Bahadur Shah Zafar: किस हाल में रह रहे मुगल सम्राट के आखिरी वंशज? जानिए हर महीने कितनी मिलती है पेंशन
Bahadur Shah Zafar: मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र को लेकर देश में इस वक्त विवाद छिड़ा हुआ है। इस विवाद ने महाराष्ट्र के नागपुर में हिंसा का भी रूप ले लिया था। लेकिन, आज हम आपको मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र (Bahadur Shah Zafar) के आखिरी बचे वंशज के बारे में बताने जा रहे है।
भारत के मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र (Bahadur Shah Zafar) के वंशज किस हाल में रह रहे है और उन्हें महीने में कितनी पेंशन मिलती है। आइए चलिए जानते है मुगल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के आखिरी बचे वंशज के बारे में...

छोटी सी झोपड़ी में रहती हैं परपोती
बहादुर शाह ज़फ़र (Bahadur Shah Zafar) भारत के आखिरी मुगल शासक थे। उनकी परपोती 60 वर्षीय सुल्ताना बेगम अब कोलकाता के बाहरी इलाके में बनी एक छोटी सी और टूटी झोपड़ी में रहती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुल्ताना बेगम की पैदाइश तो लखनऊ की है, लेकिन उनकी परवरिश कोलकाता में हुई।
मोहम्मद मिर्जा बेदार से हुई थी शादी
सुल्ताना बेगम की शादी बहादुर शाह जफर के परपोते प्रिंस मोहम्मद मिर्जा बेदार बख्त से हुई थी। सुल्ताना बेगम अब कोलकाता के हावड़ा में अपने परिवार के साथ किसी तरह गुजारा कर रही हैं। उनके पास कोई संपत्ति नहीं है। कपड़े धोने के लिए सार्वजनिक नल का प्रयोग करती हैं। इतना ही नहीं, उन्हें सार्वजनिक रसोई में पड़ोसियों के साथ खाना भी बनाना पड़ता है।
प्रिंस मिर्जा की 1980 में हो गई थी मृत्यु
बहादुर शाह ज़फ़र के परपोते प्रिंस मिर्जा बेदार बख्त की साल 1980 में मृत्यु हो गई थी। प्रिंस मिर्जा की मृत्यु के बाद से सुल्तान बेगम को मात्र 6,000 रुपए प्रति माह की पेंशन पर अपना गुजारा कर रही हैं। बता दें कि साल 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बहादुर शाह जफर के वंशजों के लिए 250 रुपए की मासिक पेंशन तय की थी।
लेकिन, समय के साथ-साथ सरकारें बदलती गईं और इसी के साथ उनकी पेंशन में भी मामूली बढ़ोतरी होती रही। हालांकि, सुल्ताना बेगम ने पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से मुलाकात के दौरान 10,000 रुपए महीना पेंशन करने की मांग की थी। हालांकि, उनकी इस मांग पर क्या निर्णय हुआ, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
रंगून में हुआ था प्रिंस मिर्जा का जन्म
सुल्तान की मानें तो उनके पति प्रिंस मिर्जा मोहम्मद बेदार बख्त का जन्म साल 1920 में रंगून में हुआ था। उस वक्त अंग्रेजों ने उन्हें वहां रहने के लिए घर और नौकर-चाकर दिए थे। कहा था कि वे रंगून के बाहन न जाए। बताया कि बेदार को फूल की टोकरी में छिपाकर भारत लाया था।
ढाई हजार जाता है किराया
सुल्ताना ने बताया कि पेंशन के 6 हजार रुपयों से ढाई हजार किराया चला जाता है। बाकी जो पैसा बचता है उसमें से क्या खाएंगे और कैसे रहेंगे समझा जा सकता है। मैंने बुक बाइडिंग, चूड़ियां बनाने और धागे का काम कर अपनी जरूरतों को पूरा किया है।
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