प्रवासी राजनीति: निर्मला सीतारमण में प्रियंका गांधी से पूछा, 'बसें छत्तीसगढ़ क्यों नहीं भेजे?'
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रवासियों के लिए उत्तर प्रदेश में भेजने के लिए तैयार सैकड़ों बसों को बुधवार शाम 4 बजे तक इंतजार के बाद वापस बुला लिया है और लगातार तीन दिन से कांग्रेस और बीजेपी में प्रवासियों को लेकर चला राजनीतिक घमासान को अंत हो गया है।

एक वीडियो मैसेज के जरिए प्रियंका गांधी ने यूपी सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि यूपी सरकार ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया जबकि उनकी मंशा प्रवासियों को मदद करने की थी। बुधवार शाम 4 बजे की समय सीमा से पहले जारी वीडियो संदेश में प्रियंका गांधी ने कहा, अगर आप बसों पर भाजपा के झंडे और स्टिकर का उपयोग करना चाहते हैं, तो करें, लेकिन कम से कम बसों को चलने दें।

उधर, पूरे मामले पर कांग्रेस नेता पर हमला करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि अगर वह (प्रियंका गांधी) वास्तव में यूपी सरकार के कामकाज पर निगाह रखती हैं, तो उन्हें देखना चाहिए कि यूपी में 300 श्रमिक ट्रेनें क्यों पहुंचीं, जबकि छत्तीसगढ़ में अभी तक 7 ट्रेन नहीं पहुंची हैं।

सीतारमन ने आगे कहा कि उन्हें मामले का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए, क्योंकि प्रवासी भारतीय हैं और हम सभी को असाधारण स्थिति को ध्यान केंद्रित करते हुए एक साथ काम करना चाहिए।
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने कांग्रेस पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कांग्रेस द्वारा सूचीबद्ध बसों को चलाने की अनुमति देने का फैसला वापस ले लिया था, क्योंकि मुहैया कराए सूची में बसों के नाम पर ऑटोरिक्शा, टेम्पो और मालवाहक ट्रकों को सूचीबद्ध किया गया था।

बीती देर रात बसों के गलत विवरण देने के लिए योगी सरकार ने प्रियंका गांधी के सचिव के खिलाफ प्राथमिकी भी दायर कराई गई। इतना ही नहीं, इस गंदी राजनीतिक लड़ाई में रायबरेली की कांग्रेस विधायक ने भी प्रियंका गांधी को आड़ों हाथ लिया और अपनी ही पार्टी हमला करते हुए योगी सरकार का समर्थन किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने बयान में कहा, संकट की घड़ी में यह क्षुद्र राजनीति क्यों? 1,000 बसों की एक सूची भेजी गई थी, लेकिन आधी से अधिक बसें नकली थीं, 297 दोषपूर्ण थीं, 98 ऑटो-रिक्शा और एम्बुलेंस-प्रकार की कारें थीं और 68 वाहन बिना पंजीकरण पत्र के थे। क्या क्रूर मजाक है? अगर बसें होतीं, तो उन्हें राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र (सभी कांग्रेस शासित) में क्यों नहीं चलाया जाता।

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि मामले में अपनी पार्टी पर हमला करने की वजह कांग्रेस विधायक अदिति सिंह को कांग्रेस महिला विंग में उनके पद से निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।












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