Same Sex Marriage पर कानून मंत्री किरेन रिजिजू बोले- अदालतें ऐसे मामलों का मंच नहीं, लोग करें फैसला
समलैंगिक विवाह को लेकर केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने बड़ी बात कहा है। मंत्री ने कहा कि शादी जैसे महत्वपूर्ण मामले के लिए अदालतें मंच नहीं हो सकतीं।

Same Sex Marriage: समलैंगिक विवाह की अनुमति मांगने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। इस बीच केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अदालतें शादी जैसे मामलों को निपटाने के लिए अदालतें मंच नहीं हो सकतीं। ।कानून मंत्री ने आगे कहा कि शादी जैसे महत्त्वपूर्ण मामलों पर देश के लोगों को फैसला करना है।
समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने अहम टिप्पणी की थी। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने कहा कि समलैंगिक विवाह को वैध बनाना इतना आसान भी नहीं है, जितना कि यह दिखता है। इस मुद्दे पर कानून बनाने के लिए संसद के पास निर्विवाद रूप से विधायी शक्ति है। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में अदालत को भी ये विचार करने की आवश्यता होगी की कोर्ट कितना आगे तक इस याचिका पर बढ़ पाएगी।
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याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि अगर समलैंगिक विवाह की अनुमति दी जाती है, तो इसके परिणामी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसकी न्यायिक व्याख्या, विशेष विवाह अधिनियम, 1954 तक ही सीमित नहीं रहेगी। इसके दायरे में व्यक्तिगत कानून भी चलन में आ जाएंगे। पीठ ने कहा कि शुरू में हमारा विचार था कि इस मुद्दे पर हम पर्सनल लॉ को नहीं छूएंगे, लेकिन बिना पर्सनल लॉ में परिवर्तन किए समलैंगिक शादी को मान्यता देना आसान काम नहीं है।
ऐसे में केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजूजू का बयान अहम है। अब अदालत से समलैंगिक विवाह का मुद्दा सरकार की ओर आने से पहले ये माना जा सकता है गेंद सरकार ने अब जनता के पाले में डाल दी है।
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