Lancet India task force:क्या देश में पूर्ण लॉकडाउन लगाना चाहिए ? कोरोना रोकने के लिए मिला ये सुझाव
नई दिल्ली, 3 मई: लैंसेट इंडिया टास्क फोर्स ने देश में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए केंद्र को कई तरह के सुझाव दिए हैं। पैनल ने कोविड की रोकथाम के लिए कई तरह की रणनीति अपनाने को कहा है, जिसमें प्रतिदिन के संक्रमण की रफ्तार, उसमें इजाफे, टेस्ट पॉजिटिविटी रेट के साथ ही प्रतिदिन की जाने वाली टेस्टिंग और आईसीयू बेड के उचित इस्तेमाल जैसे सुझाव भी शामिल हैं। इसके साथ ही पैनल ने यह भी कहा है कि हर कदम आर्थिक प्रभावों को ध्यान में रखकर और समाज के सभी स्टेकहोल्डर्स से विचार करने के बाद ही उठाए जाने चाहिए। कुल मिलाकर पैनेल ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जो इलाके सबसे ज्यादा संक्रमण की जोखिम हैं, उनकी सुरक्षा पर पूरा फोकस करना होगा। लेकिन, साथ ही साथ सबकुछ बंद करने पर उसकी वजह से जिन लोगों को आर्थिक तौर पर भुगतना पड़ेगा उनको भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पूर्ण लॉकडाउन ? टास्क फोर्स ने कहा नहीं
लैंसेट इंडिया टास्क फोर्स ने जो सुझाव दिए हैं उसमें संपूर्ण लॉकडाउन की बात नहीं है। बल्कि, इसमें कई तरह के कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। पैनल के मुताबिक 'असल में उठाए जाने वाले कदम स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर अलग हो सकते हैं। जिस इलाके में तेजी से संक्रमण फैल रहा है, वहां कम समय के लिए लेकिन सख्त पाबंदियों की आवश्यकता है, लेकिन जहां पर संक्रमण कम है, वहां उसी के हिसाब रोकथाम के उपाय होने चाहिए।' पैनल ने साफ कहा है कि कई लोग पूर्ण लॉकडाउन की वकालत कर रहे हैं, लेकिन यह विकल्प नहीं है। इसलिए देश को अलग-अलग जोन में विभाजित करना चाहिए।

कम जोखिम वाले इलाके
पैनल ने उन इलाकों को कम जोखिम वाले जोन में रखने का सुझाव दिया है, जहां नए संक्रमण के मामले 2 फीसदी से कम हैं और उस हिसाब से आईसीयू बेड की उपलब्धता 80 फीसदी से ज्यादा है। यहां बिना रोक-टोक आवाजाही, स्कूल-कॉलेज, दुकानें, रेस्टोरेंट, दफ्तर, पूजा स्थल और फैक्ट्रियों को 50 फीसदी की क्षमता के साथ खोलने की इजाजत दी जा सकती है। लेकिन, इस जोन में भी केस बढ़ने की स्थिति के लिए तैयारी रखनी होगी और वैक्सिनेशन का काम तेजी से होता रहेगा। यही नहीं 50 फीसदी क्षमता के साथ सामान्य गतिविधियों को भी तब अनुमति मिलेगी जब लोग दो मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करें।

मध्यम जोखिम वाले इलाके
मध्यम जोखिम वाले इलाकों में उन्हें रखने की सलाह दी गई है, जहां नए संक्रमण के मामले 2 से 5 फीसदी के बीच हैं, टेस्ट पॉजिटिविटी रेशियो (टीपीआर) 5 से 10 फीसदी के बीच है और 40 से 80 फीसदी तक ही आईसीयू बेड का इस्तेमाल हो रहा है। इन इलाकों में एडवाइजरी के साथ बिना रुकावट आवाजाही की इजाजत दी जा सकती है। यहां स्कूल तो खोले जा सकते हैं, लेकिन इंडोर स्थान बंद रहने चाहिए (स्थानीय स्तर पर सलाह के बाद)। बाकी आवश्यक आवश्यकताओं और गरीबों की सहायता वाले काम जारी रखे जा सकते हैं।

