'अफ्रीकी चीतों के खाने के लिए हिरण' मामले ने पकड़ा तूल, अब हरियाणा के इस नेता ने लिखी PM को चिट्ठी
कुलदीप बिश्नोई ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए इस मामले में दखल देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चीतों के भोजन के लिए चीतल व हिरण भेजने की सूचनाएं आ रही हैं, जो अति निंदनीय है।
नई दिल्ली, 19 सितंबर: 70 साल बाद नामीबिया से 8 चीते भारत लौट आए हैं। जिसमें से 5 मादा और 3 नर है। सभी चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में शिफ्ट किया गया है। चीते के आने के बाद विपक्ष पार्टियों ने मोदी सरकार पर तंज कसा है। चीते की आवाज को लेकर भी कई नेता लपेटे में आ गए। दहाड़ने को लेकर राजनीतिक पार्टियों की म्याऊं-म्याऊं हो रही है।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी निशाना साधते हुए कहा था कि 8 चीते तो आ गए 8 साल में 16 करोड़ नौकरी कब आएगी। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी तंज कसा था। कुनो नेशनल पार्क में चीते पहुंचने के बाद एक विवाद और खड़ा हो गया है। नया विवाद चीते के भोजन को लेकर है। चीते के भोजन को लेकर राजस्थान के बिश्नोई समाज ने चिंता जाहिर की है।
पीएम मोदी से दखल देने की अपील की
कुलदीप बिश्नोई ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए इस मामले में दखल देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चीतों के भोजन के लिए चीतल व हिरण भेजने की सूचनाएं आ रही हैं, जो अति निंदनीय है। मेरा केंद्र सरकार से अनुरोध है कि राजस्थान में विलुप्त होने की कगार पर पहुंचे हिरणों की प्रजाति और बिश्नोई समाज की भावनाओं को देखते हुए इस मामले की जांच करवाई जाए। अगर ऐसा है तो तुरंत इस पर रोक लगाई जाए।
बिश्नोई समाज आहत
बताया जा रहा है कि चीतों की भूख मिटाने के लिए राजगढ़ वन मंडल में स्थित नरसिंहगढ़ चिड़ीखो अभ्यारण से 181 चीतल कूनो नेशनल पार्क में भेजे गए हैं। इस पर अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा मुक्तिधाम मुकाम नोखा बीकानेर राजस्थान ने भी नाराजगी जताई है। महासभा के अध्यक्ष देवेंद्र बूड़िया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर लिखा कि भारत के वनों में विलुप्त प्रजाति चीता को पुनर्स्थापित करने के लिए नामीबिया से लाकर 8 चीतों को छोड़ा गया है। उनको भोजन में चीतल, हिरण इत्यादि परोसे जाएंगे। इस बात से बिश्नाई समाज बहुत आहत है।
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