Lockdown के बीच भारत मना रहा है ईद का त्योहार, राष्ट्रपति-पीएम ने देशवासियों से कहा-Eid Mubarak

नई दिल्ली। पूरे देश में आज ईद का त्योहार मनाया जा रहा है, हालांकि लॉकडाउन की वजह से लोग आज अपने घरों में ही ईद की नमाज अता कर रहे हैं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ईद की बधाई दी है, इससे पहले दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा कि ईद का चांद दिखाई दे गया है, पूरे देश में 25 मई को ईद-उल-फित्र मनाई जाएगी, हालांकि, केरल और जम्मू-कश्मीर राज्यों में शनिवार को ही ईद मना ली गई।

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     देशभर में आज ईद की धूम

    देशभर में आज ईद की धूम

    ईद की बधाई देते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना की है तो वहीं महामहिम रामनाथ कोविंद ने ट्विटर पर हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू तीन भाषाओं में ईद की बधाई दी है।

    प्रेम, शांति और भाईचारे का प्रतीक है ईद

    राष्ट्रपति ने ट्विटर पर लिखा है कि ईद मुबारक! यह त्योहार प्रेम, शांति और भाईचारे का प्रतीक है। ईद पर हमें समाज के जरूरतमंद लोगों का दर्द बांटने और उनके साथ खुशियां साझा करने की प्रेरणा मिलती है। आइए, इस मुबारक मौके पर हम जकात की भावना को मजबूत बनाएं और कोविड-19 की रोकथाम के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

    भाईचारे को बढ़ावा देने वाला त्योहार है ईद

    बता दें कि ईद उल-फितर मुस्लिम समाज रमजान उल-मुबारक के एक महीने के बाद मनाते हैं, इस्लामी कैलंडर के सभी महीनों की तरह यह भी नए चांद के दिखने पर शुरू होता है। मुसलमानों का त्योहार ईद मूल रूप से भाईचारे को बढ़ावा देने वाला त्योहार है। इस त्योहार पर सभी खुदा से सुख-शांति और बरक्कत के लिए दुआएं मांगते हैं। पूरे विश्व में ईद की खुशी पूरे हर्षोल्लास से मनाई जाती है।

    ईद के दिन खुदा से कहते हैं-शुक्रिया

    एक महीने का रोजा या उपवास की समाप्ति की खुशी के अलावा इस ईद में मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा इसलिए भी करते हैं कि उन्होंने महीने भर के उपवास रखने की शक्ति दी। ईद के दौरान बढ़िया खाने के अतिरिक्त नए कपड़े भी पहने जाते हैं और परिवार और दोस्तों के बीच तोहफ़ों का आदान-प्रदान होता है। सेवईं इस त्योहार की सबसे जरूरी खाद्य पदार्थ है जिसे सभी बड़े चाव से खाते है, ईद के दिन मस्जिदों में सुबह की प्रार्थना से पहले हर मुसलमान का फर्ज है कि वो दान या भिक्षा दे। इस दान को जकात उल-फितर कहते हैं।

    चांद देखने के बाद ही ईद क्यों?

    चांद देखने के बाद ही ईद क्यों?

    ईद-उल-फितर हिजरी कैलेंडर के 10वें माह के पहले दिन मनाई जाती है। हिजरी कैलेंडर में नया माह चांद देखकर ही शुरू होता है। जब तक चांद नहीं दिखे, तब तक रमजान का महीना खत्म नहीं माना जाता है। रमजान का महीना खत्म होने के बाद ही नए माह के पहले दिन ईद मनाई जाती है। माना जाता है कि इसी दिन हजरत मुहम्मद मक्का से मदीना के लिए निकले थे।

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