Lok Sabha Chunav 2024: उत्तर बंगाल में किसका पलड़ा भारी? पहले चरण में राजबंशी वोट अहम
Lok Sabha Chunav 2024 West Bengal First Phase: बंगाल में लोकसभा चुनावों की शुरुआत उत्तर बंगाल से हो रही है। 19 अप्रैल को यहां की तीन सीटों पर चुनाव होने हैं- कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी। इस इलाके में चाय बागान में काम करने वाले मजबूरों और राजबंशी समुदाय के मतदाताओं का दबदबा रहेगा।
2019 के लोकसभा चुनाव में इन तीनों सीटों पर बीजेपी जीती थी। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस बार यहां अपनी पार्टी की उम्मीदें बढ़ाने के लिए पूरा जोर लगाया है, इसलिए अब एक तरह से भाजपा के गढ़ बन चुके उत्तर बंगाल के चुनाव परिणाम को लेकर लोगों की दलचस्पी बढ़ गई है।

कूचबिहार में बीजेपी-विरोधी वोट बंटने की आशंका
कूचबिहार पश्चिम बंगाल की दूर-दराज वाली पूर्वी सीट है। बीजेपी के गढ़ में बदल चुके कूचबिहार में राजबंशी समुदाय का करीब 40% वोट है, जो एकतरफा चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का दम रखते हैं। इस लोकसभा सीट के अंदर सात विधानसभा सीटों में से सिर्फ 2 पर ही टीएमसी का कब्जा है। अन्य सभी सीटें भी बीजेपी के पास है।
यह सीट 1962 से लेकर 2009 तक लेफ्ट (AIFB) का गढ़ मानी जाती थी। टीएमसी को यहां पहली बार 2014 में मौका मिला। लेकिन, राजबंशी समुदाय से आने वाले केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने 2019 में टीएमसी से निकलकर इसे भगवामय कर दिया।
प्रमाणिक दूसरी बार यहां से भाजपा प्रत्याशी हैं तो तृणमूल ने स्थानीय सिताई विधानसभा के एमएलए जगदीश चंद्र बसुनिया को मौका दिया है। इस सीट से फॉर्वर्ड ब्लॉक ने नितिश चंद्र रॉय को और कांग्रेस ने पिया चौधरी को उम्मीदवार बनाया है।
माना जा रहा है कि सीएए लागू होने के बाद इस सीट पर बीजेपी की स्थिति और मजबूत हुई है, वहीं टीएमसी इसे वापस पाने के लिए पूरी जोर लगा रही है।
जलपाईगुड़ी में त्रिकोणीय हो सकता है मुकाबला
जलपाईगुड़ी से पिछली बार बीजेपी के जयंत कुमार रे चुने गए थे। यहां की 7 विधानसभा सीटों में से अभी 5 पर टीएमसी और 2 पर भाजपा का कब्जा है। यह अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व सीट है। यहां की 7 विधानसभा सीटों सीटों में से एक सीट कूचबिहार जिले में है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 7 में से 6 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली थी।
बीजेपी ने एक बार फिर से जयंत रे को ही टिकट दिया है। टीएमसी ने धुपगुड़ी विधानसभा के एमएलए निर्मल चंद्र रॉय को टिकट दिया है, जिन्होंने पिछले साल ही उपचुनाव में भाजपा से वह सीट छीन ली थी। यह असेंबली सीट भाजपा विधायक बिष्णुपद रे के निधन से खाली हुई थी।
सीपीएम ने यहां से देबराज बर्मन को टिकट दिया है, जिसकी वजह से यहां मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है। यहां भी भाजपा-विरोधी वोटों में विभाजन की स्थिति बनी है।
अलीपुरद्वार में बीजेपी का क्या होगा?
बीजेपी ने इस बार अलीपुरद्वार में अपना प्रत्याशी बदलकर मदारीहाट के विधायक और विधानसभा में पार्टी के चीफ व्हिप मनोज तिग्गा को उतारा है। पार्टी ने मौजूदा सांसद जॉन बार्ला को मौका नहीं दिया है, जिससे पार्टी में अंदरूनी संघर्ष की स्थिति पैदा हुई है। तृणमूल ने प्रकाश चिक बड़ाइक को टिकट दिया है, जो पार्टी के जिलाध्यक्ष भी हैं। तिग्गा भी भाजपा के जिलाध्यक्ष हैं।
लेफ्ट फ्रंट ने यहां से आरएसपी नेता मिली ओरांव पर दांव लगाया है। अलीपुरद्वार एक सुरक्षित सीट है और यहां की सभी सात विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, इस वजह से भी पार्टी यहां विरोधियों से ज्यादा बेहतर स्थिति में नजर आ रही है।












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