आडवाणी को पड़ा मोदी का विरोध करना मंहगा!

आडवाणी और जोशी को नरेन्द्र मोदी का विरोध करना भारी पड़ा हैं। चुनावों से आडवाणी और जोशी दोनों ने मोदी का विरोध किया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने आडवाणी और जोशी को अपने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया। अब ये 2 पुराने नेता अपने भाग्य के साथ समझौता कर शांत हो गए है। आपको बता दे कि ऐसा पहली बार है जब कि जोशी को एनडीए सरकार में जगह नहीं मिली।
सराकर में जगह नहीं मिलने के बाद आडवाणी और जोशी ने स्वीकार कर लिया है कि उनका रजानीतिक जीवन अत: खत्म हो गया है। संघ ने पार्टी और सरकार दोनों में नेताओं की आयु सीमा 75 वर्ष तक निश्चित की है। पार्टी नेताओं ने दावा किया है कि आडवाणी या जोशी के साथ कोई वायदा नहीं किया गया था। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि न तो मंत्री पद न ही स्पीकर का पद और न ही राजग के चेयरपर्सन बनाने का आश्वासन इनको दिया गया था।
जानकारी ये भी है कि उन्हें कोई पद देने के बजाए पार्टी उनके अनुभव का लाभ उठाएगी। आडवाणी और जोशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे। आडवाणी को समारोह की पहली पंक्ति में स्थान दिया गया था जो निर्वतमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री ए.डी.देवगौड़ा और सभी अन्य राष्ट्रो अध्यक्षों के लिए सुरक्षित थी।












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