Lok Poll: फाइनल ओपिनियन पोल में जानें कर्नाटक में कांग्रेस या भाजपा किसकी बन रही है सरकार?
कर्नाटक चुनाव के लिए मतदान से तीन दिन पहले शनिवार को फाइनल ओपिनियन पोल के नतीज आने शुरू हो चुके हैं। आइए जानते हैं Lok Poll Opinion Poll के क्या

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस आक्रामक प्रचार कर रही है। मतदान से पहले चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में भाजपा और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व प्रदेश भर में चुनावी रैलियां और जनसभाएं करते हुए जनता से से रूबरू होकर वोट मांग रहे हैं।
वहीं चुनाव के लिए मतदान को महज तीन दिन बाकी बचे हैं, इससे पहले लोक पोल ने फाइलन ओपिनियन पोल के परिणाम जारी किए हैं। हालांकि वास्तविक नतीजे 13 मई को घोषित होंगे लेकिन पोलिंग से ठीक पहले इस प्री ओपिनियन पोल में कर्नाटक में किस पार्टी की सरकार बनती नजर आ रही है।
Lok Poll ने जनता का मूड जानने के लिए पिछले 2 महीनों में ग्राउंट लेवल सर्वेक्षण किया जिसमें 65,000 लोगों को शामिल किया गया।
इस प्री पोल ओपिनियन पोल में भी कर्नाटक की सत्ता पर वर्तमान समय में काबिज भारतीय जनता पार्टी वापसी करती नजर नहीं आ रही है। वहीं कांग्रेस को इस सर्वे के अनुसार 129 से 134 सीटों पर जीत दिखती नजर आ रही है । कांग्रेस को इस चुनाव में 42 प्रतिशत से 45 प्रतिशत तक वोट शेयर मिलता दिखाया गया है।
वहीं दूसरे नंबर पर भाजपा के रहने का अनुमान लगाया गया है भाजपा को इस फाइनल ओपिनियन पोल में महज 59 से 65 सीटों पर जीत मिलती दिखाई गई है। वोट शेयर की बात करें तो भाजपा को 31 से 32 फीसदी वोट मिलता दिखाया गया है।
इस ओपिनियन पोल में कुमारस्वामी की जनता दल एस को 23 से 28 सीटें मिलती दिख रही हैं और वोट शेयर की बात करें तो 14 से 18 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं निर्दलीय और अन्य को महज 2 सीटों पर जीत हासिल होने की भविष्यवाणी की गई है। अन्य को इस चुनाव में 5 से 8 फीसदी वोट जा सकता है।
बता दें कर्नाटक में चुनाव के लिए मतदान 10 मई को होगा और वोटों की गिनती 13 मई को होगी। जिसके बाद उसी दिन चुनाव आयोग चुनाव परिणाम घोषित करेगा।
याद रहे 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सबसे अधिक सीटों पर जीत हासिल की थी लेकिन बहुमत ना मिल पाने के कारण वो सरकार बनाने से चूक गई थी। कांग्रेस जिसने भाजपा की तुलना में बहुत कम सीटें जीती थी लेकिन उसने बाजी मारते हुए जेडीएस से हाथ मिलाकर सरकार बना ली थी।
हालांकि कुमारस्वामी और कांग्रेस के गठबंधन की सरकार एक साल ही गिर गई थी। इसकी वजह थी कि कांग्रेस के कई विधायक बगावत करते हुए भाजपा से हाथ मिला लिए थे। जिसके बाद भाजपा ने कर्नाटक में सत्ता हासिल कर ली थी।













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