लॉकडाउन से मंडराया इंडियन एयरलाइन सेक्टर में 29 लाख कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा!
नई दिल्ली। वैश्विक विमानन कंपनियों के समूह IATA ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी से भारतीय विमानन और उस पर आश्रित उद्योगों में 29 लाख से अधिक नौकरियों पर असर पड़ने की संभावना है। दरअसल, यह IATA ने उक्त कयास कोरोनो वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के बीच 3 मई तक देश में वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं निलंबित होने के आधार पर लगाए है।
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गौरतलब है कोरोना वायरस के प्रसार की रोकथाम के लिए लागू किए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने आर्थिक गतिविधियों को काफी प्रभावित किया है, जिसमें सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में विमानन और पर्यटन क्षेत्र है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने कहा कि इसके नवीनतम अनुमान एशिया-प्रशांत क्षेत्र में COVID-19 संकट से देश के प्रभाव को बिगड़ने का संकेत देते हैं।

IATA के मुताबिक लॉकडाउन के चलते भारत में यात्री यातायात में 47 फीसदी की गिरावट आई है। भारत के बारे में IATA ने कहा कि महामारी से देश के विमानन और उसके आश्रित उद्योगों में 29,32,900 नौकरियों के संभावित रूप से प्रभावित होने की उम्मीद है।

इसके अलावा समूह ने उल्लेख किया है कि लॉकडाउन से भारतीय बाजार में परिचालन करने वाली एयरलाइनों के लिए राजस्व पर 10,000 करोड़ रुपए से अधिक का प्रभाव होगा, जो वर्ष 2019 की तुलना में यात्री राजस्व में गिरावट को दर्शाता है, क्योंकि यात्री मांग प्रभाव (मूल गंतव्य वॉल्यूम) में 8.98 करोड़ से अधिक की गिरावट हुई है। पूरे 2019 की तुलना में अब तक के सभी आंकड़े 2020 की अवधि के हैं।

31,400 करोड़ रुपए की वैश्विक एयरलाइन यात्री राजस्व में गिरावट होगी
IATA एयर इंडिया, विस्तारा, इंडिगो और स्पाइसजेट सहित लगभग 290 एयरलाइंस का समूह है। गत 14 अप्रैल को IATA ने कहा कि COVID-19 संकट में इस वर्ष 31,400 करोड़ रुपए की वैश्विक एयरलाइन यात्री राजस्व में गिरावट होगी, जो 2019 की तुलना में 55 फीसदी की गिरावट होगी।

2020 में सबसे अधिक राजस्व 11,300 करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज करेगी
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एयरलाइंस पिछले साल की तुलना में 2020 में सबसे अधिक राजस्व 11,300 करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज करेगी। IATA के अनुसार इसके क्षेत्रीय और अंतरमहाद्वीपीय को देखते हुए ये अनुमान घरेलू बाजारों में प्रतिबंधों के क्रमिक उठाने के साथ तीन महीनों तक चलने वाले गंभीर यात्रा प्रतिबंधों के एक परिदृश्य पर आधारित हैं।

आईएटीए के क्षेत्रीय उपाध्यक्षने कहा कि स्थिति बिगड़ती जा रही है
आईएटीए के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष (एशिया-पैसिफिक) कॉनराड क्लिफोर्ड ने कहा कि स्थिति बिगड़ती जा रही है। एयरलाइंस सेक्टर संघर्षपूर्ण स्थिति में है। दूसरी तिमाही में 6100 करोड़ रुपए की नकदी के साथ नकदी संकट का सामना करना पड़ रहा है।

IATA ने एयरलाइन उद्योग के लिए कर राहत के संयोजन का आह्वान किया है
उनके अनुसार भारत, इंडोनेशिया, जापान, मलेशिया, फिलीपींस, कोरिया गणराज्य, श्रीलंका और थाईलैंड ऐसे प्राथमिकता वाले देश हैं, जिन्हें कार्रवाई करने की जरूरत है। इसके अलावा समूह ने प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, ऋण, ऋण गारंटी और कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के समर्थन और एयरलाइन उद्योग के लिए कर राहत के संयोजन का आह्वान किया है।

एशिया-प्रशांत में 1 करोड़ 12 लाख नौकरियां खतरे में हैं
क्लिफर्ड ने कहा कि एयरलाइनों के लिए समर्थन प्रदान करने का व्यापक आर्थिक प्रभाव है। कई क्षेत्रों में नौकरियां प्रभावित होंगी यदि एयरलाइंस COVID-19 संकट से नहीं बच पाती हैं, क्योंकि प्रत्येक एयरलाइन नौकरी यात्रा और पर्यटन से जुड़ी श्रृंखला में 24 नौकरियों की पूरक है। एशिया-प्रशांत में 1 करोड़ 12 लाख नौकरियां खतरे में हैं, जिनमें विमानन उद्योग पर निर्भर यात्रा और पर्यटन के लोग भी शामिल हैं।












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