जानिए नवजोत सिंह सिद्धू के वो फैसले जिसने समय-समय पर किया सभी को अचंभित
नई दिल्ली, 28 सितंबर। पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर भूचाल आ गया है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के धुर विरोधी रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा वह कांग्रेस में बने रहेंगे। सिद्धधू के अचानक लिए इस फैसले से हर कोई अचंभित है क्योंकि कैप्टन को कांग्रेस आलाकमान ने दर किनार करते हुए सिद्धू को पंजाब कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बना दिया था। जिसके बाद रार इतनी बढ़ गई कि कैप्टन ने नाराज होकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा तक दे डाला। वैसे ये पहला मौका नहीं है जब सिद्धू ने अचानक बड़ा फैसला लेकर सबको चौकाया है, ऐसे फैसलों की लंबी लिस्ट है।

1996 में पहली बार अपने इस फैसले से सबको चौकाया था
1996 के इंग्लैंड दौरे के वक्त नवजोत सिंह सिद्धू कप्तान मोहम्मद अज़हरूद्दीन से बग़ावत करके बीच दौरे से भारत लौट आए थे, ये पहला वाकया था जब सिद्धू ने अपने फैसले से सबको चौकाया था।

2014 में सिद्धू ने चुनाव नहीं लड़ने का अचानक ऐलान कर दिया था
क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू 2004 में राजनीति में आए और सांसद बने लेकिन एक पुराने केस में 2006 में हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन साल क़ैद की सज़ा सुनाए जाने के बाद सिद्धू को अमृतसर के सांसद पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था। भाजपा के वरिष्ठ नेता और वकील अरुण जेटली ने सिद्धू की ओर से पैरवी की थी और सिद्धू को जमानत मिली थी इसके बाद अमृतसर उपचुनाव में सिद्धू जीत गए। लेकिन सिद्धू के बजाय जब 2014 में बीजेपी ने अमृतसर से अरुण जेटली को अपना उम्मीदवार बनाया तो सिद्धू ने चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान करके सबको चौका दिया था।

राज्य सभा के सांसद पद से दे दिया था इस्तीफा
अप्रैल, 2016 में सिद्धू राज्य सभा के सांसद बनाए गए लेकिन उन्होंने तीन महीने बाद अपना इस्तीफा देकर सबको चौकाया था। 2014 में एनडीए सरकार के सहयोगी अकाली दल के सिद्धू हमेशा आलोचक रहे और लगतार जुबानी हमला करते रहे।

भाजपा को पंजाबियत का समर्थन बताते हुए दे दिया था इस्तीफा
पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत के समर्थक होने का दावा करते हुए सिद्धू ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। तब सिद्धू ने कहा मुझे राज्य सभा के सदस्य होने के नाते पंजाब से दूर रहने को कहा गया लेनिक मेरे लिए पंजाब से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उनके साथ उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने भी चीफ़ पार्लियामेंट सेक्रेटरी के पद से रिजाइन कर दिया।

2017 में कांग्रेस ज्वाइन करके सबको चौकाया
आम आदमी पार्टी ज्वाइन करने की अटकलों के बीच 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ज्वाइन करके सबको चौका दिया था। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के सहयोग से कांग्रेस में एंट्री ली इससे पहले उन्होंने आवाज़-ए-पंजाब फ़ोरम का गठन किया था। 2017 में कांग्रेस पार्टी पंजाब में सत्ता में आयी और सिद्धू कैबिनेट मंत्री बनाए गए।

मना करने के बावजूद चले गए पाकिस्तान पाक सेना प्रमुख को लगाया गले
2018 में भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान के जब पूर्व क्रिकेटर इमरान खान चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने नजजोत सिंह सिद्धू को शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया। पंजाब सीएम अमरिंदर ने सिद्धू से शपथ ग्रहण में ना जाने की बात कही लेकिन सिद्धू वाघा बार्डर से पाकिस्तान पहुंच गए वहां पाकिस्तान सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा और इमरान खान से करतापुर कॉरिडोर खोलने की गुजारिश तक कर डाली। सिद्धू के इस फैसले ने सभी को अचंभित कर दिया था क्योंकि भारत के साथ चल रही तल्खियों को नज़रदाज करते हुए सिद्धू पाकिस्तान पहुंच गए थे। जब विरोध हुआ था सिद्धू ने कहा मित्र बस से अटल बिहारी वाजपेयी भी लाहौर गए थे और नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में नवाज़ शरीफ़ को निमंत्रण दिया था। बता दें तब भारत और पाक के बीच रिश्ते इतने तल्ख नही थे।

2019 में मंत्री पद से दे दिया था इस्तीफा
शुरूआती दौर से ही उनकी सीएम कैप्टन से नहीं बनी मंत्री रहते हुए उनके द्वारा लिए गए निर्णयों को अमल में नहीं लाया गया और अप्रैल, 2018 में 1988 वाला गुरनाम सिंह की मौत का केस फिर कोर्ट पहुंचा जिसमें जेटली ने उन्हें जमानत दिलाई थी। इस केस के कोर्ट में आते ही पंजाब सरकार की ओर से सिद्धू के ख़िलाफ़ हलफनामा दाख़िल किया इतना ही नहीं 2019 में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने मंत्रीमंडल में परिवर्तन करते हुए सिद्धू का मंत्रीमंडल बदल दिया और सिद्धू ने गुस्से में आकर सबको चौकाते हुए मंत्री पद ग्रहण किए ही अपना इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया
लंबे अंतराल तक पार्टी की गतिविधियों से दूर रहने के बाद अगस्त 2021 में राहुल और प्रियंका के सहयोग के चलते सोनिया गांधी ने उन्हें तमाम विरोध के बाद पंजाब अध्यक्ष पर की कुर्सी सौंप दी। इसके बाद अब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर पंजाब की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है।












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