कोविड हॉटस्पॉट
लेकिन, जहां नए संक्रमण 5 फीसदी से भी ज्यादा रफ्तार से बढ़ रहे हैं और टेस्ट पॉजिटिविटी रेशियो भी 10 फीसदी से ज्यादा है वो हॉटस्पॉट होंगे। अगर यहां आईसीयू बेड का इस्तेमाल 40 फीसदी से कम भी है तो भी यहां आवाजाही पर कुछ हद तक नियंत्रण होनी चाहिए। जब तक ये इलाके मध्यम जोखिम में नहीं आते स्कूल-कॉलेज यहां बंद ही रहने चाहिए। दुकानें, रेस्टोरेंट, दफ्तर, पूजा स्थल, फैक्ट्रियों को भी कम से कम 6 से 10 हफ्तों के लिए बंद कर दिया जाना चाहिए। आवश्यक सुरक्षा उपायों के साथ जरूरी सेवाओं को अनुमति दी जानी चाहिए। पैनल ने इन इलाकों में लक्षण वाले सभी मरीजों, उनके परिवार वालों और संपर्क में आए लोगों का आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने को कहा है। नए क्लस्टर का पता लगाने के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट की जानी चाहिए। टेस्टिंग का यह अनुमात 70:30 होना चाहिए और मांग के साथ जांच की क्षमता में इजाफा करने का इंतजाम होना चाहिए।

स्वास्थ्य सेवाओं का पुख्ता बंदोबस्त
पैनल ने जिंदगी बचाने को प्राथमिकता देने के मद्देनजर और मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं की हालत देखने के बाद कम और मध्यम जोखिम वाले इलाकों में मेडिकल जरूरतें, स्टाफ, इंटर्न और बाकी बैकअप अभी से तैयार रखने को कहा है, ताकि भविष्य में स्थिति बिगड़ने पर पहले से तैयारी पूरी रहे। मध्यम जोखिम वाले इलाकों में पैनल ने कम से कम जिलास्तर पर ऑक्सीजन जेनरेटिंग प्लांट तैयार करने को कहा और जिसे फायर सेफ्टी प्रोटोकॉल की तर्ज पर किसी भी आपात स्थिति में कभी भी सक्रिय किया जा सकता है। हॉटस्पॉट इलाकों में अस्पतालों में ओपीडी निलंबित रखने का सुझाव दिया गया है,ताकि डॉक्टर और बाकी मेडिकल स्टाफ पर दबाव को कम किया जा सके।

10 से ज्यादा लोगों की भीड़ पर पाबंदी
इसमें सबसे अहम बात ये है कि पैनल ने हॉटस्पॉट वाले इलाकों में 10 से ज्यादा लोगों की भीड़ जुटने पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने को कहा है; और ऐसे सभी स्थान को बंद करने को कहा है, जहां ऐसी भीड़ जुटने की संभावना रहती है। यहां जरूरी सेवाओं को छोड़कर सभी इंडोर स्थान बंद रखने का सुझाव दिया गया है। यहां बंद और खुले स्थानों पर मास्क पहनने की अनिवार्यता और बंद जगहों पर क्रॉस वेंटिलेशन पर ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और आइसोलेशन से लेकर क्वारंटाइन तक में स्थानीय लोगों की सहभागिता पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा लगातार उन स्थानों का पता लगाते रहने को कहा गया है, जहां मामले बढ़ने का खतरा ज्यादा है। जीनोम सीक्वेंसिंग को भी मासिक आधार पर 5 फीसदी तक ले जाने को कहा गया है।

घरेलू यात्रा पर न लगे पाबंदी
खास बात ये है कि पैनल ने घरेलू यात्राओं, खासकर बसों और ट्रेनों से आवाजाही पर रोक नहीं लगाने की सिफारिश की है, जो कि मुख्य रूप से गरीबों के प्रमुख यातायात के साधन हैं। इसने बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट पर कम जोखिम वाली जगहों पर तत्काल जांच के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट की व्यवस्था करने का सुझाव दिया है। सबसे बड़ी बात कि लैंसेट इंडिया टास्क फोर्स ने एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के लिए निगेटिव आरटी-पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट की कुछ राज्यों की मांग से भी असहमति जताई है।
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