Nagpur Row: नागपुर में दफन ही नहीं 'औरंगजेब', जानिए कहां है मुगल शासक की कब्र?
Nagpur Row: महाराष्ट्र के नागपुर में औरंगजेब की कब्र को लेकर जिस तरह की हिंसा हुई है, उसके बाद से पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि 'जो लोग इसके जिम्मेदार हैं, उन्हें सजा जरूर मिलकर रहेगी, दोषी किसी भी सूरत में छोड़े नहीं जाएंगे।'
बतौर सीएम विहिप और बजरंगदल के कुछ लोगों ने घास-फूस की औरंगजेब की नकली कब्र बनाकर उसे जलाने की कोशिश की और उसके बाद उसे कपड़े से ढ़क दिया।

तभी किसी ने अफवाह फैला दी कि जो कपड़ा उस कब्र पर पड़ा है उसपर कुरान की आयतें लिखी हैं, जिसके बाद हिंसा भड़क गई और उसने रौद्र रूप धारण किया गया। सीएम ने कहा कि 'विहिप और बजरंगदल के लोगों पर भी केस दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।'
खैर इसी बीच जानते हैं कि आखिर औरंगजेब था कौन? उसकी असल में कब्र है कहां और क्यों वो क्रूर शासक कहा जाता था?
आपको बता दें कि औरंगजेब का असली नाम मुहिउद्दीन मोहम्मद था,जिसे मुस्लिम कौम ने औरंगजेब नाम दिया था। उसने (1618-1707) तक शासन किया। ओरंगजेब का अर्थ होता है 'विश्व विजेता।'
'शाहजहां और मुमताज़ महल की छठी संतान' (Nagpur Row)
वो मुगल सल्तनत का अकबर के बाद सबसे अधिक समय तक भारत पर शासन करने वाला राजा था। वो ठा मुग़ल शासक भी था। वो शाहजहां और मुमताज़ महल की छठी संतान था।
साल 1658 में उस अपने पिता शाहजहां को ही बंद बना लिया था और सत्ता पर कब्जा किया था। वो कट्टर मुस्लिम था और इसी वजह से उसने जज़िया कर (गैर-मुसलमानों पर टैक्स) को फिर से लागू किया, जिसे कि अकबर ने बंद कर दिया था।
मुगल वंश का छठां शासक जिसने भारत पर राज किया(Nagpur Row)
यही नहीं उसने इस्लामी शरीयत कानून लागू किया, जिसके तहत सभी विनोद प्रिय कार्यक्रम पर बैन लग गया था। उसने लाखों हिंदुओं को जबरन मुसलमान बनने पर विवश किया था इसलिए वो मुगल वंश का ऐसा शासक कहलाया जिसे कि कभी भी मन से स्वीकारा नहीं गया।
उसने सिर्फ जनता के साथ ऐसा नहीं किया बल्कि उसने अपने परिवार पर भी जुल्म किए थे। पिता को बंदी बनाने के बाद उसने अपने भाईयों दाराशिकोह और मुराद को भी मरवाया था। वो पूरे भारत पर छत्र राज चाहता था और इसी वजह से उसने मराठा और राजपूतों के खिलाफ काफी युद्ध लड़े थे।
खुल्दाबाद में है औरंगजेब की कब्र (Nagpur Row)
उसने कई मंदिर भी ध्वस्त किए थे,जिसमें काशी विश्वनाथ और सोमनाथ मंदिर का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। 1707 में उसने दुनिया से विदाई ली था लेकिन उसकी कब्र महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित खुल्दाबाद में है क्योंकि उसकी अंतिम ख्वाहिश यही थी कि उसे यहीं पर दफन किया जाए। आपको बता दें कि औरंगाबाद को अब संभाजीनगर कहते हैं।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।












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