NDA 400 सीटें भले पार न करे, 2019 से ज्यादा सीटें मिलेंगी, Antique Broking ने किस आधार पर किया बड़ा दावा?

Lok Sabha Election: इस चुनाव में बीजेपी ने अपने लिए 370 और एनडीए के लिए 400 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है और वह इसे हासिल करने के दावे भी कर रही है। लेकिन, इस दौरान एक स्टॉक ब्रोकिंग फर्म एंटीक ब्रोकिंग ने एनडीए और बीजेपी के चुनाव परिणाम को लेकर बहुत बड़ा दावा किया है।

लाइवमिंट डॉट कॉम ने ब्रोकरेज कंपनी एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के हवाले से एक रिपोर्ट दी है, जिसके मुताबिक बीजेपी की अगुवाई वाला एनडीए हो सकता है कि 370 या 410 सीटें नहीं जीत पाए, लेकिन फिर भी इसकी सीटें 2019 की 353 सीटों से ज्यादा रहेंगी।

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एनडीए की सीटें 2019 के मुकाबले बढ़ने वाली हैं- एंटीक ब्रोकिंग
ऐसे समय में जब मतदान प्रतिशत घटने को लेकर बहुत ही ज्यादा बहस चल रही है, एंटीक ब्रोकिंग का मानना है कि सत्ताधारी दल की सीटें 2019 के मुकाबले बढ़ने वाली हैं। एंटीक के मुताबिक, 'मौजूदा बहस वर्तमान सरकार की संभावनाओं पर है, क्योंकि वोटर टर्नआउट (2019 के मुकाबले) घटा है। वोटर टर्नआउट डेटा के हमारे विश्लेषण के आधार पर हमारा मानना है कि मौजूदा पार्टी अपनी टैली 2019 के मुकाबले बढ़ा सकती है, लेकिन यह ओपिनियन पोल के अनुमानों जिसमें एनडीए को 370-410 सीटें दिखाई गई हैं, उससे कम रह सकती है।'

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चार चरणों में 67% वोटिंग हुई
लोकसभा की सात में से चार चरणों के चुनाव हो चुके हैं। 20 मई को पांचवें चरण की वोटिंग होनी है। इसके बाद 25 मई और 1 जून को चुनाव हैं और नजीते 4 जून को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक चार चरणों में 67% वोटिंग हुई है और 45.1 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।

एंटीक के मुताबिक वोटर टर्नआउट फिर संशोधित किया जा सकता है, क्योंकि पहली बार 85 साल से ज्यादा के बुजुर्गों और दिव्यांगों को घर से बैलट पेपर के जरिए मतदान की सुविधा दी गई है। एंटीक के मुताबिक 82 लाख या 0.8% 85 साल से अधिक और 88 लाख या 0.9% दिव्यांग मतदाताओं को यह सुविधा दी गई है।

2004 के कम मतदान से तुलना को एंटीक ने नकारा
ऐसी चर्चाएं हो रही हैं कि 2004 में भी कम मतदान हुआ था, जिसकी वजह से बीजेपी को अप्रत्याशित रूप से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन, एंटीक ने कहा है कि 2004 से तुलना वाजिब नहीं है, क्योंकि भाजपा का जनाधार काफी बढ़ा है और खासकर कम-आय वर्ग के परिवारों में इसका अब काफी विस्तार हो चुका है।

कल्याणकारी योजनाओं की वजह से बदल गया ट्रेंड- ब्रोकरेज फर्म
ब्रोकरेज फर्म ने कहा है, 'एक प्रमुख चुनाव विशेषज्ञ के साथ हमारी हाल में हुई चर्चा से पता चलता है कि कम वोटर टर्नआउट का बीजेपी की जीतने वाली सीटों में गिरावट के साथ संबंध 2014 से पहले के जमाने में काम करता था, जब इसका मतदाता आधार व्यापक रूप से शहरी, मध्यम से उच्च आय वाले परिवार थे।'

इसमें आगे कहा गया है, 'हालांकि, यह ट्रेंड टूट गया है, क्योंकि कल्याणकारी योजनाओं की एक श्रृंखला के परिणामस्वरूप इसके मतदाताओं का आधार व्यापक (विशेष रूप से निम्न-आय वाले परिवारों में) हो गया है, जो कि जिताने वाले वोट शेयर हिस्सेदारी में महत्वपूर्ण वृद्धि से स्पष्ट है।'

बीजेपी की जीती हुई सीटों पर कम टर्नआउट मामूली असर पड़ेगा- एंटीक
एंटीक का यह भी कहना है कि वोटर टर्नआउट में गिरावट बीजेपी की जीती हुई सीटों पर मामूली ही प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि जिन सीटों पर 2019 में पार्टी जीती थी, वहां जीत का अंतर बहुत ही ज्यादा या 20% से अधिक था।

कम मतदान से कांग्रेस को नुकसान-एंटीक
दूसरी तरफ एंटीक के अनुसार कम मतदान कांग्रेस पर ज्यादा असर डाल सकता है, क्योंकि कांग्रेस की जीती हुई सीटों पर ही कम मतदान का ज्यादा प्रभाव रहा है, जहां पर जीत का अंतर 2019 में 5% से कम था।

एंटीक का कहना है, '2019 के वोटर टर्नआउट में बदलाव के आनुभविक विश्लेषण और 2014 में जीत के मार्जिन से लगता है कि उन सीटों पर वोटर टर्नआउट गिरा है, जहां जीत का अंतर बहुत ज्यादा (20% से अधिक) था, जिसकी कम जीत के अंतर (5% से कम) से जीती गई सीटों की तुलना में सीट खोने की संभावना कम होती है।'

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