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हरिद्वार लोकसभा सीट पर जीत के फैक्टर: क्या कहता है जातीय समीकरण का गणित, जानिए एक्सपर्ट्स की ओपिनियन

Uttarakhand lok sabha election 2024 पूरे देश में जब जब चुनाव की बात आती है तो चुनाव आयोग की मंशा होती है, कि जाति, धर्म की बात चुनाव में न की जाए। लेकिन इससे बड़ा सच ये है कि नेता, चुनाव में अगर कोई गणित सबसे ज्यादा बिठाते हैं तो वह है जातीय समीकरण का गणित।

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बात विकास की बात पर जरूर शुरू होती है, लेकिन चुनाव की गोटियों को बिछाते बिछाते जातीय और धर्म के समीकरण के आसपास ही गोलबंद हो जाती हैं। हरिद्वार के जाने माने इस गणित के जानकार और राजनीति शास्त्र के प्रोफेसरों की बात भी इस खबर में हम आपको बताएंगे।

बात हम हरिद्वार लोकसभा सीट की कर रहे हैं, जिसमें आने वाले लोकसभा चुनाव 2024 में क्या क्या संभावनाएं हैं। इस पर बात करेंगे। जीत हार में जातीय समीकरण क्या भूमिका अदा कर सकते हैं। इसकी हरिद्वार लोकसभा की ग्राउंड रिपोर्ट बता रहे हैं। तो पहले बात करते हैं क्या हैं हरिद्वार लोकसभा सीट के जातीय समीकरण।

हरिद्वार लोकसभा सीट में 14 विधानसभाएं हैं। इनमें 11 हरिद्वार जिले की और तीन देहरादून जिले की सीटें हैं। इस सीट की 60 फीसदी आबादी गांव में रहती है। जबकि 40 शहरी क्षेत्र में। शहरों में अनुसूचित जनजाति का आंकड़ा मात्र 0.44 अनुसूचित जाति 19.23 प्रतिशत है।

सबसे अहम बात इस सीट पर सबसे ज्यादा ओबीसी वर्ग का वोटर है। जो कि करीब 40 फीसदी हैं। इसके साथ ही हरिद्वार लोकसभा सीट में मुस्लिम वोटर भी अच्छी खासी तादात में हैं। जो कि करीब 25 फीसदी है। पिरान कलियर, भगवानपुर, मंगलौर, ज्वालापुर सीट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं।

एसएमजेएन पीजी कॉलेज हरिद्वार के राजनीति विज्ञान विभाग, के विभागाध्यक्ष विनय थपलियाल हरिद्वार लोकसभा सीट के जातीय समीकरणों को बारीकी से समझते हैं और कई सालों से इस पर स्टडी कर रहे हैं। जब वन इंडिया ने हरिद्वार सीट के जातीय और अन्य समीकरणों पर बात की। तो उन्होंने बताया कि इस सीट पर ओबीसी वर्ग का सबसे ज्यादा प्रभाव है। इस सीट पर ओबीसी 40 फीसदी है। साथ ही देहात क्षेत्र में मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं, लेकिन इन का विधानसभा चुनाव में अलग असर दिखता है, लोकसभा चुनाव में अलग।

विनय बताते हैं कि सबसे खास बात ये है कि मुस्लिम वोटर इन इलाकों में छितरा हुआ है। ओबीसी, सवर्ण, तीर्थ पुरोहित ये वोटर भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। इसके अलावा इस समय मोदी फैक्टर मेटा फैक्टर है। यानि मोदी को केंद्र में रखकर लोग अपना पक्ष रख रहे हैं। वे बताते हैं कि कुछ ग्रामीण सीटों पर दलित वोटर भी है। जिस वजह से विधानसभा में दो बसपा के विधायक जीतकर आए थे।

इसके साथ ही देहात क्षेत्र से कांग्रेस को भी इस बार काफी वोट मिला, जिस वजह से विधायक भी चुनकर आए। लेकिन लोकसभा चुनाव में ये समीकरण पूरी तरह से बदले हुए नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि लोकसभा में ओबीसी, सवर्ण, तीर्थ पुरोहित और शहरी क्षेत्र का वोटर एक तरफा भाजपा के पक्ष में झुका हुआ नजर आ रहा है। जबकि मुस्लिम दलित और ग्रामीण क्षेत्रों का वोट बंटा हुआ लग रहा है।

राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर दिव्यांश शर्मा हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र से आते हैं। वे काफी नजदीकी से हरिद्वार के ग्रामीण क्षेत्रों को धरातल से भी समझते और जानते हैं। ऐसे में यहां की सियासत को इनसे बेहतर कौन समझेगा। उनका कहना है कि मंगलौर, पिरान कलियर, झबरेड़ा सीटों पर मुस्लिम फैक्टर है। जो कि विधानसभा चुनाव में तो नजर आता है, लेकिन लोकसभा चुनाव में कहीं न कहीं दब जाता है।

कहते हैं कि ऐसे समय में मुस्लिम वोटर भी भाजपा को कई बार सपोर्ट करता है। वे भी मानते हैं कि हरिद्वार का ओबीसी वर्ग, हिंदू, सवर्ण, तीर्थ पुरोहित भाजपा का समर्थक है। इसके साथ ही मोदी सबसे बड़ा फैक्टर चुनाव में निकल कर आ रहा है। उनका मानना है कि इस बार निर्दलीय और बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में भाजपा को चुनाव में इसका सीधा फायदा होता हुआ नजर आ रहा है।

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