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Ladakh Protest में Gen-Z की एंट्री? बीजेपी ने कांग्रेस पर लगाया हिंसा भड़काने का आरोप, क्या समाधान निकलेगा?

Ladakh Protest 2025: लद्दाख की राजधानी लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद हालात बिगड़ गए हैं। प्रशासन ने एहतियातन शहर के कई हिस्सों में कर्फ्यू लागू कर दिया है।

बुधवार, 24 सितंबर को हुए इस बड़े आंदोलन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भिड़ंत, पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। प्रदर्शन हिंसक होने के बाद बीजेपी नेताओं ने विपक्षी कांग्रेस पार्टी पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया। इस पर लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सोनम वांगचुक ने पलटवार किया।

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सोनम वांगचुक ने कहा कि कांग्रेस की यहां इतनी पकड़ नहीं है कि वह 5000 युवाओं को सड़कों पर उतार सके। यह गुस्सा लंबे समय से बढ़ रहा था, क्योंकि शांतिपूर्ण आंदोलनों से कोई नतीजा नहीं निकल रहा था। वांगचुक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि युवाओं की नाराजगी कई सालों से जमा हो रही है और अब वह विस्फोटक रूप ले चुकी है।

Ladakh Youth Protest पर बीजेपी नेताओं ने क्या कहा?

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया कि कांग्रेस के युवा नेता फुंतसोग स्टैनजिन त्सेपग, जो पार्टी से चुने गए वार्ड सदस्य हैं, ने इस आंदोलन को भड़काने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने X पर लिखा-"लद्दाख में @BJP4India कार्यालय में आग लगाई गई। @RahulGandhi जी, यह आग आपके GEN Z नेता फुंतसोग स्टैनजिन त्सेपग ने लगवाई है, जो कांग्रेस पार्टी के चुने हुए वार्ड सदस्य हैं। यह आग से खेलने का नतीजा है। बीजेपी कार्यकर्ताओं को चुनौती देना बंद कीजिए।"

इसी तरह, बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी कांग्रेस को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा-"लद्दाख में दंगे कर रहे शख्स का नाम फुंतसोग स्टैनजिन त्सेपग है। वह कांग्रेस के अपर लेह वार्ड के पार्षद हैं। उन्हें साफ तौर पर भीड़ को भड़काते और हिंसा में हिस्सा लेते देखा जा सकता है। यह वही हिंसा है जिसमें बीजेपी कार्यालय और हिल काउंसिल को निशाना बनाया गया। क्या यही वह अशांति है जिसका राहुल गांधी सपना देख रहे हैं?"

प्रशासन ने हालात पर रखा नजर

प्रशासन ने हालात पर काबू पाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है और लेह के कई इलाकों में धारा 144 और कर्फ्यू लागू किया गया है। किसी भी तरह की रैली, जुलूस या मार्च को बिना प्रशासनिक अनुमति के प्रतिबंधित कर दिया गया है। लद्दाख में यह आंदोलन लगातार जोर पकड़ रहा है। युवाओं और छात्रों के साथ-साथ लद्दाख अपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) इसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मांगें साफ हैं-

  • लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले।
  • लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए।
  • अलग लोक सेवा आयोग की स्थापना हो।
  • संसद में दो सीटों का प्रतिनिधित्व मिले।

लेह में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक ओर युवाओं का गुस्सा शांत नहीं हो रहा, वहीं दूसरी ओर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार लद्दाख के आंदोलनकारियों से संवाद कब और कैसे करती है।

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