VIDEO:अब पैंगोंग झील में मिनटों में कहीं भी पहुंचेगी भारतीय सेना, गश्त के लिए मिली खास Boat देखिए

नई दिल्ली, 16 अगस्त: चीन पिछले दो साल से खासतौर पर लद्दाख में चालबाजियां कर रहा है। कभी कहीं मोर्चा खोल देता है तो कभी कहीं। पैंगोंग झील पर तो उसकी गिद्ध दृष्टि हमेशा से चिंता की वजह रही है। यहां के लिए भारतीय सेना को अब एक ऐसी बोट सौंपी गई है, जिससे कुछ ही समय में कहीं से कहीं जाया जा सकता है। यह सामान्य गश्त के लिए आईटीबीपी के भी काम आ सकती है और खास परिस्थितियों में भारतीय सेना के लिए तो है ही। इसके अलावा भी रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना को मंगलवार को कई उपकरण, हथियार और सैन्य वाहन सौंपे हैं, जो आने वाले दिनों में विशेष रूप से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर खास भूमिका निभा सकते हैं।

लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट से होगी पैंगोंग झील में गश्त

लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट से होगी पैंगोंग झील में गश्त

लद्दाख की पैंगोंग झील पर चीन की बुरी नजर लगी रहती है। हाल के दिनों में उसके अपने इलाके (तिब्बत के क्षेत्र) में पुल बनाए जाने की खबरें भी आई हैं। वह लद्दाख में लगातार अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है, ताकि नॉर्थ बैंक और साउथ बैंक की दूरी को वह पूरी तरह से मिटा सके। उसने पैंगोंग लेक के अपने कब्जे वाले इलाके में अत्याधुनिक बोट भी उतार रखे हैं। गौरतलब है कि 2020 के विवाद वाले दिनों में पैंगोंग झील के पास वाली पहाड़ियां चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के लिए कमजोर कड़ी साबित हुई थी और वहां भारतीय सेना ने पीएलए को बुरी तरह से मात दिया था। लेकिन, पैंगोंग झील पर दुश्मनों की हरकतों पर नजर रखने के लिए भारत को हमेशा से ऐसी बोट की आवश्यकता थी, जिससे चीन की नकेल कसी जा सके। भारतीय सेना ने मंगलवार को इस लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट की क्षमता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने प्रदर्शित किया है।

एकबार में 35 जवानों को ले जाने में सक्षम

एकबार में 35 जवानों को ले जाने में सक्षम

लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट बोट की खासियत यह है कि वह एकबार में सेना के 35 कॉम्बैट ट्रूप्स को किसी भी वक्त बहुत ही कम समय में झील के किसी भी इलाके में पहुंचा सकती है। खासकर पिछले दो वर्षों से ज्यादा समय से पैंगोंग इलाके में भारतीय सेना को इस तरह की बोट की बहुत ही ज्यादा कमी महसूस हो रही थी। इन बोटों को भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर मेंटेन कर रही है। इन्हें मंगलवार को ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना को सौंपा है।

इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और ड्रोन सिस्टम भी सौंपे गए

इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और ड्रोन सिस्टम भी सौंपे गए

सबसे खास बात ये है कि पैंगोंग किनारे बोट तक पहुंचाने के लिए भारत में ही बनी इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल भी रक्षा मंत्री ने इसी के साथ सेना के हवाले किए हैं, जिनकी तैनाती फॉर्वर्ड इलाकों में होनी है। इसके अलावा भारतीय सेना को देश में ही निर्मित ड्रोन सिस्टम भी सौंपी गई है, जिसकी मदद से सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के इलाकों में दुश्मन की सेना पर नजर रख सकेंगे। सबसे खास बात ये है कि ये सारे वाहन लद्दाख के मुश्किल इलाकों की चुनौतियों को ध्यान में रखकर भी तैयार की गई हैं।

मेक इन इंडिया अभियान का कमाल

मेक इन इंडिया अभियान का कमाल

इससे पहले राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना को कई स्वदेश में निर्मित हथियार भी सौंपे हैं। इसमें एफ-इंसास सिस्टम (फ्यूचरिस्टिक इंफैंट्री सोल्जर एज ए सिस्टम) और एके-203 असॉल्ट राइफल भी शामिल है, जो भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल मनोज पांडे और लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह की मौजूदगी में दिए गए। इनके अलावा रक्षा मंत्री ने सेना को एंटी-पर्सनल माइन निपुण भी सौंपा। भारतीय सेना को ऐसे 7 लाख माइंस उपलब्ध करवाए जाएंगे, जिसे भारतीय प्राइवेट सेक्टर की इंडस्ट्री में बनाया गया है। ये सारे हथियार, कॉम्बैट वाहन और ड्रोन सिस्टम मोदी सरकार की मेक इन इंडिया अभियान के तहत निर्मित किए गए हैं।

सियाचिन के लिए सोलर पावर प्रोजेक्ट भी सौंपे

सियाचिन के लिए सोलर पावर प्रोजेक्ट भी सौंपे

इसके अलावा रक्षा मंत्री ने मंगलवार को ही लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर के पास स्थित सेना के बेस प्रतापपुर के लिए 1 मेगावॉट का सोलर पावर प्रोजेक्ट भी सेना को सौंपा है। इस पावर प्लांट को इंजीनियरिंग कोर ने तैयार किया है, ताकि सेना की जरूरतें भी पूरी की जा सकें और डीजल पर से निर्भरता भी खत्म किया जा सके। इस तरह से मंगलवार को भारतीय सेना को जितने भी सैन्य उपकरण और सिस्टम सौंपे गए हैं, सब अपने देश में ही बने हुए हैं।

भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण- रक्षा मंत्री

पैंगोंग लेक में लैंडिंग क्राफ्ट असॉल्ट तैनात करने के साथ ही लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के इलाके में भारतीय सेना की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। सेना को इतने सारे उपकरण, वाहन और हथियार सौंपने के बाद रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट किया है, जिसमें लिखा है, 'भारतीय सेना को स्वदेश में विकसित उपकरण और सिस्टम सौंपे गए हैं। ये सिस्टम सेना की ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करेंगी और उन्हें भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सहायता करेंगी। यह भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता कौशल का एक बेहतरीन उदाहरण है।'

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