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प्रसिद्ध गणितज्ञ के शव को समय पर एंबुलेंस पर ना मिलने पर कुमार विश्वास भड़के, 'बिहार इतना पत्थर..."

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पटना: विख्यात गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का गुरुवार को बिहार की राजधानी पटना में 77 साल की उम्र में निधन हो गया। वो 40 साल से सिजोफ्रेनिया बीमारी से पीड़ित थे। उनका निधन पीएमसीएच पटना में हुआ। उनके निधन के बाद उनका शव एंबुलेंस के इंतजार में पड़ा रहा। उनके घर वालों को एंबुलेंस के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। इसे लेकर कुमार विश्वास ने बुधवार को बिहार सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इस घटना का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा कि उफ़्फ़, इतनी विराट प्रतिभा की ऐसी उपेक्षा? विश्व जिसकी मेधा का लोहा माना उसके प्रति उसी का बिहार इतना पत्थर हो गया?

कुमार विश्वास ने किया ट्वीट

कुमार विश्वास ने किया ट्वीट

कुमार विश्वास ने ट्वीट करके कहा कि , इतनी विराट प्रतिभा की ऐसी उपेक्षा? विश्व जिसकी मेधा का लोहा माना उसके प्रति उसी का बिहार इतना पत्थर हो गया? उन्होंने अपने ट्वीट में बिहार के सीएम नीतीश कुमार, बीजेपी नेता गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे और नित्यानंद राय को टैग करते हुए लिखा आप सबसे सवाल बनता हैं ! भारतमाँ क्यूँ सौंपे ऐसे मेधावी बेटे इस देश को जब हम उन्हें संभाल ही न सकें?

गुरुवार तड़के हुई तबीयत खराब

पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे वशिष्ठ नारायण सिंह की तबीयत गुरुवार तड़के खराब हो गई। इसके बाद उनके परिजन उन्हें लेकर तत्काल पटना मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (पीएमसीएच) पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उनके निधन पर पर दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि उनका निधन बिहार के लिए अपूर्णीय क्षति है। वे प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

विख्यात गणितज्ञ थे वशिष्ठ नारायण सिंह

विख्यात गणितज्ञ थे वशिष्ठ नारायण सिंह

गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह बिहार के भोजपुर के बंसतपुर के रहने वाले थे। वो बचपन से काफी कुशाग्र बुद्धि के थे। पटना साइंस कॉलेज में पढ़ते हुए उनकी मुलाकात अमेरिका से पटना आए प्रोफेसर कैली से हुई। साल 1963 में वो लीफोर्निया विश्वविद्यालय में शोध के लिए चले गए और 1969 में वहां से पीएचडी पूरी की। चक्रीय सदिश समष्टि सिद्घांत पर किए गए उनके शोध कार्य ने उन्हें भारत और विश्वभर में प्रसिद्ध कर दिया।

कहां कहां पढ़ाया

कहां कहां पढ़ाया

वशिष्ठ नारायण सिंह ने वॉशिंगटन में गणित के प्रोफेसर के पद पर काम किया। इसके बाद साल 1971 में वो भारत वापस लौट आए। यहां उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर और भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता में भी काम किया।

गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण का पार्थिव शरीर ले जाने को नहीं मिली एंबुलेंस, पीएमसीएच में घंटों पड़ा रहा शव

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English summary
kumar vishvas attacks bihar government after vashishtha narayan singh family waited for ambulance
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