
बैठक से बाहर निकलते ही, कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि सोनिया गांधी को सर्वसम्मति से कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) का अध्यक्ष चुना गया है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह अच्छी बात है कि वह (सोनिया गांधी) दोबारा कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) के रूप में निर्वाचित हुई हैं, और वह हमारा मार्गदर्शन करती रहेंगी।
सीपीपी नियुक्त होने पर सोनिया ने किया ये आग्रह
पिछली लोकसभा में वह कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष थीं और इस बार भी वह इस पद पर दोबारा चुनी गई हैं। 20 साल तक लोकसभा की सदस्य रहीं सोनिया अब राज्यसभा की सदस्य हैं। सीपीपी नेता चुने जाने के बाद पार्टी सांसदों को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने उनसे संसद में "सतर्क, सतर्क और सक्रिय" रहने का आग्रह किया।
सोनिया ने कहा कि सीपीपी के सदस्यों के रूप में, हमारा यह विशेष दायित्व है कि हम उन्हें और उनकी नई एनडीए सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए सतर्क, सजग और सक्रिय रहें। अब संसद को इस तरह से नहीं दबाया जा सकता और न ही दबाया जाना चाहिए, जैसा कि पिछले एक दशक से होता आ रहा है। अब सत्ताधारी प्रतिष्ठान को संसद को बाधित करने, सदस्यों के साथ मनमाने ढंग से दुर्व्यवहार करने या बिना उचित और उचित विचार-विमर्श और बहस के कानून पारित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।












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