'क्‍या अपने अंतिम संस्‍कार का न्‍यौता भेंजू?' रिटायर्ड जज और उनके पूरे परिवार को मारने की क्‍यों दी गई सुपारी?

Bombay High Court Retired Justice: बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस गौतम पटेल और उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही थीं। वहीं पूरे परिवार का अंतिम संस्‍कार एक साथ करवाने की धमकी से भरा लेटर मिला है। जिसके बाद पूरा परिवार डरा हुआ है। जस्टिस पटेल फिलहाल लंदन में हैं, उन्‍होंने खुलासा किया कि उनकी बेटी पर घर के बाहर हमला हो चुका है।

कभी बॉम्‍बे हाईकोर्ट में अपने फैसलों के जरिए लोगों को न्‍याय दिलवाने वाले रिटायर्ड जब गौतम पटेल और उनका परिवार अपनी सुरक्षा की गुहार लगा रहा है। रिटायर्ड जज ने अधिकारियों की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई है। जानिए क्‍यों रिटायर्ड जज और उसके परिवार को मारने की धमकियां मिल रही हैं, क्‍या है पूरा मामला?

Bombay High Court Retired Justice

क्‍यों मिल रही धमकियां?

दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार विवाद में 2024 के फैसले के बाद रिटायर्ड जस्टिस गौतम पटेल को पिछले कुछ महीनों से कई धमकियां मिल रही हैं। अप्रैल 2024 में जस्टिस गौतम पटेल ने अपने फैसले में सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें दाई अल-मुत्लक (नेता) के रूप में बरकरार रखते हुए उनकी नियुक्ति को वैध माना था।

क्‍या की जा रही मांग?

जस्टिस पटेल ने बताया कि धमकी भरे मैसेज में उनसे यह मांग की गई कि वे अपने पुराने न्यायिक फैसले से पीछे हटें और एक "YouTube वीडियो" बनाकर उसे सार्वजनिक रूप से वापस लें। उन्होंने इसे पूरी तरह अव्यवहारिक और असंवैधानिक बताते हुए कहा कि न्यायिक फैसले वापस लेने की कोई प्रक्रिया नहीं होती, और इसे सोशल मीडिया पर दबाव बनाकर बदलवाने की कोशिश "असंगत और खतरनाक" है।

कब से मिल रही धमकियां?

जस्टिस पटेल के मुताबिक, धमकियों की शुरुआत सितंबर में उनकी पत्नी को मुंबई में मिले एक संदेश से हुई थी। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और उन्हें सुरक्षा भी प्रदान की गई, लेकिन स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।

बेटी पर हुआ हमला

सबसे गंभीर घटना अप्रैल में सामने आई, जब लंदन में उनकी बेटी पर उसके घर के बाहर हमला हुआ। हमलावर ने नकाब पहन रखा था और उसने उनकी बेटी के चेहरे पर कई बार मुक्के मारे, जिससे उसकी नाक टूट गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। जस्टिस पटेल के अनुसार, 5 जून के धमकी पत्र में यह स्पष्ट संकेत दिया गया था कि उनकी बेटी पर हुआ हमला उसी विवाद से जुड़ा हुआ है। साथ ही एक डिजिटल स्टोरेज डिवाइस (SD कार्ड) भी भेजा गया, जिसे अब पुलिस जांच में लिया गया है।

नया धमकी भरे लेटर में परिवार के नाम की सुपारी

5 जून को मिले एक नए पत्र में और भी गंभीर धमकियों का उल्लेख था। इसमें कथित रूप से किसी आपराधिक गिरोह को हायर करने और भुगतान पूरा होने जैसी बातें लिखी गई थीं। पत्र में यह भी कहा गया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो जस्टिस पटेल और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। जस्टिस पटेल ने इस पूरे घटनाक्रम को "सुपारी देकर कराई गई साजिश" जैसा बताया और कहा कि यह संगठित और सुनियोजित प्रयास प्रतीत होता है।

नहीं हुई अभी तक कोई कार्रवाई

इंडिया टुडे को दिए गए इंटरव्‍यू में जस्टिस गौतम पटेल ने कहा कि वे एक भारतीय नागरिक और पूर्व न्यायाधीश होने के बावजूद ब्रिटिश धरती पर लगातार मिल रही धमकियों से चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार को सभी विवरणों के साथ भारतीय उच्चायोग को पत्र भेजा गया था, लेकिन सोमवार दोपहर तक कोई जवाब नहीं मिला।

'अब अपने "अंतिम संस्कार का निमंत्रण" भेजना पड़ेगा'

उन्होंने इस देरी और निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि समझ नहीं आता कि उच्चायोग कार्रवाई से कैसे इनकार कर सकता है या इतनी गंभीर स्थिति को नजरअंदाज कर सकता है। जस्टिस पटेल ने यह भी कहा कि लगातार प्रतीक्षा और निष्क्रियता के बीच अब हालात इतने असहज हो गए हैं कि उन्हें कटाक्ष में यह तक कहना पड़ रहा है कि क्या उन्हें अब अपने "अंतिम संस्कार का निमंत्रण" भेजना पड़ेगा। उन्होंने इस पूरी स्थिति को बेहद बेतुका और चिंताजनक बताया।

डर के साएं में जी रहा पूरा परिवार

लगातार धमकियों और हमलों के कारण जस्टिस पटेल ने कहा कि उनका और उनके परिवार का सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। साधारण गतिविधियां जैसे बाहर जाना या बच्चों को स्कूल छोड़ना भी अब जोखिम भरा हो गया है।

न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल

इस पूरे मामले ने न्यायिक स्वतंत्रता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जस्टिस पटेल ने कहा कि अगर फैसले सुनाने के बाद जजों और उनके परिवार को इस तरह धमकाया जाएगा, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि कानून का डर बना रहे और न्यायिक प्रणाली पर जनता का भरोसा कायम रह सके।

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