लॉकडाउन: 'राम नाम सत्य है' कहते हुए 90 साल के हिंदू को मुस्लिम पड़ोसियों ने दिया कंधा
नई दिल्ली- पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस के संक्रमण और लॉकडाउन के बीच सांप्रदायिक सौहार्द का एक बेहतरीन उदाहरण सामने आया है। यहां जब 90 साल के एक बुजुर्ग की सामान्य वजहों से मौत हो गई, तब उसके अंतिम क्रिया के लिए उसके मुसलमान पड़ोंसी आगे आए। मुसलमान पड़ोसियों ने न सिर्फ बिनय साहा के पार्थिव शरीर को कंधा दिया, बल्कि 'बोलो हरि, हरि बोल' और 'राम नाम सत्य है'...जैसे प्रचलित नारे भी लगाए। (तस्वीर सौजन्य:एनडीटीवी)

सबसे बड़ी बात ये है कि बुजुर्ग के पार्थिव शरीर को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए वे लोग रात में 15 किलोमीटर तक पैदल ही चले। एनडीटीवी के मुताबिक इस शव यात्रा में बुजुर्ग के दोनों बेटों कमल और श्यामल के दोस्त और पड़ोसी शामिल थे, जो कलियाचक टू ब्लॉक के लोलियाटोला गांव में रहते हैं। श्यामल के मुताबिक, 'हमारे पिता की मौत बुजुर्गावस्था से जुड़ी बीमारियों की वजह से हो गई। हम परेशान थे कि लॉकडाउन के दौरान उनका अंतिम संस्कार कैसे करेंगे। हमारे किसी भी रिश्तेदार का आना संभव नहीं था। वास्तव में हमें चिंता नहीं करनी चाहिए थी। हमारे पड़ोसी आगे आए और सबकुछ आसानी से हो गया।
पड़ोसी सद्दाम शेख ने बताया कि साहा का परिवार उनका सबसे नजदीकी पड़ोसी है और यहां पिछले 20 साल से यहां रह रहे हैं। उसने कहा, 'मंगलवार को उनकी मौत के बारे में सबसे पहले मुझे पता चला। हम लोग (गांव के मुसलमान) पड़ोसी हैं और हमने अपनी जिम्मेदारी निभाई। इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है।' पंचायत प्रधान रजिया बीवी ने कहा, 'हमारा धर्म अलग होने के बावजूद हमलोग साथ-साथ रहते हैं।'
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लॉकडाउन के दौरान ऐसे कई मामले आए हैं, जहां लोगों ने एक-दूसरे की मुश्किल घड़ी में धर्म और विश्वास के ऊपर इंसानियत को तरजीह दी है। जाहिर है कि अगर साहा के परिवार वालों के लिए उनके मुस्लिम पड़ोसी खड़े नहीं होते तो इस वैश्विक महामारी के चलते जारी लॉकडाउन में वे अपने पिता के अंतिम संस्कार की पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारी कैसे निभा पाते।












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