Kolkata Doctor Case: आरोपी संजॉय रॉय अकेले था या और भी थे शामिल? CBI जांच में लेगी AIIMS की मदद
Kolkata Doctor incident: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के बलात्कार और हत्या से संबंधित डीएनए और फोरेंसिक रिपोर्ट को लेकर सीबीआई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञों की राय मांग रही है।
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि इसका उद्देश्य केस को मजबूत बनाना है। सीबीआई इन रिपोर्टों को आगे के विश्लेषण के लिए एम्स-दिल्ली भेजने की योजना बना रही है।

13 अगस्त को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने जांच को कोलकाता पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया था, जिसने 14 अगस्त को अपनी जांच शुरू की। तब से सीबीआई ने कोलकाता पुलिस से सभी फोरेंसिक साक्ष्य अपने कब्जे में ले लिए हैं। उन्होंने संजॉय रॉय, संदीप घोष, पीड़ित के साथ ड्यूटी पर मौजूद चार डॉक्टरों और एक नागरिक स्वयंसेवक पर पॉलीग्राफ टेस्ट भी किए हैं ताकि अपराध के बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके।
पॉलीग्राफ और फोरेंसिक जांच
सीबीआई ने मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष पर कई तरह के धोखे का पता लगाने वाली जांच (डीडीटी) के बाद पॉलीग्राफ टेस्ट पूरा कर लिया है। शनिवार को उनका लेयर्ड वॉयस टेस्ट हुआ और उसके बाद सोमवार को पॉलीग्राफ टेस्ट हुआ, जो मंगलवार को समाप्त हुआ। ये परीक्षण आवाज के गुणों में तनाव, संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं और भावनात्मक संकेतों का पता लगाने में मदद करते हैं।
एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या कोलकाता पुलिस के एएसआई अनूप दत्ता का आरोपी से कोई संबंध था या अपराध के बाद उसने कोई सहायता प्रदान की थी। उन्होंने कोलकाता की एक अदालत में दत्ता के पॉलीग्राफ टेस्ट की अनुमति के लिए आवेदन दायर किया है। सीबीआई पहले ही मामले में उनकी संलिप्तता के बारे में दत्ता से पूछताछ कर चुकी है।
कोलकाता पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 10 अगस्त को संजॉय रॉय को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान, पुलिस ने रॉय के शरीर पर हाल ही में लगी चोटों को देखा, जो संघर्ष के संकेत दे रहे थे। आगे के विश्लेषण के लिए मेडिको-लीगल जांच के दौरान उसके जैविक नमूने एकत्र किए गए।
9 अगस्त को अस्पताल के छाती विभाग के सेमिनार हॉल में एक डॉक्टर ने पीड़िता का शव देखा था, जिस पर गंभीर चोट के निशान थे। इस घटना के बाद जूनियर डॉक्टर के लिए न्याय की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए।
एम्स विशेषज्ञों की भूमिका
सीबीआई यह निर्धारित करने के लिए एम्स के विशेषज्ञों की राय का इस्तेमाल करेगी कि क्या संजॉय रॉय ने अकेले अपराध को अंजाम दिया या अन्य लोग भी अपराध में शामिल थे। एजेंसी वर्तमान में यह मानकर काम कर रही है कि रॉय ही एकमात्र आरोपी है, लेकिन एम्स से विशेषज्ञ विश्लेषण प्राप्त करने के बाद ही इसकी पुष्टि की जाएगी।












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