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'पहले जश्न मनाया और अब..' Ladakh Protest पर उमर अब्दुल्ला का मोदी सरकार पर तंज, पूछा- कब तक इंतजार?

Ladakh protest News: लद्दाख में बुधवार, 24 सितंबर को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक घायल हुए।

गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस वाहनों और भाजपा दफ्तर में आग लगा दी। इस बीच जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने अपना प्रतिक्रिया दी है और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

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Ladakh Gen Z protest: उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि, "लद्दाख को तो राज्य का दर्जा देने का वादा भी नहीं किया गया था, उन्होंने 2019 में UT का दर्जा मिलने का जश्न मनाया था और अब वे खुद को ठगा और गुस्से में महसूस कर रहे हैं। अब सोचिए, हम जम्मू-कश्मीर के लोग कितने ज्यादा ठगा और निराश महसूस करते हैं, जिन्हें राज्य का दर्जा लौटाने का वादा किया गया था, जबकि हमने पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और जिम्मेदार तरीके से अपनी मांग रखी है।"

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के समय जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने का वादा किया गया था, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी यह अधूरा है।

महबूबा मुफ्ती का बयान

PDP अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी लेह में हिंसक प्रदर्शनों पर केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने X पर लिखा, "यह समय है जब भारत सरकार को ईमानदारी और गंभीरता से यह मूल्यांकन करना चाहिए कि 2019 के बाद से आखिर बदला क्या है। यह वीडियो कश्मीर घाटी का नहीं है, जिसे हमेशा अशांति का केंद्र माना जाता है, बल्कि लद्दाख का है, जहां लोगों ने पुलिस वाहनों और भाजपा दफ्तर में आग लगा दी है।"

मुफ्ती ने आगे कहा: "लेह, जो हमेशा शांतिपूर्ण और संयमित प्रदर्शनों के लिए जाना जाता था, अब हिंसक विरोध की ओर बढ़ रहा है। लोग ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, उनका धैर्य टूट रहा है। केंद्र सरकार को रोजमर्रा की संकट प्रबंधन की राजनीति छोड़कर, असंतोष की जड़ तक जाना होगा और पारदर्शिता के साथ समाधान निकालना होगा।"

आर्टिकल 370 और राज्य का दर्जा

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटा गया-

  • जम्मू-कश्मीर (UT)
  • लद्दाख (UT)

उस समय लद्दाख के लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया था। उनका कहना था कि कश्मीर-केंद्रित राजनीति में उनकी लगातार उपेक्षा हुई है। लेकिन अब, चार साल बाद, वही लोग राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में संवैधानिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

लेह जिला प्रशासन का आदेश

बढ़ते तनाव को देखते हुए लेह जिला मजिस्ट्रेट रोमिल सिंह डोंक ने आदेश जारी किया है कि बिना पूर्व लिखित अनुमति के कोई भी रैली, जुलूस या मार्च नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, "कोई भी व्यक्ति वाहन पर लगे लाउडस्पीकर या अन्य उपकरण का इस्तेमाल बिना अनुमति के नहीं करेगा। साथ ही, कोई भी ऐसा बयान नहीं देगा जिससे जिले में कानून-व्यवस्था बिगड़ने या शांति भंग होने की आशंका हो।"

सोनम वांगचुक की मांग

लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी केंद्र से जल्द वार्ता करने की अपील की है। उन्होंने कहा, "लोग बहुत गुस्से में हैं। उन्हें 16 दिन भूखा रखकर फिर बैठक की तारीख तय की गई है। लोग चाहते हैं कि केंद्र सरकार के साथ बैठक 6 अक्टूबर से पहले हो।"

लद्दाख में यह आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जहां एक ओर स्थानीय लोग राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग पर अड़े हैं, वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को जम्मू-कश्मीर की अधूरी राज्यhood बहाली से जोड़कर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन बढ़ते असंतोष और हिंसक प्रदर्शनों पर क्या ठोस कदम उठाती है।

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