‘9 साल 7 महीने से जेल में हूं', जमानत के लिए गिड़गिड़ाए कुलदीप सिंह सेंगर! सुप्रीम कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला?
kuldeep singh sengar Bail Supreme Court: उन्नाव रेप कांड से जुड़े एक और मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। सोमवार (09 फरवरी) सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि इस स्तर पर सजा निलंबन या जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में कुलदीप सिंह सेंगर के वकील गुजारिश करते हुए कहा, ''7 साल 7 महीने की सजा काट चुके हैं और छूट मिलाकर यह अवधि 9 साल 7 महीने हो जाती है, इसलिए ऐसे में जमानत मिलनी चाहिए।'' हालांकि कोर्ट ने साफ-साफ कहा है कि ऐसे ऐसे अपराधों में छूट की पात्रता बहस का विषय है।

हालांकि अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि सेंगर की अपील पर प्राथमिकता के साथ सुनवाई कर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए। यह मामला रेप पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत से जुड़ा है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राहत क्यों नहीं दी?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में रिमिशन और सजा में छूट अपने आप में बहस का विषय है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि कुलदीप सिंह सेंगर पहले से ही एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, ऐसे में राहत देने का सवाल और गंभीर हो जाता है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है और जमानत देने का कोई नया ठोस आधार सामने नहीं आया है।
हाई कोर्ट को क्या निर्देश दिए गए? (Delhi High Court Hearing)
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा है कि वह सेंगर की अपील पर 'आउट ऑफ टर्न' यानी प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करे। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस मामले में तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि पीड़ित परिवार या सह-आरोपियों की ओर से कोई अपील लंबित है, तो सभी मामलों की एक साथ सुनवाई हो। कोर्ट को बताया गया कि दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 11 फरवरी को तय है।
मीडिया ट्रायल पर क्यों नाराज हुई अदालत?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया ट्रायल को लेकर सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत किसी "हाथीदांत के टावर" में नहीं बैठी है और उसे मीडिया में चल रही चर्चाओं की पूरी जानकारी है।
पीड़िता के वकील को मीडिया में इंटरव्यू देने और बयानबाजी करने पर कड़ी चेतावनी दी गई। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि लंबित मामलों में किसी भी तरह का समानांतर ट्रायल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह मामला किससे जुड़ा है?
13 मार्च 2020 को ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन्हें हत्या का दोषी नहीं माना, लेकिन आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए अधिकतम सजा दी थी।
इसके अलावा दिसंबर 2019 में नाबालिग से रेप के मुख्य मामले में भी कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसकी अपील भी दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कानून के तहत जो भी अधिकार होंगे, वे मिलेंगे, लेकिन फिलहाल जमानत या सजा निलंबन का सवाल नहीं उठता। अब सबकी नजरें दिल्ली हाई कोर्ट पर हैं, जहां तीन महीने के भीतर इस मामले में अंतिम फैसला आने की उम्मीद है। यह आदेश एक बार फिर यह संदेश देता है कि गंभीर अपराधों में दोषियों के लिए राहत की राह आसान नहीं होती, चाहे उन्होंने कितनी ही सजा क्यों न काट ली हो।












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