क्या चीता दहाड़ता है ? राजनीतिक दलों के बीच जमकर हो रही म्याऊं-म्याऊं
नई दिल्ली, 18 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिन के मौके पर नामीबिया से 8 चीते भारत पहुंचने पर करीब 70 साल से उनकी गुर्राहट से अनसुनी देश की धरती में एक नई रौनक जरूर लौटी है, लेकिन इस बड़ी बिल्ली की आवाज को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच में एक अलग मिमियाहट देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं कि चीते की आवाज को लेकर क्या राजनीति हो रही है और इस जंगली जीव के आवाज की वास्तविकता क्या है और इसके वैज्ञानिक कारण क्या हैं ?

चीते की आवाज पर राजनीति
दशकों बाद भारत की धरती पर आठ चीते पहुंचे हैं, जिनमें से पांच मादाएं और तीन नर हैं। भारतीय जनता पार्टी अपनी पीठ थपथपाने में लगी हुई है कि देश की धरती से विलुप्त चीता भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में वापस आ गए हैं। तो कांग्रेस दावा कर रही है कि इस प्रक्रिया की शुरुआत तो उसी के कार्यकाल में हो गई थी। यह विवाद चल ही रहा था कि चीते की आवाज को लेकर गलत जानकारी देकर नेता लोगों के निशाने पर आ गए हैं। पहले भाजपा की ओर से कुछ पोस्टर आए, जिसमें चीते के दहाड़ने की आवाज सुनाई देने के दावे किए गए तो फिर यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने एक ट्वीट की वजह से ट्रोल हो गए हैं।

अखिलेश यादव हुए ट्रोल
अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार को लपेटने के लिए चीते की आवाज वाला एक वीडियो शेयर किया और कैप्शन में तंज भरे अंदाज में लिखा, "सबको इंतजार था दहाड़ का, पर ये तो निकला बिल्ली मौसी के परिवार का।" इसके बाद ट्विटर पर लोगों ने सपा चीफ को ही लपेटना शुरू कर दिया। शुभम यादव नाम के एक हैंडल से उन्हें बताया गया कि 'सर चीता दहाड़ता नहीं है।' एक यूजर ने लिखा, 'इन्हें कोई चीता और शेर का फर्क समझाओ।' गब्बर सिंह शोले वाले एक यूजर ने लिखा, 'फिर भी कुत्तों में खलबली है..।' एक और यूजर ने जवाब में लिखा, 'सर चीता दहाड़ता नहीं, ऑक्सफोर्ड में पढ़ाया गया होगा।'

सिंधिया समेत भाजपा नेताओं ने भी की गलती
हालांकि, अखिलेश से पहले भाजपा के कुछ नेताओं ने भी ऐसी ही गलती की थी। मध्य प्रदेश के भाजपा के एक नेता ने पोस्टर में लिखा था, 'फिर सुनाई देगी चीतों की दहाड़!' लेकिन, हद तो तब हो गई थी, जब केंद्रीय मंत्री और एमपी के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने ट्विटर पर लिखा, 'मध्य प्रदेश के कुनो पालपुर के जंगल, नामीबिया से लाए गए चीतों की दहाड़ के लिए तैयार हैं।' भाजपा नेताओं ने ये गलतियां चीते के आने से पहले ही कर दी थी।

क्या चीता दहाड़ते हैं ?
दरअसल, चीते बिग कैट फैमिली से जरूर हैं, लेकिन ये शेर या बाघ की तरह दहाड़ते नहीं सकते। बल्कि, इनकी आवाज बहुत हद तक बिल्लियों की तरह म्याऊं-म्याऊं जैसी होती है। यही नहीं, जब चीता को खुद पर खतरा महसूस हो तो वह गुर्रा भी सकते हैं, लेकिन उनकी आवाज में दहाड़ कतई नहीं हो सकती, इसकी वजह उनके स्वर ग्रंथि की बनावट है।

चीता दहाड़ते क्यों नहीं ?
दरअसल, बिल्लियों के दो सब-फैमिलीज होते हैं। अंग्रेजी में ये पैंथरीन और फेलाइन (pantherinae and felinae) कहलाती हैं। इसमें पहले परिवार में वो बिल्लियां शामिल हैं, जो दहाड़ते हैं। जबकि, दूसरे म्याऊं, गुर्राने या चें-चें जैसी आवाजें निकालती हैं। चीता समेत बाकी छोटी बिल्लियों के गले में एक हड्डी होती, जिसकी वजह से वे सिर्फ म्याऊं, गुर्राने या चें-चें करने जैसी ही आवाजं निकाल सकती हैं।

शेर और बाघ क्यों दहाड़ते हैं ?
पैंथरीन सब-फैमिलीज में तेंदुआ, जैगुआर, बाघ और शेर ये चार प्रजातियां शामिल हैं। ये इसलिए दहाड़ने में सक्षम हैं कि क्योंकि, इनकी स्वर ग्रंथि लचीले होते हैं, यानी ये अपने लिगामेंट को फैला सकते हैं, जिससे यह ऐसी दहाड़ने की आवाज निकालने में सक्षम हैं, जो दूर तक सुनाई पड़ती है।
चीता की आवाज खुद सुन लीजिए
हालांकि, अखिलेश के इस ट्वीट से पहले भाजपा नेता भी उन्हीं जैसी गलतियां कर चुके हैं। लेकिन, अब यूपी भाजपा के नेता भी सपा प्रमुख पर निशाना साध रहे हैं। पार्टी के एक प्रवक्ता नवीन श्रीवास्तव ने भी ट्वीट के जरिए उनपर निशाना साधते हुए लिखा है, जनता ने उनकी पार्टी को जिस तरह से हराया है, उससे उन्हें बुद्धि भ्रम हो रहा है या फिर ऑस्ट्रेलिया में डोनेशन की पढ़ाई का असर है कि वो नहीं जानते की चीता दहाड़ते नहीं गुर्राते हैं।












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