लेस्बियन कपल ने बताई इमोशनल कहानी, वीडियो शेयर कर पूछा-हमारी शादी लीगल होगी या नहीं?
समलैंगिक कपल यश्विका और पायल सोशल मीडिया पर काफी पॉपुलर हैं। इनकी शादी को कई साल हो गए हैं लेकिन अभी तक उसे मान्यता नहीं मिली है। वे सोशल मीडिया पर अपने वीडियो शेयर करते रहते हैं।

देश की सर्वोच्च अदालत में समलैंगिक विवाह को मान्यता देने को लेकर सुनवाई चल रही है। केंद्र सरकार जहां समलैंगिक विवाह का विरोध कर रहा है। तो वहीं कई संगठन सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की अपील कर रहे हैं। इसी बीच एलजीबीटीक्यू समुदाय के एक कपल ने अपनी इमोशनल कहानी दुनिया के साथ शेयर की है। लेस्बियन कपल यश्विका और पायल ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर किया है।
यश्विका और पायल एक दूसरे से शादी कर चुकी हैं। लेकिन उनकी शादी को कानूनी मान्यता नहीं दी गई है। पायल ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर अपनी शादी की फोटो शेयर कर पूछा है कि, उनकी शादी को कानूनी मान्यता मिलेगी या नहीं? वही यश्विका ने अपने वीडियो में कहा कि, हम खुद से उम्मीद रख रहे हैं। देखते हैं आने वाले दिन में क्या बदलाव होगा? वहीं यश्विका ने एलजीबीटीक्यू समुदाय पर भेदभाव का आऱोप लगाते हुए कहा कि, उन्हें स्ट्रेट लोगों का अधिक सपोर्ट मिलता है।
यश्विका ने वीडियो में बताया कि, आम लोग हम लोगों के समुदाय के कपल को सामान्य नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों के इतर हमारे समुदाय के लोग ही हम लोगों के साथ भेदभाव कर रहे हैं। वे हमारी पोशाक तक पर सवाल उठा रहे हैं। यश्विका ने बताया कि, हमारे समुदाय के लोगों ने सवाल उठाते हुए पूछा था कि, दोनों लड़की हो तो शादी पर एक ने शेरवानी क्यों पहनी, दोनों ने लहंगा क्यों नहीं पहना था।
इस कपल ने कहा कि, एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग खुद के हम लोगों को खुद ही स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं तो दूसरों से क्या उम्मीद रखें। वहीं वीडियो में पायल ने लोगों से सवाल पूछा कि 'हमारी शादी लीगल होगी या नहीं?' आजादी के नाम पर इस लड़ाई में मुझे ये स्वीकार नहीं है कि सड़कों पर नंगपना दिखाएं। आजादी के नाम पर ये चीजें कभी नहीं होतीं। न ही ये होता कि हम चीख-चीखकर बोलें कि हम LGBTQ समुदाय के हैं।
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने कल इस मामले पर एक पांच जजों की संवैधानिक पीठ का गठन कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच ने मामले को संवैधानिक बेंच रेफर कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह मौलिक और बुनियादी महत्व का मामला है लिहाजा इस पर सुनवाई और फैसले के लिए मामले को लार्जर बेंच रेफर किया जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मामले की सुनवाई 18 अप्रैल से होगी और पांच जजों की संवैधानिक बेंच सुनवाई करेगी।इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, समलैंगिक कपल जिस बच्चे को गोद लिया हो जरूरी नहीं है कि वह बच्चा समलैंगिक हो। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर लेस्बियन कपल या गे कपल ने बच्चे गोद लिए हों तो जरूरी नहीं है कि बच्चे भी गे या लेस्बियन हो जाएं।












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