कन्नड़ दलित कवि सिद्धलिंगैया का कोरोना की वजह से निधन, जानें इनके बारे में?
कन्नड़ दलित कवि सिद्धलिंगैया का कोरोना की वजह से निधन, जानें इनके बारे में?
बेंगलुरू, 12 जून: मशहूर कन्नड़ कवि सिद्धलिंगैया का शुक्रवार (11 जून) को कोरोना महामारी की वजह से निधन हो गया है। दलित कवि कहे जाने वाले सिद्धलिंगैया 67 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कवि के निधन पर दुख जताया है। कन्नड़ कवि, नाटककार और दलित आंदोलन के प्रमुख चेहरे सिद्धलिंगैया का एक महीने से अधिक समय तक कोविड -19 से जूझ रहे थे। सिद्धलिंगैया की पत्नी का अभी भी कोरोना का इलाज चल रहा है। सिद्धलिंगैया 2 मई को कोरोना संक्रमित पाए गए थे। वह कई दिनों तक आईसीयू में भर्ती थे। उन्हें 4 मई को मणिपाल अस्पताल में एडमिट किया गया था। अस्पताल की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि सिद्धलिंगैया को गंभीर निमोनिया और मल्टीऑर्गन फेल्योर के साथ भर्ती कराया गया था और दोपहर 11 जून की दोपहर 3.45 बजे उन्होंने बीमारी के कारण दम तोड़ दिया।

जानें कन्नड़ कवि सिद्धलिंगैया के बारे में?
कन्नड़ कवि सिद्धलिंगैया का जन्म रामनगर जिले के मगदी में हुआ था। सिद्धलिंगैया को कन्नड़ में दलित-बंदया आंदोलन शुरू करने और कन्नड़ साहित्य में दलित लेखन की शैली शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। वह 'यारिगे बंथु, एलीगे बंथु नलवथथेलारा स्वाथंथरा' जैसी क्रांतिकारी कविताओं के लिए जाने जाते हैं। उनकी आत्मकथा ऊरु केरी का अंग्रेजी अनुवाद कई विश्वविद्यालयों के छात्रों के लिए पाठ था।
सिद्धलिंगैया दलित संघर्ष समिति (DSS) के संस्थापक थे, जिसने दलित आंदोलन का नेतृत्व किया और राज्य में दलित समर्थक राजनीतिक विचारधारा को प्रेरित किया। सिद्धलिंगैया ने 1975 में अपना पहला कविता संग्रह होल मदीगारा हादु से दलितों की आवाज बने।












Click it and Unblock the Notifications