बंगालियों के उत्पीड़न की कहानी सुनाएंगे इस साल के पूजा पंडाल! थीम को लेकर आयोजकों ने बताया पूरा प्लान

Kolkata Durga Puja Theme: इस साल कोलकाता की दुर्गा पूजा महज भक्ति और सजावट तक सीमित नहीं रहने वाली है। शहर के कई बड़े और छोटे पूजा पंडाल ऐसे मुद्दे उठाने जा रहे हैं, जिन पर आम तौर पर त्योहारों में बात नहीं होती। बंगाली भाषी लोगों के खिलाफ कथित उत्पीड़न, उन्हें 'बांग्लादेशी' बताने के आरोप और भाषा के आधार पर भेदभाव, ये सब इस बार की पूजा थीम का अहम हिस्सा होंगे।

आयोजकों का कहना है कि इस तरह के आरोप बंगालियों के भारत के समाज में किए गए योगदान को कमजोर करते हैं। कई पंडालों में बंगाल की विरासत, प्रवासी मजदूरों की समस्याएं और प्रसिद्ध बंगालियों की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक उपलब्धियों को दर्शाया जाएगा। यह सिर्फ पूजा का त्योहार नहीं, बल्कि समाज के सच को दिखाने का मंच भी बन चुका है।

Kolkata Durga Puja Theme

मजदूरों के साथ भाषा के आधार पर भेदभाव

आयोजकों के मुताबिक, कई प्रवासी मजदूरों को सिर्फ बंगाली बोलने की वजह से परेशान किया जाता है। इस मुद्दे को भी इस साल के पंडालों में खास तौर पर दिखाया जाएगा।
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बिहाला से बागुईआटी तक अलग-अलग थीम

बिहाला के आदर्शपल्ली क्लब में विभाजन के दर्द को फिल्मकार ऋत्विक घटक की फिल्मों, खासकर मेघे ढाका तारा के जरिये दिखाया जाएगा। वहीं, बागुईआटी के अश्विनीनगर बंधुमहल में 42 हजार साल पुराने बंगाल डेल्टा के मानव इतिहास की झलक मिलेगी, जिसमें रवींद्रनाथ टैगोर, ईश्वर चंद्र विद्यासागर और राजा राममोहन राय जैसी हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा।

डिपोर्टेशन और अधिकारों के हनन पर फोकस

दमदम रोड हनुमान मंदिर जयश्री क्लब के आयोजक संजय दास ने बताया कि उनका पंडाल उन बंगाली भाषी लोगों के अनुभवों पर आधारित है, जिन्हें कथित तौर पर बांग्लादेश भेजा जा रहा है और जिनके बुनियादी अधिकार छीने जा रहे हैं। क्लब सचिव स्वरूप नाग के अनुसार, "आज दुर्गा पूजा सिर्फ मूर्ति दर्शन या प्रसाद तक सीमित नहीं है, यह अब वैश्विक मंच पर सम्मानित है और हमारे थीम अब किसी रिसर्च थीसिस जैसे होते हैं।"

'भाषा आतंकवाद' पर अनोखी प्रस्तुति

39 पल्ली दुर्गोत्सव समिति, जिसमें ज्यादातर युवा आयोजक डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं, 'भाषा आतंकवाद' विषय पर एक खास इंस्टॉलेशन तैयार कर रही है। आयोजकों का कहना है, "समाज की नजर में हम या तो उपेक्षित हैं या फिर दया के पात्र। हम चाहते हैं कि जीवन की कठिनाइयां हमें और मजबूत बनाएं।"
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