कोरोना संकट के शुरुआती दौर में हर रोज प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखने वाले ये अफसर अब कहां हैं?
नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस का पहला केस 30 जून को सामने आया था। ये केरल का एक छात्र था जो चीन से लौटा था। शुरुआत में एक-दो केस ही आए लेकिन धीरे-धीरे केस बढ़े और अब भारत दुनिया के सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित देशों में है, जहां 50 हजार मामले रोज सामने आ रहे हैं। देश छह महीनों से इस बीमारी से जूझ रहा है। इस सबके बीच एक बात और आपने गौर की होगी कि कोरोना संक्रमण को लेकर सरकार की ओर से होने वाली प्रेस वार्ताओं के चेहरे भी बदल गए हैं।

ये तीन अधिकारी बन गए थे चेहरा
कोरोना केस बढ़ने के बाद सरकार की ओर से रोज प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी जाती थी। इसका चेहरा होते थे स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल जो कोरोना के मामलों को बताते थे। गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव जो कि लॉकडाउन और गृह मंत्रालय के फैसलों को लेकर जानकारी देती थीं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुंसधान परिषद (आईसीएमआर) के डॉक्टर रमन गंगाखेड़कर जो कि बीमारी के बारे में बताते थे।
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लव अग्रवाल और डॉ रमन आर. गंगाखेड़कर ल
लव अग्रवाल 1996 बैच के आंध्र प्रदेश काडर के आईएएस अधिकारी हैं। वह यूपी के रहने वाले हैं और उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक किया है। 2016 में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय में जॉइंट सेक्रटरी का पद संभाला। उससे पहले वह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में स्वास्थ्य मंत्रालय समेत कई अहम जिम्मेदारियों को निभा रहे थे। 48 साल के लव अग्रवाल काफी सधे और सौम्य अफसर माने जाते हैं। प्रेस वार्ता में भी वो काफी सौम्यता से बात करते थे। अब वो प्रेस वार्ता में कम ही दिखते हैं, उनको राज्यों में कोरोना की स्टेज मॉनिटर करने की जिम्मेदारी दी गई है। वो केंद्र की टीम के साथ राज्यों में घूमकर कोरोना की स्थिति को भी देख रहे है।
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) में महामारी और संक्रामक बीमारियों के विभाग प्रमुख रहे डॉ गंगाखेड़कर ने मेडिकल क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण रिसर्च किए हैं। गंगाखेड़कर नैशनल एड्स रिसर्च इंस्टिट्यूट पुणे के असिस्टेंट डायरेक्टर भी रह चुके हैं। गंगाखेड़कर भी कोरोना पर प्रेस वार्ता में लव अग्रवाल के साथ दिखते थे। अप्रैल के बाद वो प्रेस वार्ता में नहीं आए। खासतौर से राज्यों के रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट को लेकर शिकायत के बाद वो पैनल में नहीं दिखे। 30 जून को वो आईसीएमआर के महामारी और संक्रामक बीमारियों के विभाग प्रमुख पद से रिटायर हो गए।

पुण्य सलिला श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश से आने वालीं आईएएस अधिकारी पुण्य सलिला श्रीवास्तव दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से फीजिक्स में बीएससी और एमएससी हैं। मई 2018 में पहली बार गृह मंत्रालय ने जब नारी सुरक्षा का अलग से विभाग बनाया तो इसकी जिम्मेदारी सलिला श्रीवास्तव को सौंपी गई। सलिला श्रीवास्तव 1993 बैच की अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम ऐंड यूनियर टेरिटरीज काडर की आईएएस अधिकारी हैं। लॉकडाउन की घोषणा के बाद गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि के तौर पर वो प्रेस वार्ता में आती थीं। अब वो मुश्किल से ही किसी प्रेस वार्ता में दिखती हैं। कहा जा रहा है कि एनलॉक शुरू होने के बाद गृह मंत्रालय के कहने के लिए लिए ज्यादा कुछ नहीं है तो इसलिए वो कम दिखती हैं।

एक्सपर्ट ने ली अधिकारियों की जगह, फिर अधिकारियों की वापसी
मई के बाद, मीडिया ब्रीफिंग में अधिकारियों की जगह विशेषज्ञों ने ले ली। इसमें डॉ बलराम भार्गव, एम्स के डॉ रणदीप गुलेरिया और कोरोना वायरस के संबंध में सरकार की ओर से गठित दूसरे सशक्त समूहों के कुछ विशेषज्ञ दिखने लगे। ये चेहरे भी बदल गए। आजकल वरिष्ठ नौकरशाह राजेश भूषण मीडिया ब्रीफिंग कर रहे हैं। वौ आमतौर पर कोरोना केस बताने के साथ रिकवरी रेट पर ज्यादा जोर देते हैं।












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