'लद्दाख के शेर' ने दी चीन को चुनौती, कहा-हिम्मत है तो लद्दाख स्काउट्स से लड़कर दिखाएं
लेह। कारगिल की जंग में पाकिस्तान के छक्के छुड़ाने वाले कर्नल (रिटायर्ड) सोनम वांगचुक ने चीन को चैलेंज किया है। कर्नल वांगचुक ने इसके साथ ही लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) की सुरक्षा के लिए लद्दाख स्काउ्टस की ज्यादा से ज्यादा बटालियन तैयार करने पर जोर दिया है। अगर आप कर्नल वांगचुक के नाम से ज्यादा परिचित नहीं हैं तो आपको बता दें कि उन्हें 'लद्दाख का शेर' कहा जाता है और आज भी हर लद्दाखी के घर में उनकी बहादुरी की कहानी बच्चों को सुनाई जाती है।

लद्दाख स्काउट्स की हों ज्यादा बटालियन
कर्नल वांगचुक ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा, 'हमें लद्दाख स्काउट्स की ज्यादा से ज्यादा बटालियन तैयार करनी होगी क्योंकि उसके जवान इसी इलाके से होते हैं। उन्हें इस जगह और यहां के वातावरण की पूरी जानकारी होती है और वह यहां के मुश्किल रास्तों के बारे में भी जानते हैं जो कि सबसे ज्यादा अहम है।' कर्नल वांगचुक की मानें तो लद्दाखी स्काउट्स के जवान चीन के लिए मुसीबत साबित हो सकते हैं। कर्नल वांगचुक साल 2007 में सेना से रिटायर हो चुके हैं। कर्नल की मानें तो पूर्वी लद्दाख में चीन की चाल को समझने से लेकर माकूल जवाब में लद्दाख स्काउट्स सबसे बेहतर विकल्प है।

कौन हैं कर्नल वांगचुक
कर्नल वांगचुक ने कारगिल की जंग में 18,000 फीट की ऊंचाई पर चोरबत ला पर इंडियन आर्मी की पोस्ट से 135 पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ा था। कर्नल वांगचुक लद्दाख स्काउट्स के ही ऑफिसर थे और इस बटालियन के पास मुश्किल स्थितियों में बॉर्डर की रक्षा करने की जिम्मेदारी है। जंग के समय कर्नल वांगचुक छुट्टी पर थे। लेकिन जैसे ही उनके पास जंग की खबर पहुंची वह अपनी छुट्टी बीच में ही छोड़कर बेस कैंप पहुंच गए थे। कर्नल वांगचुक को उनके अदम्य साहस के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

लद्दाख के लोग हर पल सेना के साथ
कर्नल वांगचुक कहते हैं कि लद्दाख के लोग सेना के साथ खड़े रहते हैं, लेकिन चीन को ऊंची पहाड़ियों से खदेड़ने के लिए युद्ध की जरूरत है।उन्होंने कहा, लेह के लोग देशभक्त हैं और वह अपने शरीर व आत्मा के साथ सेना के साथ खड़े हैं। हालांकि कर्नल वांगचुक की मानें तो सरकार के दावों से अलग एलएसी पर हालात पूरी तरह से भिन्न हैं। भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन की तरफ मोल्डो में हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई है। सूत्रों की मानें तो चीन गलवान घाटी और फिंगर 4 से पीछे हटने को तैयार नहीं है। कहा जा रहा है कि वार्ता में जो उम्मीद की गई थी, वह उसके विपरीत रही है।

टकराव खत्म होने के आसार जल्द नहीं
भारत और चीन के बीच पांच मई से पूर्वी लद्दाख में टकराव जारी है। दोनों देशों के बीच कई राउंड वार्ता हो चुकी है। छह जून को मोल्डो में ही दोनों सेनाओं के बीच पहली कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। लेकिन वह बेनतीजा रही है। इसके बाद भारत और चीन की सेनाओं के बीच 15/16 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में टकराव हिंसक हो गया। इस संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। यहां से ही एलएसी पर स्थितियां पूरी तरह से बदल गई है। सूत्रों की तरफ से बताया गया है कि भारत ने अब चीन को जवाब देने के लिए नियमों में बदलाव कर दिया है। जवानों को साफ कर दिया गया है कि वो हथियार प्रयोग करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं।












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