UP Election 2027: मुफ्त राशन के बाद क्या VB-G RAM G लगाएगा BJP का बेड़ा पार? अखिलेश क्या निकालेंगे इसका काट
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में साल 2027 के शुरुआती महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election 2027) का बिगुल बजने में अब कुछ ही महीनों का समय बचा है। इस बीच, केंद्र सरकार ने आज यानी 1 जुलाई 2026 से पूरे देश मेंपुरानी मनरेगा (MGNREGA) की जगह नया 'VB-G RAM G' कानून लागू कर दिया गया है।
जिसे उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों के लिहाज से 'मास्टर स्ट्रोक' माना जा रहा है। इसके तहत ग्रामीण मजदूरों को अब साल में 100 के बदले 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी और न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ाकर ₹300 प्रतिदिन फिक्स कर दी गई है।

अब उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में यह सबसे बड़ा सवाल ये है कि- क्या साल 2022 के यूपी चुनाव में 'फ्री राशन' की तरह, 2027 के चुनाव में 'वीबी-जी राम जी' कानून भाजपा की चुनावी नैया को पार लगाएगा? और इस नए चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए सपा क्या काट निकालने जा रही है...
2022 में 'फ्री राशन' का जलवा: भाजपा की जीत का मजबूत बुनियाद
पहले थोड़ा पीछे मुड़कर देखते हैं कि साल 2022 में कोरोना संकट के बाद जब उत्तर प्रदेश में चुनाव हुए। विपक्ष को लग रहा था कि बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर सरकार घिर जाएगी। लेकिन भाजपा ने 'मुफ्त राशन योजना' (प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना) को आगे कर पूरा पासा ही पलट दिया।
करोना में दिल्ली-मुंबई से घर लौट चुके परिवारों के लिए मुफ्त गेहूं, चावल, तेल, नमक और दालों ने सीधे सूबे के करीब 15 करोड़ 'लाभार्थियों' के दिल को छुआ। इसके साथ ही एक नया 'साइलेंट वोटर बैंक' विशेषकर महिला वोटर तैयार हुआ, जिसने खुल कर BJP को वोट दिया। नतीजा यह हुआ कि योगी सरकार ने प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में वापसी की।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि ग्रामिण क्षेत्रों में BJP का वोट बैंक कमजोर हुआ है खास तौर पर पूर्वांचल के जिलों में। हाल के 2024 के लोकसभा चुनावों में, उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बीजेपी के वोट शेयर और सीटों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। पार्टी को SP और कांग्रेस के गठबंधन से कड़ी टक्कर मिली थी।
UP Election 2027 में क्यों 'VB-G RAM G' बन सकता है भाजपा का नया 'गेम चेंजर'?
2022 में जो काम मुफ्त राशन ने किया था, 2027 के चुनाव में वही काम 'वीबी-जी राम जी' एक्ट कर सकता है। उत्तर प्रदेश ग्रामीण आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य है, और यहां करोड़ों परिवार सीधे तौर पर ग्रामीण मजदूरी पर निर्भर हैं। भाजपा इस कानून के जरिए सीधे गांव-गांव के गरीब वोटरों को साधने की तैयारी में है:
जेब में सीधा पैसा : यूपी में पहले मनरेगा के तहत बहुत कम मजदूरी मिलती थी (जो करीब ₹230-₹240 के आसपास हुआ करती थी)। अब नए कानून के तहत कम से कम ₹300 रोज मिलना तय हो गया है। यानी सीधे तौर पर गरीब मजदूर की दैनिक आय में बंपर बढ़ोतरी की गई है।
25 दिन का अतिरिक्त काम: 100 दिन की जगह अब साल में 125 दिन का पक्का काम मिलेगा। इसका मतलब है कि चुनाव से ठीक पहले ग्रामीण परिवारों को साल में लगभग एक महीना ज्यादा रोजगार और ज्यादा पैसा मिलेगा। इस योजना में जियो-टैगिंग, जीपीएस और फेस-ऑथेंटिकेशन जैसी तकनीकों को अनिवार्य किया गया है, जिससे प्रधानों और बिचौलियों की धांधली रुकेगी।
अगर काम के आवेदन के 15 दिनों में रोजगार नहीं मिला, तो बैठे-बैठे बेरोजगारी भत्ता मिलेगा और मजदूरी मिलने में देरी हुई, तो मुआवजा भी मिलेगा। यह बातें ग्रामीण जनता को सीधा आकर्षित करती हैं।
अखिलेश इसका क्या काट निकालेंगे?
जाहिर है कि विपक्ष इस बड़े दांव से हैरान जरूर है, लेकिन वह हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है। इस नए कानून की काट के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की 'Counter-Strategy' हैं, इन तीन बिंदुओं पर टिक सकती है-
1. "राशन और मजदूरी नहीं, पक्की सरकारी नौकरी चाहिए"
विपक्ष का सबसे बड़ा हथियार उत्तर प्रदेश के युवाओं की बेरोजगारी और 'पेपर लीक' का मुद्दा है। सपा जनता के बीच यह नैरेटिव सेट कर रही है कि सरकार पांच किलो मुफ्त राशन और ₹300 की दिहाड़ी (मजदूरी) देकर युवाओं को उलझाए रखना चाहती है, जबकि असलियत में वह सरकारी विभागों की पक्की नौकरियां और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं कर पा रही है।
2. 'राज्यों पर आर्थिक बोझ' का मुद्दा
विपक्ष इस कानून के तकनीकी पहलुओं को उठाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। 'वीबी-जी राम जी' कानून में राज्यों की हिस्सेदारी को लेकर विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार सारा श्रेय खुद लेना चाहती है, लेकिन इसका आर्थिक बोझ उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार की तिजोरी पर डाल रही है, जिससे राज्यों के पास दूसरे विकास कार्यों के लिए बजट कम हो जाएगा।
3. 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का सोशल इंजीनियरिंग कार्ड
अखिलेश यादव का 'PDA' फॉर्मूला लोकसभा चुनाव में बेहद सफल रहा है। विपक्ष का मानना है कि चाहे सरकार कितनी भी योजनाएं ले आए, जमीन पर जातीय गोलबंदी और आरक्षण का मुद्दा सबसे बड़ा है। विपक्ष ग्रामीण इलाकों में जाकर यह संदेश फैलाएगा कि सरकार यह सब केवल चुनाव जीतने के लिए कर रही है, जबकि दलितों और पिछड़ों के आरक्षण और अधिकारों के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
UP Election 2027 में बीजेपी का बेड़ा पार होगा या फंसेगी नैया?
VB-G RAM G Act उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, ठीक वैसे ही जैसे 2022 में मुफ्त राशन योजना चर्चा के केंद्र में रही थी। दूसरी ओर, विपक्ष इस योजना के क्रियान्वयन, रोजगार, महंगाई और अन्य जनसरोकार के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।
अभी यह कहना संभव नहीं है कि यह योजना किसी एक दल के लिए चुनावी जीत सुनिश्चित करेगी, लेकिन इतना तय है कि 2027 के चुनाव में VB-G RAM G Act और लाभार्थी योजनाएं राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दों में शामिल रह सकती हैं।














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