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लालू पर जेल मैनुअल तोड़ने का आरोप, कैसे आएंगे चुनाव तक जेल से बाहर?

सजायाफ्ता लालू यादव के फोन पर बात करने और अस्पताल वार्ड में दरबार सजाने की तस्वीर सार्वजनिक होने के बाद उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। जब से झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार बनी है, लालू पर जेल मैनुअल की धजिज्यां उड़ाने का आरोप लगता रहा है। भाजपा ने लालू की वायरल तस्वीर को इसका प्रमाण बताया है। लालू यादव ने हाल ही में चारा घोटला के चाईबासा कोषागार अवैध निकासी मामले में जमानत के लिए झारखंड हाईकोर्ट में अर्जी डाली है। जमानत याचिका में लालू ने कहा है कि सीबीआइ स्पेशल कोर्ट से इस मामले में जो सजा मिली है उसकी आधी अवधि वे जेल में काट चुके हैं। हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट किसी मामले में आधी सजा काट चुके दोषियों को जमानत देता रहा है। लालू यादव ने इसी आधार पर जमानत की दरख्वास्त की है। इसी उम्मीद पर तेजस्वी और राजद नेता लालू के अक्टूबर तक जेल से बाहर आने की बात कर रहे हैं। लेकिन इस तस्वीर के सार्वजनिक होने के बाद लालू यादव पर न केवल जेल कानून तोड़ने बल्कि जेल से ही राजनीति चलाने का आरोप लग रहा है। सीबीआई कोर्ट में इस तस्वीर के आधार पर लालू की जमानत का विरोध कर सकती है। ऐसे में बिहार चुनाव को लेकर लालू के बाहर आने की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। झारखंड भाजपा ने इस मामले को तूल देने में कोई कमी नहीं रखी है।

लालू की तस्वीर पर बवाल

लालू की तस्वीर पर बवाल

चारा घोटला में सजायाफ्ता लालू यादव अभी रिम्स के पेईंग वार्ड में इलाजरत हैं। उनकी एक तस्वीर सार्वजनिक हुई है। ये तस्वीर भाजपा ने जारी की है। इस तस्वीर में लालू यादव कुर्सी पर बैठे हैं और मोबाइल से बात करते हुए दिख रहे हैं। उनके पास झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और कांग्रेस के प्रवक्ता शमशेर आलम बैठे हुए हैं। जेल में मोबाइल से बात करना गैरकानूनी है। अस्पताल के इस वार्ड को जेल का दर्जा दिया गया है। झारखंड भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा है कि सजायाफ्ता लालू का दरबार सजाना जेल नियमावली का खुलेआम उल्लंघन है। उन्होंने आरोप लगाया है कि लालू यादव को जेल में तमाम सुविधाएं मुहैया करायी जा रही हैं। वे कोरोना संकट के समय भी लोगों से मिल रहे हैं। प्रतुल शाहदेव ने इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि चूंकि हेमंत सरकार राजद के सहयोग से चल रही है इसलिए प्रदेश सरकार से इस मामले में किसी एक्शन की आशा नहीं की जा सकती।

तब और अब में फर्क

तब और अब में फर्क

जब झारखंड में भाजपा की सरकार थी तब जेल मैन्युल का कड़ाई से पालन होता था। सप्ताह में एक दिन केवल शनिवार को तीन लोग ही लालू से मिल सकते थे। लेकिन चुनाव के बाद जैसे ही हेमंत सोरेन की सरकार बननी तय हुई, उसी समय नाजारा बदल गया। दिसम्बर 2019 के आखिर में हेमंत सरकार के गठन की प्रकिया अभी चल ही रही थी कि रिम्स के पेईंग पार्ड में लालू से मिलने वालों का तांता लग गया। जेल मैनुअल की ऐसी-तैसी करते हुए नेता लालू से मिलते रहे। मिलने का दिन शनिवार निर्धारित था लेकिन नेतागण गुरुवार को ही आ धमके। लालू वहां राजनीतिक दरबार सजाते रहे। सबसे पहले हेमंत सोरेन लालू से मिलने पहुंचे थे। इसके बाद अन्य नेता बेधड़क आते रहे। वहां तैनात पुलिस वाले चुपचाप तमाशा देखते रहे। उन्होंने ये भी पूछना भी मुनासिब नहीं समझा कि किसके आदेश से वे मिलने आ रहे हैं। मिलने वालों का नाम तक रजिस्ट में नहीं लिखा गया। इसके बाद कई बार लालू पर जेल मैनुअल तोड़ने का आरोप लगा है।

लालू कब आएंगे बाहर ?

लालू कब आएंगे बाहर ?

तेजस्वी और राजद के नेता लालू यादव को लेकर बिहार चुनाव में बहुत बड़ी उम्मीद लगाये बैठे हैं। हाल ही में तेजस्वी ने राजद कार्यकर्ताओं से लालू यादव के अक्टूबर तक जेल से बाहर आने की बात कही है। लालू यादव ने चाईबासा कोषागार अवैध निकासी मामले में आधी सजा काट लेने के आधार पर झारखंड हाईकोर्ट से जमानत की मांग की है। अगर इस मामले में लालू को जमानत मिल भी गयी तो दुमका कोषागार मामले में 7 साल सजा मिलने के कारण वे जेल से बाहर नहीं निकल सकते। इस मामले में उनकी सजा का आधी अवधि जनवरी 2021 में पूरी होती है। यानी उनके अक्टूबर में बाहर आने की कम ही संभावना है। दूसरी तरफ इस साल जनवरी में सीबीआइ ने लालू की जमानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। झारखंड हाईकोर्ट ने लालू को देवघर कोषागार मामले में जुलाई 2019 में जमानत दे दी थी। सीबीआइ ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सीबीआइ ने इस याचिका में कहा था, लालू यादव सेहत के मामले में अदालत को गुमराह करते रहे हैं। एक तरफ वो अपील करते हैं कि बीमार होने की वजह से जेल में नहीं रह सकते तो दूसरी वे खुद को ठीक बता कर 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने के लिए जमानत की मांग करते हैं। इस बीच अब लालू के दरबार लगाने वाली तस्वीर के सामने आने से उनकी कानूनी पेचिदगियां बढ़ गयी हैं।

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