जहर पीकर गणेश बनकर लालटेन जलाने निकले लालू!
पटना। सच ही कहते हैं लोग कि राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता, कब यहां कोई किसी का दुशमन बन जाये और कब दुश्मन दोस्त हो जाये कहा नहीं जा सकता। जिसका ताजा उदाहरण है बिहार की राजनीति। साल 2010 के चुनाव में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन थे। लेकिन साल 2015 में दोनों एक-दूसरे के दोस्त बन गये हैं। साल 2010 के चुनाव प्रचार में लालू और उनकी पत्नी राबड़ी ने नीतीश कुमार को राक्षस तक कहा था तो आज लालू ने नीतीश को अपना मित्र और राज्य का हमदर्द कहा है।
कल थे दुश्मन और आज बन गये दोस्त
राजनीति की बिसात पर बैठे यह दोनों प्यादे ने आज साझा वार्ता में एक-दूसरे की तारीफों के पुल बांधे लेकिन आज भी लालू अपने आप को नीतीश से बीस ही साबित करने में जुटे दिखायी दिये। लालू ने कहा कि वो बिहार की राजनीति के गणेश हैं, इसलिए सब उन्हीं के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं, बिहार की राजनीति उन्हीं से शुरू होती है और उन्हीं पर खत्म होती है, इसलिए जिस तरह बिना गणपति की स्तुति किये बिना पूजा शुरू नहीं होती उसी तरह बिना उनके बिहार की राजनीति का चैप्टर नहीं खुलता।
सत्ता जो ना कराये वो कम ही है
लालू की इस टिप्पणी के बाद राजनीति सलाहकारों का कहना है कि पीएम मोदी और भाजपा को हराने के लिए एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव आज एक ही थाली में एक-दूसरे के साथ निवाले तोड़ रहे हैं। खुद को गणपति बताने वाले लालू शायद नीतीश कुमार को कार्तिक भगवान समझ रहे हैं जिनकी मेहनत पर वो खुद सुख भोगेंगे लेकिन उनकी मनोकामना पूर्ण होती है कि नहीं यह तो जनता तय करेगी लेकिन बिहार में बदली फिजाओं में लगता नहीं कि लालू की बुझी लालटेन इस बार जल पायेगी।
आईये आपको स्लाइडों के जरिये बताते हैं कि जिस नीतीश कुमार को लालू ने साल 2010 में क्या कहा था?

बदल गये बोल
-साल 2010:बिहार को नीतीश कुमार बर्बाद कर देंगे वोतो कूड़ा हैं जो कि गंदगी फैलाता है।
-साल 2015: बिहार ने नीतीश कुमार की छत्र-छाया में तरक्की की है।

सत्ता के लिए कुछ भी करेगा
-साल 2010: नीतीश कुमार नीच और राक्षस हैं: लालू-राबड़ी
-साल 2015: नीतीश कुमार आशावादी हैं जिनके लिए बिहार ही सबकुछ है: लालू प्रसाद यादव

दुश्मन मिले गले!
-साल 2010: नीतीश कुमार से हमारा कोई लेना-देना नहीं क्योंकि हम बच्चों से बात नहीं करते: लालू
-साल 2015: भले ही हमारे बीच हजारों मतभेद हो लेकिन हमारे बीच में मनभेद नहीं है इसलिए हम बिहार की जनता के लिए एक हुए हैं: नीतीश कुमार

कल बेदर्द आज हमदर्द
-साल 2010: बिहार मतलब लालू यादव, कोई नीतीश-वितीश बिहार से लालू को नहीं निकाल सकता क्योंकि क्या कभी समोसे से आलू निकला है।
-साल 2015: नीतीश कुमार और हमारा मिलन केवल सांप्रदायिक ताकतों को देश में रोकना है, हम दोनों मिलकर देश को भगवाकरण होने से रोकेंगे।

समझौता भी दोस्ती भी!
-साल 2010: लालू का काम बोलता है और लालू कभी भी बिहार के लिए कोई समझौता नहीं करेगा, यह राज्य की जनता से वादा है।
-साल 2015: नीतीश कुमार ही सीएम का चेहरा होंगे क्योंकि राज्यहित के लिए मैं जहर का घूंट भी पी सकता हूं।












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