Same Sex Marraige: अमेरिका में शादी के बाद गे कपल वैभव-पराग ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार
Same Sex Marraige: समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की बहस के बीच टेक्सास में शादी करने वाले गे कपल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके समान अधिकारी की गुहार लगाई है।

Same Sex Marraige: भारत में समलैंगिक संबंधों को पहले ही अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है, लेकिन अब समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने पर बहस चल रही है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा गे कपल
इस बीच वैभव और पराग जिन्होंने 2017 में अमेरिका के टेक्सास में शादी की थी उन्होंने भारत के सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है कि फॉरेन मैरिज एक्ट को जेंडर न्यूट्रल बनाया जाए। बता दें कि वैभव और पराग ने हाल ही में एक चार महीने के बच्चे को गोद लिया है।
फॉरेन मैरिज एक्ट बने भारत में न्यूट्रल जेंडर
वैभव और पराग 2012 से एक दूसरे के साथ समलैंगिंक संबंध में हैं। दोनों ने वरिष्ठ वकील गीता लूथरा के जरिए भारत के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके गुहार लगाई है कि फॉरेन मैरिज एक्ट को जेंडर न्यूट्रल बनाया जाए। यानि विदेश में हुई शादी को लिंग के आधार पर ना देखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट में मामला
वैभव और पराग सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के सामने पेश हुए। इस दौरान गीता लूथरा ने कहा कि टेक्सास में समलैंगिक विवाह कानूनी है।
भारत में इनका विवाह नहीं मान्य
ये कई अन्य देशों में भी जाने के लिए आजाद हैं और उन्हें वहां समान अधिकार मिलते हैं, लेकिन अगर ये भारत आते हैं तो इनके विवाह को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
वीजा रद्द किया गया
कोरोना काल में दोनों ने भारत आने के लिए वीजा दिया गया था, लेकिन भारत में दोनों की शादी रजिस्टर नहीं होने की वजह से वीजा रद्द कर दिया गया। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को फॉरेन मैरिज एक्ट को जेंडर न्यूट्रल बनाना चाहिए और उनके विवाह को यहां रजिस्टर करना चाहिए।
शादी की व्यवस्था में तरक्की हुई है
एडवोकेट लूथरा ने कहा कि विवाह समाज का सबसी पुरानी परंपरा है। पहले अंतर्जातीय और दूसरी मान्यता की शादी को स्वीकार नहीं किया जाता था। कुछ देशों में दूसरी नस्लों के बीच विवाह को मान्यता नहीं दी जाती है। लेकिन समाज में शादी की व्यवस्था ने काफी तरक्की की है।
प्रतिभाशाली समलैंगिक भारत छोड़ रहे
वरिष्ठ वकील सौरव कृपाल ने कहा कि जीडीपी का 17 फीसदी इसलिए प्रभावित होता है क्योंकि कई प्रतिभाशाली युवक जो गे हैं, वह अपनी आजादी के लिए दूसरे देश चले जाते हैं और वहां विवाह करते हैं।
LGBTQIA के सदस्य संसद का इंतजार नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इसमे काफी समय लगेगा। शादी करना एक मौलिक अधिकार है, जिसे समलैंगिक कहकर छीना नहीं जा सकता है।
भारत में लाखों लोग समलैंगिक
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि दुनिया में 5-7 फीसदी आबादी खुद को LGBTQIA समुदाय का बताती है। भारत में भी लाखों लोग इस कम्युनिटी से आते हैं, लिहाजा सरकार कोर्ट से यह नहीं कह सकती है कि इसके लिए संसद का इंतजार कीजिए।












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