Farmers Protest: खुद को जंजीरों में बांधकर रखता है ये किसान, जानिए क्यों जी रहा गुलामों की जिंदगी
नई दिल्ली। Farmers Protest: केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में आज 31वें दिन भी किसान आंदोलन जारी है। अपना विरोध व्यक्त करने के लिए कुछ किसान हाथ में बैनर और झंडा लिए खड़े हैं तो कुछ भूख हड़ताल कर रहे हैं। इन्हीं के बीच पंजाब के रहने वाले किसान कबल सिंह ने कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध जताने के लिए सबसे अगल तरीका चुना। कबल सिंह पिछले 18 दिनों से रोजाना 12 घंटे तक अपने पैरों, हाथों और गर्दन को जंजीरों में जकड़े रहते हैं। कबल सिंह का कहना है कि सरकार के कृषि कानूनों ने किसानों को गुलाम बना दिया है।
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31वें दिन भी धरना प्रदर्शन जारी
गौरतलब है कि कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर धरना प्रदर्शन करते आज 31 दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच किसान और केंद्र सरकार के बीच 5 दौर की वार्ता हुई है लेकिन समस्या का हल नहीं निकल पाया है। किसानों का कहना है कि सरकार तीनों कृषि कानूनों को रद्द करे, नहीं तो वह अगले एक साल तक ऐसे ही सड़कों पर बैठे रहेंगे। आंदोलन कर रहे किसानों में ज्यादातर पंजाब और हरियाणा के किसान शामिल हैं।

स्वतंत्र भारत का गुलाम बन गया है किसान
इस बीच 42 साल के किसान कबल सिंह अपने विरोध प्रदर्शन करने के तरीके को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। खुद के बेड़ियों से जकड़े कबल सिंह का कहना है कि नए कृषि कानूनों के चलते किसान स्वतंत्र भारत का गुलाम बन गया है, वह ये जंजीरें तभी उतारेंगे जब कृषि कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा। बता दें कि कबल सिंह सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के एक मार्च का हिस्सा हैं। कबल सिंह पंजाब में फाजिल्का जिले के आबोहार के निवासी हैं।

86 साल की मां भी आंदोलन में शामिल, लेकिन...
कबल सिंह ने बताया कि इस आंदोलन के लिए जब वह घर से निकले थे तो उनकी 86 वर्षीय मां भी उनके साथ थीं। करीब 20 दिन पहले सिंघु बॉर्डर आने के दौरान फिसलने की वजह से उनकी मां बलबीर कौर के कूल्हे टूट गए। कबल सिंह के मुताबिक उन्होंने अपनी मां को एक कजन के साथ घर भेज दिया और खुद यहीं रुक गए। कबल बताते हैं कि यह उनके हक की लड़ाई है।

मां के इलाज के लिए ब्याज पर लिए पैसे
कबल सिंह ने आगे बताया कि पंजाब में बुजुर्ग मां के इलाज के लिए उनके परिवार को एक लाख रुपए ब्याज पर लेना पड़ा है। कबल सिंह ने कहा, मां की सर्जरी के बाद वह तो ठीक हो गई हैं लेकिन अब मेरे कंधों पर एक बड़ा कर्ज है, जिसे चुकाना है। मेरे जैसे दूसरे किसान भी कर्जदार हैं, वहीं सरकार का यह नया कानून हमारी मुश्किलें और बढ़ाएगा। हम कृषि क्षेत्र में कॉर्पोरेट्स के आ जाने से अपने ही आजाद मुल्क में गुलाम बन चुके हैं।
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